
देश सहित प्रदेश भर में जहां एक तरफ कोरोना का कहर जारी है। वहीं दूसरी तरफ लगातार जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके लगातार इन दवाइयों की कालाबाजारी जारी है। इसी बीच राजधानी क्राइम ब्रांच के दो सब इंस्पेक्टर को लेनदेन के आरोप के निलंबित कर दिया गया। दोनों सब इंस्पेक्टर पर आरोप है कि कोलार पुलिस के हाथ लगे रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाले आरोपित में से एक आरोपित को हिरासत में लेने के बाद लेनेदेन कर छोड दिया गया था। वही मामले में एक सब इंस्पेक्टर भूमिका अभी और संदिग्ध मिली है, और सब इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच की जा रही है।
बता दें कि कोलार पुलिस ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते तीन आरोपित को गिरफतार किया था। जिसमें एक आरोपित आकर्ष सक्सेना को क्राइम ब्रांच ने कुछ दिन पहले रेमडेसिविर के के साथ हिरासत में लिया था, लेकिन लेनदेन के बाद छोड दिया गया था। उसके साथ एक और मेडिकल स्टोर का संचालक था। इस मामले में एसपी मुख्यालय द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जहां जांच में क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर एमडी अहिरवार और सब इंस्पेक्टर हरिकिशन वर्मा को आरोपी पाया गया है, दोनों सब इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में एक और सब इंसपेक्टर की भू्मिक संदिग्ध मिली है। उसकी जांच अभी जारी है।
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इधर एसपी मुख्यालय की माने तो पुलिसकर्मियों ने आरोपी को छोड़ने के लिए कितने में सौदा पक्का किया है। इस बात की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा तीनों सब इंस्पेक्टर को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ किया जाएगा। वही मामले में कई अन्य तरह के खुलासे संभव है।

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