
देशभर में इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते हाहाकार मचा है। हर रोज़ करीब 4 लाख नए केस सामने आ रहे हैं। लिहाज़ा देश के मौजूदा हालात से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं। देश में कोरोना से बेकाबू हो रहे हालात पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से लॉकडाउन लगाने पर विचार करने के लिए कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लॉकडाउन से जिस पर खासा असर पड़े उनके लिए इंतजाम किए जाएं। ऑक्सिजन की कमी को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई निर्देश दिए गए हैं।उच्चतम न्यायालय ने वैक्सीन की खरीद पॉलिसी को फिर से रिवाइज करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के अधिकार में बाधा उत्पन्न होगी जो संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न अंग है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट की बेंच ने ये भी कहा कि लॉकडाउन लगाने से पहले सरकार ये भी सुनिश्चित करे कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम पड़े। कोर्ट के मुताबिक जिन लोगों पर लॉकडाउन का असर पड़ सकता है उनके के लिए खास इंतज़ाम किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा आपातकालीन भंडार अगले चार दिनों में तैयार कर लिया जाना चाहिए। आपात भंडारों को भरने के काम पर प्रत्येक राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश के साथ सक्रिय रूप से विचार-विमर्श कर डिजिटल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से हर वक्त किया जाना चाहिए। यह हर दिन किए जाने वाले आवंटन के अतिरिक्त होगा
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम से कम पड़े इसका खास ध्यान रखा
सुप्रीम कोर्ट की ओर से लॉकडाउन लगाने से पहले यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम से कम पड़े इसका खास ध्यान रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आपातकालीन प्रयोगों के लिए राज्यों के साथ मिलकर ऑक्सिजन का एक सुरक्षित भंडार रखने और भंडार स्थानों के विकेंद्रीकरण का निर्देश दिया है ताकि सामान्य आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की स्थिति में ये प्रयोग के लिए तत्काल उपलब्ध हों।
आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों की व्यवस्था करे सरकार
इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी कहा कि लॉकडाउन का असर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर पड़
सकता है। ऐसे में सरकार लॉकडाउन से पहले ऐसे लोगों के लिए व्यवस्था करे।
पहचान पत्र ना होने पर भर्ती करने से मना नहीं कर सकते अस्पताल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मरीज को इसलिए भर्ती करने से मना नहीं किया जा सकता कि उसके पास जरूरी पहचान पत्र नहीं है। बिना आईडी प्रूफ वाले मरीजों को भी दवा और जरूरी आपातकालीन सेवाएं मुहैया कराई जाए।मरीज को पहचान पत्र न होने पर अस्पताल में भर्ती करने या फिर आवश्यक दवा देने से मना नहीं किया जाएगा।
टीकाकरण अभियान पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों दोनों को अगले 6 महीनों के लिए वैक्सीन स्टॉक की मौजूदा और अनुमानित उपलब्धता के बारे में जानकारी देने को कहा है. टीकाकरण की कीमत निर्धारण में हस्तक्षेप न करने के लिए केंद्र की दलीलों का उल्लेख करते हुए कोर्च ने स्पष्टीकरण मांगा कि क्या किसी दूसरे विकल्प पर विचार किया गया था ताकि टीकाकरण अभियान को तेज किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: लिया था संज्ञान
कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए स्वत: संज्ञा संज्ञान लिया था। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट्ट भी शामिल थे। कोर्ट ने चार मुद्दों वैक्सीन, ऑक्सीजन की कमी, दवाइयों की कमी और राज्यों को लॉकडाउन के अधिकार पर केंद्र से जवाब मांगा था।
राष्ट्रीय नीति बनाने का सुझाव
देश भर में इन दिनों हॉस्पिटल को लेकर मारामारी जैसे हालात है. लोग हॉस्पिटल में बेड न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को हॉस्पिटल में दाखिले के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की सलाह दी है। कोर्ट ने ये नीति दो हफ्ते के अंदर बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक किसी को भी स्थानीय आवासीय प्रमाण या पहचान प्रमाण की कमी के लिए अस्पताल में भर्ती या आवश्यक दवाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
वैक्सीन की खरीद पर कोर्ट की सलाह
पिछले महीने 20 अप्रैल को केंद्र सरकार ने वैक्सीन की खरीद को लेकर नई रिवाइज पॉलिसी का ऐलान किया था। केंद्र ने कहा था कि अब वो सिर्फ 50 फीसदी ही वैक्सीन की खरीद करेगा। जबकि बाकी बचे 50 प्रतिशत वैक्सीन अब सीधे राज्य और प्राइवेट कंपनी मंहगे दरों पर खरीद सकेंगे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुझाव दिया कि टीकों की खरीद को केंद्रीकृत किया जाए, और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर वितरण को विकेंद्रीकृत किया जाए।
