
जबलपुर। सरकार के साथ धोखाधड़ी करने वाली गैंग मृत पेंशनरों से मिलते-जुलते भिखारियों और ग्रामीणों की करते थे तलाश, उन्हें हर महीने एक हजार रुपए का देते थे लालच, कई मृत पेंशनरों के नाम पर लोन निकाल लेते थे।
14 मृत लोगों के नाम पर पिछले 3 सालों से बैंक से पेंशन निकाल रहे गिरोह के कारनामे सामने आने लगे हैं। आरोपियों को रांझी पुलिस ने 25 अगस्त तक रिमांड पर लिया है। पूछताछ में एक बैंक चपरासी की भूमिका भी सामने आई है। आरोपी मृत लोगों के चेहरे से मिलते-जुलते भिखारी और ग्रामीणों की तलाश करते थे। फिर उन्हें एक हजार रुपए महीने देने का लालच देकर हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच में बैंक बुलाते थे। 3 साल से आरोपी सरकारी खजाने में सेंध लगा रहे थे।
रांझी पुलिस की गिरफ्त में आए गिरोह का सरगना कांचीपुरम कॉलोनी मढ़ई निवासी सुशील वाघमारे (35) है। वहीं, इंद्रा नगर भूमिया मोहल्ला निवासी जीवन सिंह ठाकुर (39) और महाराजपुर अधारताल निवासी राजकुमार नामदेव (58) उसके एजेंट हैं। जीवन और राजकुमार का काम था, वे मृत पेंशनर की तलाश करते थे। जैसे ही, रांझी व अधारताल क्षेत्र में कोई पेंशनर की मौत होती, दोनों उसके घर पहुंच जाते थे। मृत पेंशनर के बेटा या बेटी से वह संपर्क करते थे। मृत पेंशनर की पासबुक समेत अन्य दस्तावेज ये कहते हुए ले लेते थे कि वे उनकी पेंशन चालू करा देंगे ।
सरगना सुशील वाघमारे जहां बैंक में लोन पास कराने की दलाली करता था। वहीं, आरोपी जीवन सिंह ठाकुर व राजकुमार नामदेव का काम मृत पेंशनर की तलाश करने के साथ उससे मिलते-जुलते लोगों की तलाश करते थे। उनके टारगेट पर धार्मिक स्थलों के बाहर भीख मांगने वाले महिला या पुरुष और ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी बुजुर्ग होते थे। वह उन्हें एक हजार रुपए हर महीने पेंशन मिलने का झांसा देकर हर महीने की एक से 5 तारीख के बीच बुलाते थे।
2018 से मृत पेंशनरों की पेंशन निकाल रहे
ये गिरोह वर्ष 2018 से मृत पेंशनरों की पेंशन निकाल रहे थे। आरोपियों ने कई मृत पेंशनरों के नाम पर दो से ढाई लाख रुपए लोन भी निकाल लिया हैं। अभी 14 मृत पेंशनरों के नाम सामने आ चुके हैं। पर प्रारंभिक पूछताछ में ऐसे लोगों की संख्या 40 सामने आई है। रांझी पुलिस सभी लोगों के बारे में इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित एसबीआई और अधारताल स्थित एसबीआई से डिटेल मांगा है। अधारताल स्थित एसबीआई के एक बैंक चपरासी की संलिप्तता सामने आई है।
इनके नाम पर निकाली जा रही थी पेंशन
बच्चूलाल, श्यामाबाई, चंदा बाई, सुशीला बाई, हरि सिंह, भागवती, गोविंद ढीमर, कोसाबाई, गायत्री बाई, बरी बाई, शीला चौधरी, रामदयाल, देव दयाल, गुलाबचंद, राधाबाई के नाम पर आरोपी 2018 से पेंशन निकाल रहे थे।
ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
- मुख्य आरोपी सुशील वाघमारे लोन दिलाने का एजेंट था।
- सुशील ने जीवनलाल भूमिया और राजकुमार नामदेव को एजेंट के तौर पर जोड़ा था।
- शहर में रांझी व अधारताल क्षेत्र में फैक्ट्री के चलते सबसे अधिक पेंशनर रहते हैं।
- राजकुमार व जीवनलाल का काम ऐसे पेंशनर की तलाश करनी होती थी, जिसकी हाल ही में मौत हुई हो।
- राजकुमार व जीवनलाल मृत पेंशनर के बेटे या बेटी को झांसे में फंसाकर उनका पासबुक ये कहकर लेते थे कि वे उनका पेंशन चालू करा देंगे।
- साथ ही बैंक के चपरासी से मिलीभगत कर मृत पेंशनर का सिग्नेचर की फोटो खींच लेते थे।
- जीवन लाल व राजकुमार फिर पासबुक में चस्पा फोटो से मिलते जुलते चेहरे वाले भिखारियों और आदिवासी समाज के लोगों को ढूंढते थे।
- ऐसे लोगाें को एक हजार रुपए पेंशन दिलाने का झांसा देकर बैंक तक हर महीने की एक से 5 तारीख के बीच बुलाते थे।
- बुजुर्ग होने पर अंगूठे की छाप अक्सर मिट जाती है, इसका भी फायदा उठाते थे। जो पेंशनर हस्ताक्षर करता था उसका विड्राल पर दस्तखत कर देते थे।
- बैंक में 1 से 5 तारीख के बीच पेंशनर की भीड़ लगती है। इसी भीड़ में आरोपी फेक लोगों को पेंशनर बनाकर भेज कर पैसे निकलवाते थे।
- नवंबर महीने में जीवित होने के सत्यापन के समय बैंक के चपरासी को पैसे का लालच देकर बैंक मैनेजर से जीवित होने का प्रमाण पत्र आवेदन तैयार कर भविष्य निधि कार्यालय भिजवा देते थे।
- आरोपी पिछले तीन वर्षों से 14 मृत लोगों के खाते से इसी तरह हर महीने पेंशन निकाल रहे थे।
- आरोपी एक हजार रुपए फर्जी पेंशनर बनने वाले को, एक तिहाई रकम पेंशनर के बेटे या बेटी को और कुछ हिस्सा चपरासी को देते थे।
यह है मामला
रांझी थाने में साॅफ्टवेयर इंजीनियर योगेंद्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई है। उसकी नानी गायत्री बाई शर्मा शासकीय विद्यालय में शिक्षक थीं। 2004 में रिटायर होने पर 17000 रुपए पेंशन मिलती थी। 2018 में गायत्री बाई और योगेंद्र शर्मा बीमार पड़े थे। उस समय पैसों की तंगी आ गई थी। उसी दौरान सुशील वाघमारे ने संपर्क किया था।
ढाई लाख लोन दिलाने के एवज में 30 हजार रुपए और जरूरी दस्तावेज लिए। अक्टूबर 2018 में गायत्री बाई की मौत हो गई। योगेंद्र ने सुशील वाघमारे से दस्तावेज मांगे, तो उसने ये कहकर नहीं दिया कि अब तो तुम्हारी नानी भी नहीं हैं। कुछ दिन पहले उसे पता चला कि आरोपी उसकी नानी की पेंशन निकाल रहे हैं।
