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June 18, 2026
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दमोह में करारी हार के बाद राहुल लोधी ने हार का ठीकरा फोड़ा मलैया परिवार पर, शिवराज से कार्रवाई की मांग

विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी राहुल लोधी 17 हजार वोटों से हार गए हैं। दमोह उपचुनाव में यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। इस सीट को जीतने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी थी। सीएम से लेकर कैबिनेट मंत्री दमोह में कैंप कर रहे थे। उसके बावजूद दमोह सीट बीजेपी के हाथ से फिसल गई। प्रत्याशी राहुल लोधी ने पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया और उनके परिवार पर हार का ठीकरा फोड़ा है।

कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम चुनाव लड़ने वाले राहुल लोधी की 17 हजार से ज्यादा वोटों से हुई पराजय बीजेपी को पच नहीं रही। पार्टी का पूरा फोकस इस चुनाव पर था और 20 से ज्यादा मंत्रियों सहित पार्टी का पूरा संगठन इस चुनाव में जी-जान से जुटा था। उसके बावजूद राहुल लोधी की पराजय ने पार्टी में हलचल मचा दी है। हार के फौरन बाद राहुल लोधी ने इसका ठीकरा पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके परिवार पर फोड़ दिया। हार के बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल लोधी ने कहा कि दमोह की जनता को धन्यवाद। मैं बीजेपी में दमोह में मेडिकल कॉलेज खुलवाने के मकसद से आया था, वो पूरा हो गया है। चुनाव में हार-जीत चलता रहता है। मैं दमोह की लोगों की सेवा करता रहूंगा। लोधी ने कहा कि चुनाव हारने का बहुत ही स्पष्ट कारण है कि भीतरघात हुआ है। जिनके पास शहर की जिम्मेदारी थी, वह अपने खुद का वार्ड हार गए।दमोह की सीट जयंत मलैया की परंपरागत सीट रही है और सात बार वे इस विधानसभा सीट से चुनकर विधायक बन चुके हैं राहुल लोधी का आरोप है कि जयंत मलैया और उनके पुत्र ने सोची समझी रानीति के तहत उन को निपटाया है। पार्टी के खिलाफ मलैया परिवार का काम करना मेरे लिए भारी पड़ गया ।

राहुल लोधी ने शिवराज से कार्रवाई की मांग
लोधी ने कहा कि भीतरघात करने वाले लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वे इसकी शिकायत पार्टी से करेंगे। पार्टी को अपनी मां बताने वाले लोगों गद्दारी की है। मलैया जैसे कद्दावर नेता के वार्ड में हम नहीं जीत पाए हैं। मैं खुलेआम कहता हूं कि मलैया की वजह से हार हुई है। इस चुनाव में मलैया परिवार की पूरी रणनीति सफल हुई है। उन्होंने मलैया को पार्टी से निष्कासित करने की भी मांग की है।

पहले था भीतरघात का डर
दरअसल, सीट पर करीब तीन दशक का बीजेपी का कब्जा रहा है। पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया यहां से चुनाव जीतते आए हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में मलैया चुनाव हार गए थे। उपचुनाव में अपने बेटे सिद्धार्थ मलैया के लिए टिकट चाहते थे। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो मलैया के समर्थक खुलेआम चुनाव लड़ने की मांग करते रहे।

राहुल के आरोप बेबुनियाद पार्टी में मुझे जो भी काम सौंपा, मैंने बखूबी किया-जयंत मलैया

राहुल के इन आरोपों के जवाब में जयंत मलैया ने कहा कि राहुल के आरोप बेबुनियाद हैं। पार्टी में मुझे जो भी काम सौंपा, मैंने बखूबी किया। पार्टी ने मुझे प्रचार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए हैलीकॉप्टर दिया, मैं गया। जिन जिन सभाओं में मुझे संबोधित करने के लिए कहा गया, मैं गया। मेरे बेटे सिद्धार्थ मलैया को शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई और उसने भी उसे बखूबी निभाया लेकिन पार्टी 39 में से 38 वाडौँ में हार गई। दरअसल पार्टी जनता का मूड नहीं भाप पाई। राहल लोधी के खिलाफ भारी जन आक्रोश था और इसकी वजह उनका डेढ़ वर्ष का कार्यकाल था जिसमें उनके ऊपर दल बदल कर जनता के साथ विश्वासघात करने के साथ-साथ उनकी नकारात्मक छवि भी बड़ी वजह बनी। पिछले डेढ़ साल में जनता के साथ उनकी संवाद हीनता, जन कल्याण के कार्य न करना बड़े कारण रहे। मलैया ने कहा कि भी पार्टी फोरम पर इन सारी बातों को रखेंगे।

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