
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफा देने से राजस्थान की सियासत गरमा गई है। एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच शीत युद्ध की दहक सतह पर आ गई है।कांग्रेस इसे अपना आंतरिक मामला बता रही है, लेकिन विपक्ष को एक मौका जरूर मिल गया है। इस बीच, पायलट ने पीसीसी में मीडिया से बातचीत में कहा- हेमाराम चौधरी कांग्रेस के सीनियर मोस्ट विधायक हैं। राजस्थान की राजनीति में और कांग्रेस की राजनीति में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। वे नेता प्रतिपक्ष रहे। कैबिनेट मंत्री रहे और छठी बार विधानसभा में चुनकर गए हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी, विनम्रता का दूसरा उदाहरण शायद ही कांग्रेस में दूसरा कोई हो। इतने वरिष्ठ नेता ने जब अपना इस्तीफा दिया, मैंने अखबारों मेंं पढ़ा। उनका इस्तीफा देना बहुत बड़ी चिंता का विषय है।
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शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए पायलट ने कहा कि मुझे उनके इस्तीफे की जानकारी अखबार से मिली है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चौधरी को मनाने का प्रयास करने की बात कहते हुए साफ कर दिया कि इसकी आड़ में बयानबाजी करने वालों को पार्टी की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। डोटासरा ने कहा कि मैंने उनसे खुद फोन पर बात की है। वे अनुभवी नेता है। चौधरी की नाराजगी इसलिए है कि जिला कलेक्टर ने उनका फोन नहीं उठाया। जानकारी करने पर पता चला कि कलेक्टर तूफान के कारण बात नहीं कर सके, बाद में बात कर उनकी समस्याओं का समाधान कर लिया गया। इसी बीच, राज्य सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल व डॉ. बीडी कल्ला ने चौधरी से फोन पर बात कर उन्हें अपनी समस्याएं बताने के लिए कहा, लेकिन चौधरी ने दोनों मंत्रियों से कहा कि मेरी समस्या का समाधान सीएम और माकन ही कर सकते हैं, किसी मंत्री के हाथ में यह नहीं है।
राजनीतिक हलकों में हेमाराम चौधरी के इस्तीफे को सचिन पायलट खेमे की नाराजगी के प्रतीक के तौर पर ही देखा जा रहा है। सचिन पायलट ने भले ही यह इशारा किया हो कि उन्हें इस्तीफे के बारे में अखबारों से पता लगा, लेकिन पायलट खेमा हेमाराम के इस्तीफे को सियासी तौर पर भुना जरूर रहा है। इसे गहलोत खेमे और सरकार पर दबाव बनाने की कवायद के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अशोक गहलोत व अजय माकन ने अब तक नहीं की बात
चौधरी को इस्तीफा दिए चार दिन हो गए, लेकिन सीएम और माकन के उनसे बात नहीं करने को लेकर कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि ये इस माामले को लंबा खींचकर ठंडे बस्ते में डालना चाहते हैं। हालांकि गहलोत के विश्वस्तों ने विधायकों को टटोलना शुरू कर दिया। वे पायलट खेमे के विधायकों से भी संपर्क साधने में जुटे हैं। इसके साथ ही बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले छह विधायकों से भी बात की गई है। सत्ता में भागीदारी नहीं मिलने से ये विधायक नाराज बताए जाते हैं। सीएम खेमा नहीं चाहता कि चौधरी के इस्तीफे पर जल्दबाजी में कोई फैसला हो। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने भी अभी तक चौधरी से बात नहीं की है। जोशी और सीएम की तो इस मामले में चर्चा हो गई, लेकिन नाराज विधायक को मनाने का काम सीधा अपने हाथ में नहीं लिया।

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