
मध्य प्रदेश I बुधवार शाम से ही पंचायत चुनाव को लेकर और सामंजस्य का दौर चल रहा है सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने के निर्देश दिए थे वही सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि हाई कोर्ट इस मामले को लेकर त्वरित सुनवाई करें हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव कराए जाने या नहीं को लेकर निर्णय नहीं दिया।
गुरुवार को जब मामला जबलपुर हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले की सुनवाई 3 जनवरी मुकर्रर कर दी। इसके बाद फिर से याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए अब पूरे मामले को लेकर सुनवाई कल 17 दिसंबर शुक्रवार को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राज्य सरकार के साथ अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव; सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया याचिकाकर्ताओं ने
जबलपुर हाईकोर्ट के तुरंत सुनवाई से इनकार के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के सामने आवेदन पेश किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने उनका पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 17 दिसंबर को राज्य सरकार का पक्ष भी सुनेंगे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में कोई आदेश जारी होगा।
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मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव; इन मामलों को लेकर लगी हैं याचिकाएं
पंचायत चुनाव को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। पहले ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई। वहां से प्रकरण मुख्य खंडपीठ जबलपुर भेज गया। जबलपुर में नौ दिसंबर को एक साथ सभी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। तब याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में ले गए।
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सुप्रीम कोर्ट में 15 दिसंबर को सुनवाई हुई और सभी याचिकाकर्ताओं को जबलपुर मुख्य पीठ में प्रकरण रखने के आदेश जारी हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 16 दिसंबर को याचिकाकर्ता जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचे और प्रकरण में अविलंब सुनवाई की मांग की। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने अर्जेंट हियरिंग से इनकार करते हुए 3 जनवरी की नई तारीख तय कर दी थी।
पंचायत चुनाव की वैधानिकता को दी है चुनौती
भोपाल के मनमोहन नायर और गाडरवाडा के संदीप पटेल सहित पांच अन्य याचिकाकर्ताओं ने तीन चरणों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की वैधानिकता को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है राज्य सरकार ने 2014 के आरक्षण रोस्टर से चुनाव करवाने के संबंध में अध्यादेश पारित किया है, जो असंवैधानिक है। 2019 में राज्य सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से नए सिरे से आरक्षण लागू किया था। बिना इस अध्यादेश को समाप्त किए, दूसरा अध्यादेश लाकर 2022 का पंचायत चुनाव 2014 के आरक्षण के आधार पर कराने का निर्णय ले लिया।
महाराष्ट्र का हवाला दिया
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव; याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा के मुताबिक जिस तरह महाराष्ट्र में आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन ना होने पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचना निरस्त करते हुए फिर से अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है। उसी तरह मध्यप्रदेश में भी किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में भी आरक्षण और रोटेशन का पालन नहीं किया गया जो असंवैधानिक है।

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