
डेढ़ महीने से लापता युवक भानू गौतम की हत्या का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। मुख्य आरोपी को उचेहरा पुलिस ने दिल्ली के पोखरण से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है।
नर कंकाल मिलने के बाद मर्डर मिस्ट्री का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि हत्याकांड का मुख्य आरोपी कोदू उर्फ रामनारायण मिश्रा व मृतक मढ़ऊ निवासी भानू गौतम 11 अप्रैल की दोपहर एक साथ बाइक में सवार होकर घर से निकले थे, इसके बाद पोंड़ी चौकी के पास तीसरा साथी हत्याकांड का सह आरोपी अंशू उर्फ नारायण दत्त उरमलिया निवासी पिथौराबाद भी मिल गया। चार पाव शराब और 100 रुपए का गांजा लेकर तीनों एक बाइक में सवार होकर जसो थाना क्षेत्र के कोरदर नाथ मंदिर चले गए। जहां पर तीनों ने मादक पदार्थों का सेवन किया। इसके बाद शाम हुई तो तीनों दोस्त परसमनिया के पास बाबा राजा झरने के पास पहुंच गए। जहां करीब 150 फिट गहराई में जाकर फिर शराब पार्टी की।
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नशा चढ़ते ही आरोपी रामनारायण ने भानू से 80 हजार रुपए पुरानी उधारी मांगी। ऐसे में पीड़ित ने कुछ और समय मांगा। तब आरोपी ने कहा कि आज मैं पैसा का हिसाब किताब करके ही जाऊंगा। ऐसे में रामनारायण ने कट्टा निकालकर दो फायर किए। गोली सिर में धंसते ही भानू की मौत हो गई। तब अंशू और रामनारायण ने शव को कंदराओं में छिपा दिया। इसके बाद आरोपी और सह आरोपी साथ में पोंडी आए, जहां पर रामनारायण ने अंशू को उतारकर अपनी बाइक से सतना आ गया। हत्या के बाद पुलिस के डर से वह सतना से रामपुर चौरासी, हाटी, जैतवारा, खुटहा और फिर हिरौंदी में मोबाइल से सिम निकालकर दोनों को फेंक दिया। फिर वह मझगवां के रास्ते मानिकपुर अपनी बहन के पास पहुंचा। यहां से वह दिल्ली और राजस्थान गया। करीब डेढ़ महीने तक फरारी काटता रहा, लेकिन अंशू की एक गलती ने पुलिस को हत्या का राज खोलने के लिए मजबूर कर दिया।
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सह आरोपी अंशू उरमलिया पोंडी चौकी पुलिस को तीन बार गुमराह किया
पुलिस ने बताया कि मृतक भानू गौतम थोड़ा लापरवाह था। वह कई बार घर से गोल हो चुका था। ऐसे में घर वाले भी उसके लापता होने के मैटर को सीरियस नहीं लिए। पर जब पिता की मई की शुरुआत में ही कोरोना से मौत हो गई। ऐसे में बड़ा बेटा घर नहीं पहुंचा तो गांव वालों और पुलिस को भी शक हुई। ऐसे में पुलिस हर एक बात को सीरियस ले रही थी, लेकिन दोनों आरोपी पुलिस को गुमराह करने में लगे थे। सह आरोपी अंशू उरमलिया पोंडी चौकी पुलिस को तीन बार गुमराह किया, लेकिन उचेहरा थाना प्रभारी निरीक्षक राजेन्द्र मिश्रा ने उसके तीनों बयानों की तस्दीग कराई तो कहानी मैच नहीं खा रही थी। ऐसे में आरोपी की हर एक गतिविधियों पर उचेहरा पुलिस ध्यान देने लगी तो शुरू से लेकर अंत तक के बयान में वह फंसता रहा। ऐसे में पुलिस हंसी खुशी में ही गुनाह को अंशू से कबूलबा लिया।
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अंशू उर्फ नारायण दत्त उरमलिया पिता कमलभान ने पूरी दास्ता बताते हुए घटनास्थल परसमनिया के बाबा राजा झरने के पास लेकर गया। जहां पर फॉरेंसिंक अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक भानू गौतम का नर कंकाल बरामद किया किए। फिर परिजनों की मौजूदगी में शिनाख्त भानू गौतम के कपड़ों के देखकर की गई। भाई और मां ने उसके टी-शर्ट, पैंट और चप्पल को देखकर भानू का कंकाल बताया है। फिर कंकाल का बिसरा रीवा मेडिकल कॉलेज के बायोलाजी लैब भेजकर सुरक्षित रखा दिया गया है। साथ ही डीएनए टेस्ट की पुलिस ने बात कही है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात संदिग्ध समझ में आ रही है कि सुबह पुलिस ने कंकाल को बरामद कर केस का हद तक खुलासा कर दिया। वहीं शाम तक मुख्य आरोपी राम नारायण पुलिस की गिरफ्त में आ गया। पुलिस का दावा है कि एक टीम दिल्ली गई थी। जो पोखरण से आरोपी को गिरफ्तार कर उचेहरा थाने लाई है। वहीं शुक्रवार को नर कंकाल बरामद होने के बाद पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेशकर दी है।

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