
मध्यप्रदेश के जबलपुर में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में विहिप नेता और सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत मोखा समेत 3 पर FIR दर्ज की है। बताया जा रहा है कि कोरोना मरीजों की जरूरत को देखते हुए करीब एक लाख नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचकर लोगों को धोखा दिया गया। सरबजीत गुजरात से नकली इंजेक्शन मंगाकर अपने अस्पताल में संक्रमितों को लगवाए थे। अब इस मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने सीएम को पत्र लिखकर सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
सरबजीत सिंह मोखा शहर वीएचपी अध्यक्ष होने के अलावा जबलपुर में सिटी अस्पताल का मालिक है। वहीं मोखा के लिए देवेंद्र चौरसिया मैनेजर के तौर पर काम करता है। स्वप्न जैन के पास फार्मा कंपनियों की डीलरशिप है। स्वप्न जैन को सूरत पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं मोखा और चौरसिया फरार हैं।
जबलपुर के अतिरिक्त एसपी रोहित कशवानी ने बताया कि ओमती थाने में रविवार देर रात सरबजीत मोखा, सिटी अस्पताल का दवा संचालक देवेश चौरसिया और भगवर्ती फार्मा के संचालक सपन जैन के खिलाफ धारा 274, 275, 308, 420, 120बी, 53 आपदा प्रबंधन अधिनियम, 3 महामारी एक्ट का प्रकरण दर्ज कर लिया है।
23 और 28 अप्रैल को दो कार्टून रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवाए थे
सरबजीत मोखा ने 23 और 28 अप्रैल को अम्बे ट्रेवल्स के माध्यम से इंदौर से रेमडेसिविर इंजेक्शन के दो कॉर्टून मंगवाए थे। सरबजीत के कहे अनुसार देवेस चौरसिया इसे लेने अम्बे ट्रेवल्स के यहां गया था। वहां से इंजेक्शन लाकर उसने सरबजीत मोखा के कक्ष में रख दिए थे। उक्त दवाओं का भुगतान सपन जैन ने किया था। इस संबंध में सिटी अस्पताल में कोई रिकार्ड नहीं रखा गया था। एफआईआर दर्ज होते ही वह फरार हो गया।उच्च सूत्रों के मुताबिक मोखा ने इंदौर से 500 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन हासिल किए और उन्हें अस्पताल में मरीजों को 35 हजार से 40 हजार रुपये में बेच दिया.विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस नकली रेमडेसिविर प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है.इसमें नमक और ग्लूकोज से तैयार कर करीब एक लाख नकली इंजेक्शन तैयार कर देश के कई हिस्सों में दलालों के जरिए बेचे गए ।
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गुजरात में खुलासा होने के बाद माइनर अटैक का बहाना किया,पुलिस की देरी का फायदा उठा हुआ फरार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक मई को जब गुजरात में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले का खुलासा हुआ। तब सरबजीत मोखा ने सपन से बात की। पता किया कि क्या यह वही फर्म है, जिससे वह नकली इंजेक्शन ले रहा है। पुष्टि किए जाने के बाद वह माइनर अटैक बता कर हास्पिटल में भर्ती हो गया था। उसकी चाल थी कि अस्पताल में भर्ती होने पर वह गिरफ्तारी से बच जाएगा।आठ मई को भगवती फार्मा सहित तीनों मेडिकल स्टोर्स और उसके कर्मी देवेस चौरसिया से पूछताछ में ही सरबजीत सिंह माेखा की करतूत उजागर हो गई थी। तब वह हास्पिटल में ही भर्ती होने का नाटक किए हुए था। तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज नही की। पुलिस को पूरे दो दिन लग गए। तब तक मोखा को इसकी भनक लग गई और वह फरार हो गया। अब उसकी गिरफ्तारी पर ईनाम घोषित करने की तैयारी है।
दर्ज हो हत्या का मामला
कांग्रेस के पूर्व पार्षद संजय राठौर और नगर अध्यक्ष दिनेश यादव ने मांग कि मोखा के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज होना चाहिए। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की वजह से कई लोगों की अस्पताल में मौत हुई है। वहीं कई लोगों से उसने बेजा पैसे वसूले हैं। पुलिस ने इसके पूर्व रेमडेसिविर इंजेक्शन के मामले में आरोपियों के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की थी। अब मोखा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई होगी?
विवेक तन्खा ने सीबीआई जांच की मांग उठाई
मध्य प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने एक ट्वीट में कहा है, “सीबीआई को कई राज्यों में फैले इस घोटाले की जांच सौंपी जाए। ऐसे 3,000 इंजेक्शन इंदौर और 3,500 जबलपुर लाए गए। दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़ भी गए। अस्पतालों में किन और कितनो को लगे यह पब्लिक किया जाए। कौन बड़े लोग किन शहरों में लाये यह भी सामने आए।” तन्खा ने ट्वीट में यह भी कहा कि अगर सीबीआई को जांच नहीं सौंपी जाती तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
सिटी हॉस्पिटल की मान्यता समाप्त करने की मांग
सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन ने तीन सीजीएचएस लाभार्थी की शिकायत पर सिटी हास्पिटल की मान्यता समाप्त करने की अपर निदेशक सीजीएचएस आरपी रावत से मांग की है। बताया गया है कि अब तो रेमडेसिविर मामले में प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है। हास्पिटल ने अपने जवाब में 170 सीजीएचएस लाभार्थी का कोविड इलाज किया जाना बताया था। ऐसे सभी लोगों के इलाज का बिल रोकने की मांग की है। हॉस्पिटल ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाकर असली कीमत दर्शाई होगी।
इंदौर पुलिस ने अब तक गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से 6 पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया है। इंदौर की विजय नगर पुलिस सूरत पुलिस से सुराग मिलने केबाद हरकत में आई। एक पुलिस कांस्टेबल को ग्राहक के वेश में एक आरोपी के पास भेजा गया जो समान बैच नंबर 246039 A के रेमडेसिविर इंजेक्श बेच चुका था। पुलिस जहां नकली इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के सदस्यों की तलाश में जुटी है। वहीं एक युवक ने पुलिस से संपर्क कर दावा किया कि उसने अपने दोस्त के माता-पिता के लिए इंजेक्शन खरीदे थे। युवक के मुताबिक उसके दोस्त के माता-पिता की अब मृत्यु हो चुकी है।
कुछ और लोगों ने भी जबलपुर पुलिस से संपर्क किया है। उनके दावों का सत्यापन किया जा रहा है। गुजरात पुलिस ने सूरत के पास एक फॉर्म हाउस से दो लोगों कोको गिरफ्तार कर इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। बताया जा रहा है कि इस फार्म हाउस में करीब एक लाख नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन नमक और ग्लूकोज से बनाए गए थे।

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