
जरूरत मंदो को नही मिला अनाज, मनरेगा का काम बन्द
शासन-प्रशासन एवं विद्युत मंडल के उच्च अधिकारियों द्वारा कोविड संक्रमण की त्रासदी के समय में अघोषित विद्युत कटौती अमानवीय है। इससे भयावह स्थिति उत्पन्न होगी। अस्पतालों और घरों में बिजली की सख्त जरूरत है। विधायक एवं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सरकार से आग्रह किया कि संकट के समय बिजली कटौती को तत्काल रोके।
कमलेश्वर पटेल आज सीधी जिले के सिहावल जनपद क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों से वर्चुअल चर्चा कर रहे थे । पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें बताया कि ग्राम पंचायतों में अघोषित विद्युत कटौती से कोरोना रोगी एवं आमजन बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। जरूरतमंदों को वितरित किया जाने वाला खाद्यान्न भी गांवों में निशुल्क वितरित नहीं हुआ है। अनेक स्थानों पर गरीब ग्रामीणों से शुल्क लेकर अतिरिक्त खाद्यान्न 10 किलो दिया जाना था वह भी नहीं किया गया है। विधायक ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को काम नहीं दिया जा रहा है। जो कार्य इसके तहत पूरे हुए हैं, उनके मटेरियल एवं मजदूरी का भुगतान भी पिछले पांच माह से नहीं किया गया है। अंत्येष्टि सहायता राशि व प्राकृतिक आपदा से होने वाली मृत्यु की सहायता राशि उनके परिजनों को पिछले पांच माह से नहीं वितरित हुई है।
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कमलेश्वर पटेल ने बताया कोरोना से संक्रमित मरीजों की मौत होने के बाद भी उन्हें कोरोना से मृत्यु का प्रमाण पत्र नहीं देकर परिजनों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से गेहूं खरीदी केंद्र पर क्रय किया गया अनाज खुले में पड़ा है व अनाज सड़ रहा है। गेहूं का परिवहन नहीं होने से जनता की गाढ़ी कमाई के रुपयों का दुरुपयोग हो रहा है।
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बिजली कटौती बंद करें
कमलेश्वर पटेल ने बताया कि कोरोना महामारी के दौर में एक और अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों,कोविड केंद्रों व होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की जीवन रक्षक दवाइयों, वेंटिलेटर व ऑक्सीजन के अभाव में परेशानी हो रही है। वंही दूसरी और विद्युत की कटौती से भयावह त्रासदी उत्पन्न हो सकती है।मरीजों के लिए जानलेवा साबित होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 24 घंटे घरेलू बिजली एवं 10 घंटे कृषि कार्य के लिए बिजली देने की घोषणा की है। सरकार जो कहती वह नही करती है।
