
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर सीट से भाजपा विधायक जालम सिंह पटेल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा है कि जब उन्हें अप्रैल में कोविड-19 हुआ तो उन्हें भी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाये गये, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन आपूर्ति का भुक्तभोगी, प्रत्यक्षदर्शी एवं पीड़ित हूं।’’ जालम सिंह पटेल केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल के छोटे भाई हैं। उन्होंने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री चौहान से मांग की है कि नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले की जांच केन्द्रीय जांच दल से करायें।
नरसिंहपुर विधायक ने आरोप लगाया है कि उन्हें भी जबलपुर में इलाज के दौरान 6 नकली इंजेक्शन लगाए गए हैं। जिस हॉस्पिटल में उन्हें भर्ती किया गया था, वहां उन्हें कुल 12 इंजेक्शन लगे। इसमें 6 नकली थे। उन्होंने ने कहा कि नकली इंजेक्शन से कई मरीजों की मौत हुई है। मौत के इस अवैध कारोबार में कई राजनीतिक व्यक्ति, सिटी हॉस्पिटल जबलपुर का प्रबंधक और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। जालम सिंह पटेल केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल के भाई हैं।
जालम सिंह पटेल ने चौहान को 15 मई को लिखे पत्र में कहा है, ‘‘मेरी दमोह उपचुनाव में ड्यूटी थी। चुनाव के दौरान कोरोना वायरस की चपेट में आ गया था। मैं अस्पताल में भर्ती हुआ। खून एवं सीटी स्कैन जांच की रिपोर्ट में चार से छह प्रतिशत फेफड़ों में संक्रमण का पता चला। मुझे 17 अप्रैल 2021 से 22 अप्रैल 2021 तक छह रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया गये। इंजेक्शन लगाने के बाद भी मुझे खांसी-बुखार आती रही एवं ऑक्सीजन का स्तर घटता रहा।’’उन्होंने कहा, ‘‘मैं दोबारा अस्पताल में भर्ती हुआ। 25 अप्रैल को खून एवं सीटी स्कैन जांच की रिपोर्ट में फेफड़ों में 14 से 16 प्रतिशत तक संक्रमण बढ़ा हुआ आया। डॉक्टर टीम द्वारा मुझे पुन: छह रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाये गये।
पत्र में विधायक ने सिटी अस्पताल को राजसात करते हुए उसे सरकारी कोविड सेंटर में तब्दील करने की मांग की है। विधायक ने कहा कि सिटी हॉस्पिटल प्रबंधक और दोषियों से 5-5 लाख रुपए की राशि वसूल कर बतौर मुआवजा पीड़ित परिवारों को दिया जाए।
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सीएम को पत्र में उन्होंने बताया है कि जबलपुर के आसपास 15 जिलों के लोग इलाज के लिए आते हैं। इन जिलों में भी नकली इंजेक्शन की सप्लाई की गई है। इसके चलते कई कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है। उन्होंने पत्र में दावा किया कि वह खुद भुक्तभोगी हैं। उनके परिवार के दिनेश पटेल की 42 साल की उम्र में कोरोना से मौत हो गई। विधायक ने आग्रह किया है कि जबलपुर संभाग में एकमुश्त हजारों की संख्या में रेमडेसिविर इंजेक्शन किस-किस मद से, किन कंपनियों, व्यक्तियों, मेडिकल स्टोर्स, अस्पताल प्रबंधन या सीएमएचओ द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं, इसकी जांच हो।
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पटेल ने कहा, ‘‘सिटी हॉस्पिटल जबलपुर एवं अन्य सहयोगियों द्वारा मरीज भर्ती होने से पहले एक लाख रूपये से पांच लाख रूपये तक जमा कराया जाता है। कितने दिन में कौन सा मरीज मृत होगा, यह अस्पताल प्रबंधन तय करता था। महोदय जबलपुर के इस रैकेट को आपने धाराशाई कर मौत के खेल को बंद किया है। इसलिए आपको सादर प्रणाम।’’
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उन्होंने आगे लिखा, ‘‘महोदय नकली इंजेक्शन के कारण अविश्वास का वातावरण बना हुआ है। अनेक प्रदेशों से नकली इंजेक्शन आपूर्ति हुए हैं। इसीलिए केन्द्रीय जांच टीम का सहयोग लिया जाये एवं पैसों की खातिर निर्दोष व्यक्तियों की मौतों की निष्पक्ष जांच एवं पीड़ित व्यक्तियों को सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन एवं दोषियों से पांच-पांच लाख रूपये की राशि वसूल करके मुआवजा के रूप में प्रदान की जाये एवं दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाये।’’

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