
मध्यप्रदेश के रीवा जिले से उदासीन सिस्टम और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है
रीवा: सिस्टम की उदासीनता के चलते मध्यप्रदेश का रीवा एक बार फिर शर्मसार हुआ है। मऊगंज नगर परिषद के कंटेनमेंट जोन में एक लड़की छत से गिर गई, कंटेनमेंट जोन में छत से गिरने से घायल हुई लड़की 12 घंटे तक तड़पती रही। सभी ओर से रास्ता बंद होने के कारण पिता नहीं निकल पाए। उसके पिता ने कई बार एम्बुलेंस, स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत से मदद मांगी, लेकिन सिस्टम के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। कड़ी मशक्कत के बाद बेबस पिता आखिरकार 8 घंटे के बाद रात 11 बजे रात 11:00 बजे कंटेनमेंट जोन की जाली तोड़कर अपनी बच्ची को हाथ ठेले में लेकर वह अस्पताल पहुंचा।
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पूरा मामला
दरअसल मऊगंज नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 5 में गोलगप्पे वाले ने इस कदर संक्रमण बांटा कि दो दर्जन से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए। 20 मई को प्रशासन ने 5 और 6 वार्ड को कंटेनमेंट जोन घोषित करते हुए रास्ते बंद कर दिए। मऊगंज नगर परिषद के वार्ड छह में हीरा लाल गुप्ता की 23 वर्षीय पुत्री ललिता दोपहर 2 बजे अपने घर की छत से नीचे गिर गई थी। उसे गंभीर चोट आई थी। पैर में फैक्चर आने के कारण वह खड़ी तक नही हो पा रही थी. पिता की माली हालत ऐसी नहीं थी कि वह अपने प्रभाव से बच्ची को तत्काल इलाज उपलब्ध करा लेता. बेटी के इलाज के लिए उसका पिता हीरालाल अस्पताल ले जा रहा था लेकिन वार्ड पांच व छह में पिछले दिनों 11 संक्रमित मिले थे। इसलिए दोनों वार्डों को कंटेंनमेंट जोन बनाया गया है। इस दौरान उसे आगे जाने के लिए रास्ता नहीं मिल रहा था। इस दौरान उसने अधिकारियों और कर्मचारियों से भी गुहार लगाई मगर उसकी किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद वह बेटी को हाथ ठेले में लेकर अस्पताल पहुंचा था।
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आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद रात 11:00 बजे कंटेनमेंट जोन की जाली तोड़कर अपनी बच्ची को हाथ ठेले में लेकर वह अस्पताल पहुंचा। हालांकि अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद ही बेटी का इलाज शुरू हो गया और अब वह खतरे से बाहर है।
सिस्टम को नहीं पड़ता फर्क
आरोप है, दर्द से कराह रही बेटी का पिता नगर पंचायत से लेकर मोहल्ले के जागरूक लोगों से भी मदद मांगी, पर कोई अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं था। सबका यही कहना था, सिस्टम की तारबंदी तोड़कर कौन केस लगवाएगा।
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इनका कहना
यह मामला मीडिया से पता चला है। अगर बेटी को चोट लगी थी तो उसे पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को जानकारी देनी थी, निश्चित ही उसकी मदद की जाती लेकिन यह गलत है कि मदद मांगने पर प्रशासनिक अफसरों ने उसकी मदद नहीं की फिर भी मैं मामले की जांच करा रहा हूं।
एपी द्विवेदी, एसडीएम मऊगंज

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