
1 महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भक्त और भगवान के बीच की दूरियां खत्म हुई। कोरोना संक्रमण के कारण महाकाल मंदिर के गर्भ गृह प्रवेश में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था। इस प्रतिबंध को आज हटा लिया गया है। श्रद्धालुओं के लिए विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश आज से शुरू हो चुका है। हालांकि इस दौरान श्रद्धालुओं को कोविड-19 गाइडलाइन का अनिवार्य तौर पर पालन करना होगा। मंदिर में मास्क और कोरोना गाइड लाइन का पालन करने के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।
महाकाल मंदिर गर्भगृह में प्रवेश 30 दिसंबर से प्रतिबंधित था
गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण और नव वर्ष पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते मंदिर प्रबंध समिति ने 30 दिसंबर से 3 जनवरी तक गर्भगृह में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन और बढ़ते संक्रमण को देखते हुए गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया। इसके बाद भी गर्भगृह नहीं खुला और प्रवेश पर प्रतिबंध को अगले आदेश तक बड़ा दिया गया था। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की बसंत पंचमी पर मुराद पूरी हो गयी। बीते करीब 37 दिनों से बंद महाकाल मंदिर का गर्भगृह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
श्रद्धालुओं के लिए यह निर्णय पूर्व में लिया गया था
महाकाल मंदिर समिति ने कोरोना का संक्रमण और भक्तो की भीड़ कम होने के कारण मंदिर में 1500 रुपए की रसीद कटवाकर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। लेकिन शनिवार को अचानक मंदिर समिति ने निर्णय लेकर गर्भ गृह से दर्शन शुरू कर दिए।
प्रदेश सरकार की नई गाइड लाइन के बाद लिया निर्णय
महाकाल मंदिर के प्रशासक गणेश धाकड़ ने बताया की राज्य सरकार की नयी गाइड लाइन के अनुसार शादी में मेहमानों को बुलाने पर लगे प्रतिबन्ध को हटाने के बाद मंदिर समिति ने भी फैसला लिया की जब ज्यादा भीड़ नहीं होगी उस समय श्रद्धालुओं को महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलेगा और भीड़ होने पर श्रद्धालु 1500 रुपए देकर गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे। इधर शनिवार को दोपहर जैसे ही श्रद्धालुओं की लाइन को गर्भ गृह में प्रवेश दिया वैसे ही महाकाल मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
