
अपनी मांगो लेकर सचिन पायलट शुक्रवार को पार्टी हाइकमान से मिलने के लिए दिल्ली गए हुए थे। वह 6 दिन इसी आस में वहां डेरा जमाए रहे कि उनकी बातों को पार्टी आलाकमान जरूर सुनेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, ना तो उनसे चर्चाएं हुए और ना ही कोई मुलाकात नहीं हो सकी
जयपुर. राजस्थान में सीएम गहलोत और पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट की वजह से सियासी संकट चल रहा है। राजस्थान में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच बढ़ती सियासी खींचतान के बीच बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा कि राजस्थान कांग्रेस में चल रहे सियासी बवाल के बीच पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट 6 दिन दिल्ली में रहने के बाद बुधवार को बिना हाईकमान से मिले ही जयपुर लौट आए हैं। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया।
सचिन पायलट को 6 दिन दिल्ली रहने के बावजूद हाईकमान से बिना मिले लौटने के लेकर कई तरह की सियासी चर्चाएं हैं। कांग्रेस के जानकारों के मुताबिक फिलहाल नंबर गेम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास होने की वजह से सचिन खेमे की मांगों को तरजीह नहीं दी जा रही है।
पूरे सियासी विवाद के बीच अब तक मुख्यमंत्री गहलोत और सचिन पायलट ने कुछ नहीं बोला है। केवल समर्थक विधायकों के बयान आ रहे हैं। सचिन पायलट के जयपुर लौटने के साथ ही अब सियासी हलचल फिर दिल्ली से जयपुर शिफ्ट हो गई है। पिछले शुक्रवार को सचिन पायलट दिल्ली गए थे, तब से दिल्ली पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं।सचिन पायलट कैंप को अब तक प्रियंका गांधी या गांधी परिवार के किसी नेता से कोई पॉजिटिव संकेत नहीं मिला है। बीच में अजय माकन ने सब कुछ ठीक होने का बयान जरूर दिया था।
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पायलट की उम्मीदों पर फिरा पानी
दरअसल, अपनी मांगो लेकर सचिन पायलट शुक्रवार को पार्टी हाइकमान से मिलने के लिए दिल्ली गए हुए थे। वह 6 दिन इसी आस में वहां डेरा जमाए रहे कि उनकी बातों को पार्टी आलाकमान जरूर सुनेगी। साथ ही प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से मिलकर अपनी बांत रखेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, ना तो उनसे चर्चाएं हुए और ना ही कोई मुलाकात नहीं हो सकी। आखिर में पायलट 6 दिन बाद वापस जयपुर दिल्ली से बैरंग लौट गए।
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10 माह से पूरी नहीं हुईं पायलट की मांगे
बता दें कि पायलट गुट के विधायकों ने अपनी ही गहलत सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आलाकमान ने जिस तरह से पंजाब में सिद्धू की महज 10 दिन बात सुन ली गई है, उसी तरह राजस्थान में सचिन पायलट की बातों को भी हाईकमान को सुनना चाहिए। उनका कहना है कि 10 माह से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी सुलह कमेटी में उठाए गए मुद्दों का अब तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। विधायकों का कहना है कि आलाकमान ने जो वादे किए, उन्हें पूरा करना चाहिए। पायलट ने पार्टी के लिए दिन रात मेहनत की है, उनकी सुनी जानी चाहिए।
पालयट के सामने आए बगावती तेवर
कुछ दिन पहले एक अंग्रेसी अखबार को दिए इंटव्यू को दौरान पायलट ने कहा है कि सरकार अपने ही कार्यकर्ताओं की नहीं सुन रही है, जिसने अपना खून पसीना बहाकर सत्ता दिलाई है, आज वही किनारे पर हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जो वादे विधायकों से और जनता से किए थे वह अधूरे हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस पायलट के विरोध को रोक पाती है या नहीं।
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हाईकमान ने सचिन पायलट को दिया बड़ा मैसेज
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान ने सचिन पायलट को साफ शब्दों में मैसेज दे दिया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उन्हीं के नेतृत्व में सब कुछ होगा। हालांकि पायलट भविष्य के बड़े नेता हैं और उन्हें आगे मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा। यही नहीं, पार्टी को जब भी मौका मिला तो मंत्रिमंडल में या फिर संगठन में सचिन पायलट को पद दिया गया, लेकिन फिलहाल उन्हें इंतजार करना चाहिए। बहरहाल, राजस्थान कांग्रेस में चल रही गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है अब अंजाम क्या होगा यह देखना होगा।
सचिन पायलट की ये है चाहत
फिलहाल सचिन पायलट यही चाहते हैं कि मंत्रिमंडल का विस्तार हो। सरकार में 9 मंत्री के पद खाली हैं और उनके समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में और सरकारी नियुक्ति में जगह दी जाए, लेकिन ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर सचिन पायलट की मांगे पूरी नहीं होती हैं तो वो क्या करेंगे।
आज शाम को पहुंचेंगे जयपुर
प्रियंका और राहुल गांधी का छह दिन तक इंतजार करने के बाद सचिन पायलट आज दोपहर में अपने दिल्ली स्थित 5 कैनिंग लेन आवास से सड़क मार्ग से जयपुर के लिए रवाना हो गए हैं। जबकि वह शाम तक जयपुर पहुंचेंगे, जहां उनके समर्थक विधायकों और कार्यकर्ता इंतजार कर रहे हैं। वहीं, सचिन जयपुर पहुंचकर क्या निर्णय लेते हैं या फिर अपने समर्थकों को कैसे मनाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण है। कभी गांधी परिवार के करीबी और राहुल गांधी के राइट हैंड रहे सचिन पायलट अब समझ गए होंगे सियासत समय के साथ चलती है अपने हिसाब से नहीं।
