
रीवा : गुरुवार को मध्य प्रदेश में रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी देखने को मिली। जूनियर डॉक्टरों ने इलाज कराने आए एसएएफ जवान के साथ मारपीट की। डॉक्टरों ने जवान को एक कमरे में करीब एक घंटे तक बंद रखा और 10-12 लोग मिल कर उसकी पिटाई करते रहे। जिससे जवान के पूरे शरीर पर चोटें आई हैं।मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। कोरोना संकट से निपटने में पुलिस और डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्रशासन के साथ अस्पताल प्रबंधन भी दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिशों में लगा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एसएएफ जवान की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है।
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पूरा मामला
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गुरुवार को काफी देर तक हंगामे का माहौल रहा। जानकारी के मुताबिक एसआईएसएफ भटलो में तैनात एसएएफ की नवीं बटालियन का जवान आकाश साहू अपने सीनियर अफसर के इलाज को लेकर रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचा था। उसे अपने अफसर को डिस्चार्ज करा कर ले जाना था। इसके साथ उसे अपनी भी कुछ समस्या थी। उसने ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर से थोड़ा जल्दबाजी करने का आग्रह किया जिसको लेकर कहासुनी हो गई। थोड़ी देर बाद 10-12 डॉक्टर जमा हुो गए और एसएएफ जवान को अंदर लेकर गए। उन्होंने उसे करीब एक घंटे तक बंद रखा,उसकी पिटाई करते रहे और जवान के साथ अमानवीय व्यवहार करते रहे।
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पीड़ित जवान ने आरोप लगाया है कि जूनियर डॉक्टरों ने उसके साथ गाली-गलौज की और धमकी भी दी। जवान के मुताबिक डॉक्टरों ने कहा कि उसकी शिकायत का भी ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला, क्योंकि मेडिकल जांच भी वही करेंगे। डॉक्टरों ने डराने की कोशिश करते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर प्रताड़ित करने की धमकी भी दी। जवान ने कहा है कि यदि डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं तो आम लोगों के साथ वे क्या करते होंगे। उसने आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन मनोज इंदुलकर ने कहा कि एसएएफ जवान ने डॉक्टरों के साथ धक्कामुक्की की जिसके बाद माहौल बिगड़ने लगा। उन्होंने जूनियर डॉक्टरों का बचाव करते हुए सुलह की जरूरत जताई।जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी से सबसे बड़ी समस्या जिला प्रशासन के लिए खड़ी हो गई है। घटना से पुलिस और सुरक्षाकर्मी रोष में हैं। कोरोना कर्फ्यू में उनकी भूमिका सबसे अहम है।दूसरी ओर, कोरोना मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था को बनाए रखने में जूनियर डॉक्टरों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशासन उन्हें भी नाराज नहीं करना चाहता।मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिये सुलह की कोशिशें हो रही हैं।
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रीवा के एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों को ऐसा व्यवहार शोभा नहीं देता। पूरे मामले की जांच हो रही है। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। एसएएफ जवान की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर बीच का रास्ता निकालने के प्रयास हो रहे हैं।

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