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September 21, 2026
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राजनीति

लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को चाचा ने किया पार्टी से बाहर‚ खुद बने संसदीय दल के नेता

पार्टी के पांचों सांसदो ने पशुपति कुमार पारस को नया पार्टी अध्यक्ष और संसदीय दल का नेता चुन लिया है। पशुपति कुमार रामविलास पासवान के सबसे छोटे भाई हैं।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बिहार में जमीन खो चुकी लोक जनशक्ति पार्टी अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। दिवंग्त नेता रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा में तख्ता पलट हो गया है। उनके बेटे चिराग पासवान को पार्टी से बाहर कर पशुपति कुमार पारस अध्यक्ष बन गए हैं। पशुपति कुमार चिराग पासवान के सगे चाचा हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद पार्टी की कमान उनके बेटे चिराग पासवान के हाथों में है लेकिन अब पार्टी में बड़ी फूट पड़ चुकी है। यही नहीं लोजपा अब चिराग पासवान को लोकसभा में नेता के पद से भी हटा सकती है।

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लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जमुई सांसद चिराग पासवान के चाचा हाजीपुर सांसद पशुपति कुमार पारस ने उन्हें बड़ा झटका दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव में हंड्रेड परसेंट स्ट्राइक रेट देने वाली लोक जनशक्ति पार्टी के पांच सांसद ने चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर उनके चाचा पशुपति कुमार पारस हो राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया है। 5 सांसदों में पशुपति पारस के अलावा सांसद प्रिंस पासवान, वैशाली से वीणा सिंह, नवादा सांसद चंदन कुमार और खगरिया सांसद महबूब अली कैसर शामिल है। पशुपति कुमार रामविलास पासवान के सबसे छोटे भाई हैं। रातों-रात पार्टी में तख्तापलट करके वो चर्चा में आ गए हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि उन्हे NDA सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है।

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यह सब होने के बाद एलजेपी सांसद और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर यह कहा कि चिराग पासवान उनके भतीजे है। वे पार्टी में रहेंगे तो किसी को कोई दिक्कत नहीं है। पशुपति पारस ने कहा कि उन्होंने पार्टी को तोड़ा नहीं बल्कि बचाने का काम किया है। क्योंकि पार्टी में कई असामाजिक तत्व घुस गए थे। इसके बाद चिराग पासवान खुद कार ड्राइव कर अपने चाचा के दिल्ली स्थित आवास पहुंचे। लेकिन उनके लिए चाचा के घर का दरवाजा तक नहीं खोला गया।

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चिराग पासवान ले रहे थे गलत निर्णय

दिवंगत रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को अपने परिवार से तगड़ा झटका मिला है। दरअसल दिवंगत रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस ने कहा कि चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी राम विलास पासवान की सोच से भटक चुकी थी। उन्होंने कहा कि अब पार्टी दिवंगत रामविलास पासवान के कदमों पर ही चलेगी और उनके सपनों को साकार करेगी। यानी एक प्रकार से पशुपति कुमार पारस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि पार्टी से चिराग पासवान को अलग कर दिया गया है।

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जेडीयू में जाने की अटकलों में पारस ने कहा कि यह सरासर गलत है, उन्होंने कहा कि लोजपा मेरी पार्टी है और बिहार में हमारा संगठन काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि हम केंद्र में एनडीए के साथ हैं और यह गठबंधन आगे भी जारी रहेगा।

पशुपति कुमार का राजनीतिक बैकग्राउंड

रामविलास पासवान के तीन भाइयों में से पशुपति कुमार पारस सबसे छोटे हैं और लोजपा के संस्थापक सदस्य हैं। दो भाइयों का पहले ही निधन हो चुका है। पशुपति कुमार अब चिराग पासवान के इकलौते चाचा हैं। वह नितीश कुमार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

इसके अलावा अलौली विधानसभा सीट से 5 बार विधायक रह चुके हैं। फिलहाल वह सांसद हैं। उनकी गिनती बड़े दलित नेता के रूप में होती है। 2019 में उन्होंने हाजीपुर संसदीय सीट से चुनाव जीता था। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह NDA सरकार में मंत्री बनाए जा सकते हैं।

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चुनाव आयोग से मिलेंगे नेता

सूत्रों का कहना है कि आज 1.30 बजे पशुपति पारस की अगुवाई में बागी सांसद चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा 3 बजे दिल्ली में पार्टी नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं, जिसमें आगे की रणनीति का खुलासा होगा।

पार्टी के कई बड़े नेता चिराग के काम से खुश नहीं है और न ही उनके फैसलों के साथ नजर आ रहे हैं. जिन नेताओं ने चिराग के खिलाफ बगावत की है उनमें पशुपति पारस के अलावा प्रिंस राज, महबूब अली कैसर, वीणा देवी और चंदन सिंह का नाम आ रहा है।  

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अब क्या होगा चिराग का अगला कदम

पार्टी से बाहर हो जाने पर चिराग पासवान अलग-थलग पड़ गए हैं। ऐसे में सबकी नजर उनके अगले कदम पर है। पार्टी में बगावत की बात करें तो चिराग पासवान का बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए से अलग होना उनके चाचा और पार्टी के अन्य सांसदो को नागवार गुजरा है। इसके चलते पांचों सांसदो ने चिराग को पार्टी से बाहर कर दिया है। बता दें कि 28 नवंबर, 2000 को लोजपा बनी थी।

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क्या चाचा भतीजे ने मिलकर खेला है बड़ा खेल

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में 153 सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े करने वाले चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति का एकमात्र विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचा था। लेकिन उसमें भी एक महीने के भीतर ही अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को ठेंगा दिखाते हुए नीतीश कुमार के साथ चले गए और वहीं से ‘तीर’ चला कर ‘बांग्ला’ में छेद कर दिया। इसके बाद चिराग पासवान की हालत और भी पतली हो गई थी। विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार का विरोध करते करते उन्होंने न सिर्फ जेडीयू को अपना दुश्मन बना लिया बल्कि बीजेपी को भी अपने खिलाफ कर लिया। यही वजह है कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद चिराग पासवान की पूछ न तो एनडीए में हो रही थी न ही महागठबंधन का कोई घटक दल उन्हें तवज्जो दे रहा था।

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अब जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की आहट सुनाई दे रही है। तभी जेडीयू ने मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में एनडीए के सभी घटक दलों को सम्मानजनक स्थान देने की मांग की है। ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि मोदी मंत्रिमंडल में शामिल एलजेपी सुप्रीमो रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुए मंत्री का पद भी इस बार लोक जनशक्ति पार्टी को नहीं मिलने वाला था। इसकी वजह बिहार विधानसभा 2020 में एनडीए में रहते हुए चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी का एनडीए के खिलाफ चुनाव लड़ना था। चिराग पासवान के इस कदम से बिहार में एनडीए को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा था। सूत्र की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व भी चिराग पासवान के इस कदम से बेहद नाराज था। बिहार का मंत्रिमंडल विस्तार में लोक जनशक्ति पार्टी को बाहर रखने की तैयारी कर ली गई थी।

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राजनीतिक गलियारे में चर्चा यह है कि चाचा भतीजे ने मिलकर यह गेम प्लान सेट किया है। इससे लोक जनशक्ति पार्टी को दोहरा लाभ मिलेगा। पहला यह कि बिहार में नाराज जेडीयू का गुस्सा कम होगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नजदीकी बढ़ेगी। दूसरा यह कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जेडीयू और नीतीश कुमार की ओर से लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर कोई अड़ंगा नहीं लगाया जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऐसा होने के बाद चिराग पासवान भी अपने चाचा के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे और पार्टी में ही बने रहेंगे। इसके बाद पशुपति कुमार पारस, चिराग पासवान को 2025 में बतौर मुख्यमंत्री लॉन्च करेंगे।

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