
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाँ0 मिश्रा द्वारा जिला अस्पताल एवं विकास खण्ड स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों पर औचक भ्रमण एवं निरीक्षण का कार्य तेज कर दिया गया है बरसाती मौसम को देखते हुए विभिन्न जल जनित बीमारियों के रोकथाम प्रबंधन के लिए की गई तैयारियों की खण्ड स्तर पर समीक्षा एवं शासन के निर्देशों का पालन करने के लिए की गई कार्यवाही की जानकारी संकलित कराई जा रही है। डाँ0 मिश्रा वर्तमान में जिले के स्वास्थ सूचकांकों को ध्यान में रखते हुए मातृ स्वास्थ एवं कुपोषण शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विशेष जोर देने के लिए विकासखण्ड वार प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए सभी संस्था प्रभारियों को निर्देशित किया है।
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डाँ0 मिश्रा द्वारा बताया गया कि जिले में कोरोना एपीडेमिक के दौरान दूसरे सभी स्वास्थ्य के कार्यक्रमों की गति में ठहराव जैसी स्थिती निर्मित हो जाने के कारण स्वास्थ सूचकांकों में गिरावट आयी है और समयावधि में कार्य संपदित नही हो पा रहे थे। अब मातृ स्वास्थ्य के अंतर्गत आर.सी.एच. पोर्टल एवं एच.एम.आई.एस. में बैकलांग सहित सभी जानकारी अद्यतन किया जाना है यह कार्य ग्राम स्तर से मैदानी कार्यकर्ताओं से लेकर प्रत्येक स्तर पर दुरुस्त कराया जाना है इसके अतिरिक्त मातृ मृत्यु समीक्षा, मां और नवजात की समस्त जानकारियों की पोर्टल इन्ट्री, नियमित टीकाकरण की सेवा एवं 2 बच्चों के बीच में 3 वर्ष का अंतराल के लिए अस्थाई साधन का उपयोग उसके उपरांत स्थाई पुरुष एवं महिला नसबंदी की सेवा के लिए लक्ष्य दंपतियों की सर्वे कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। यह सभी कार्य वित्तीय वर्ष के प्रारंभ होते ही माह अप्रैल में किया जाता है लेकिन कोरोना संक्रमण रोकथाम के चलते नही हो पाया था। अभी भी कोरोना का संकट उसी प्रकार से बना है उसके साथ-साथ सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को पूर्वानुसार नियमित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।
सी.एम.एच.ओ. ने बताया कि जिले में कुपोषण की समस्या शुरू से रही है इसके लिए शासन द्वारा पोषण पुनर्वास केन्द्र जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर क्रमशः 20 एवं 10 बिस्तरीय स्थापित कराये गये है इसमें मैदानी कार्यकर्ताओं की भूमिका होती है कि कुपोषित बच्चो को ग्राम स्तर से चिन्हांकित कर भर्ती कराएं और उसके डिस्चार्ज होने के बाद उनका समय-समय पर फालोअप करते रहे। जानकारी में यह भी देखने में आया है कि पोषण पुनर्वास केन्द्रों की बिस्तर क्षमता अनुसार शत-प्रतिशत कुपोषित बच्चे भर्ती नही होने के कारण खाली रह जातें है क्योंकि बच्चों का चिन्हांकन समय से नही किया जाता। भ्रमण के दौरान इन सभी बातों पर अमल कर ध्यान देने के लिए बी0एम0ओ0 को सहेजा गया है आगामी माह में प्रगति की समीक्षा की जाएगी। डाँ0 मिश्रा द्वारा बताया गया कि आर्थिक लाभ से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय से हितग्राहियों नही मिलने पर सी0एम0 हेल्प लाइन में शिकायत दर्ज कराई जाती है। जिसका निराकरण तत्काल संबंधित संस्था प्रभारी कराएं और भविष्य के लिए ऐसी स्थिती न उत्पन्न होने दे कि हितग्राही को वांछित लाभ के लिए शिकायत करनी पड़े। कई बार यह भी देखने में आता है कि शिकायत कर्ता की शिकायत का निराकरण कर दिया जाता है उसके बाद भी शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पोर्टल से नही हटवाया जाता है। इससे विभाग की जिम्मेदारी बनी रहती है, ऐसी स्थिती में बी.एम.ओ. शिकायतों को वर्गीकृत कर अलग से सूचित करें।
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उन्होने कहा कि प्रत्येक अधिकारी कर्मचारी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अपने मुख्यालय पर रहें और अपने दायित्वों का निर्वहन करें इसका पालन करानें के लिए बी.एम.ओ. प्रोत्साहित करे, नोटिस जारी करें, वेतन काटे, चाहे फिर निलंबन का प्रस्ताव प्रस्तुत करें। प्रत्येक ए.एन.एम. अपने क्षेत्रीय गांव में कम से कम माह में एक से दो बार भ्रमण करे संपूर्ण ए.एन.सी., हाई रिस्क प्रिग्नेन्सी का चिन्हांकन कर ले एवं आगामी माह की ड्यू लिस्ट तैयार करा ले सभी आंन लाइन जानकारी पोर्टल में अपडेट रखे और कोविड महामारी के नियंत्रण हेतु टीकाकरण के साथ नियमित टीकाकरण का बैकलांग पूर्ण कराए।

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