
गांवों के विकास के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। इनमें से एक योजना वन विभाग की भी है। इस योजना के तहत ग्रामीणों को रोजगार तो मिलेगा ही। वहीं निश्चित रूप से एक तय आमदनी का रास्ता भी खुलेगा। वन विभाग द्वारा प्रदेश में बांस उत्पादन के लिए मप्र बांस मिशन योजना चलाई जा रही है योजना के तहत बांस उत्पादन की छोटी छोटी इकाइयां ग्रामीणों के द्वारा लगाई जाती है। योजना के अंतर्गत खास बात यह है कि इसमें वन भूमि का चयन ग्रामीणों को ही करना होता है। वहीं वन विभाग ग्रामीणों को बांस उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाता है।
योजना यह है
मप्र बांस मिशन के अंतर्गत वन विभाग द्वारा इस बार पांच हजार हेक्टेयर में बांस के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में बिगड़े वन को चिह्नित किया गया है। फसल की तरह प्रदेश में बांस का उत्पादन बढ़ाना है।
यह स्थायी आमदनी देने वाली योजना है। एक हेक्टेयर में लगे 650 भिर्रे (बांस के पौधे) पांच साल में एक परिवार के लिए सवा लाख या उससे ज्यादा आमदनी का साधन बन जाएंगे और फिर आमदनी साल-दर-साल बढ़ती जाएगी।
70 साल तक आमदनी का जरिया बनेंगे बांस
मप्र बांस मिशन योजना अंतर्गत ग्रामीण नजदीक की वनभूमि पर बांस लगा सकते हैं। इसके बाद पांच साल तक इन पौधों की देखरेख करें और फिर 70 साल तक ये पौधे इन परिवारों की जीविका चलाने का साधन बनेंगे।
योजना का उद्देश्य
बांस उत्पादन बढ़ाना भारत सरकार और राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। यह योजना बिगड़े वनों के सुधार, स्थानीय स्तर पर रोजगार देने और प्रदेश की हरियाली बढ़ाने में भी सहायक होगी।
इसके लिए वन विभाग, ग्राम वन समिति और बांस उत्पादन करने वाले स्व-सहायता समूह के बीच त्रि-पक्षीय अनुबंध होगा, जिसमें साफ कर दिया जाएगा कि वनभूमि पर समूह का कोई अधिकार नहीं होगा और वह सिर्फ बांस का उत्पादन ही कर सकेंगे। बांस लगाने के लिए समूहों को उनके गांव या नजदीक में ही वनभूमि दी जाएगी।
पहली बार में ही सवा लाख रुपए तक की आमदनी
मप्र बांस मिशन योजना के तहत बांस के पौधों को पानी देने, निंदाई-गुड़ाई सहित अन्य जरूरी काम के लिए हितग्राही को मनरेगा योजना से मजदूरी दी जाएगी। यह पहली बार के उत्पादन तक (पांच साल) चलेगा। योजना के अनुसार पांच साल बाद हर साल उत्पादन पर पूरा अधिकार उस परिवार का होगा, जो शुरुआत से देखरेख कर रहा है।
एक परिवार को एक हेक्टेयर जमीन मिलेगी
इस योजना के तहत एक परिवार को एक हेक्टेयर जमीन मिलेगी इस जमीन पर हितग्राही द्वारा बांस का रोपण किया जाएगा बांस के पौधों की देखभाल के लिए हितग्राही को मनरेगा के तहत मजदूरी मिलेगी इसके बाद यही परिवार बांस काटेगा और बेचेगा। उससे जो राशि आएगी। उसमें से 20 प्रतिशत वन समिति के खाते में जाएगी। शेष राशि उस परिवार का शुद्ध मुनाफा होगी।
एक परिवार को एक हेक्टेयर का जिम्मा योजना के तहत समूह से जुड़े एक परिवार को एक हेक्टेयर की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मिशन के अधिकारियों के अनुसार एक पौधे से पांच साल में कम से कम पांच से छह बांस निकलेंगे।
एक बांस 50 रुपये का बिका तो भी एक पौधे के पांच बांस 250 रुपये में बिकेंगे। इस तरह 650 पौधे के बांस एक लाख 62 हजार पांच सौ रुपये के होते हैं। कुछ पौधे खराब भी होंगे तो पहली बार में सवा लाख की आमदनी तय है।
योजना का लाभ कैसे लें
मप्र बांस मिशन योजना का लाभ लेने के लिए ग्रामीण स्थानीय ग्राम वन समिति के सदस्यों या वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
