25.2 C
Madhya Pradesh
August 5, 2026
MP Sidhi News
Bankingदेश विदेश

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सख्त हिदायतें : सोशल मीडिया पर शिकायतों को दबाएं नहीं,कहा- मदद मांगने वालों पर कार्रवाई की तो मानेंगे अवमानना

कोर्ट ने केंद्र से टेस्टिंग, ऑक्सीजन व वैक्सीनेशन को लेकर उठाए गए कदमों से जुड़े सवाल तो किए ही साथ ही सोशल मीडिया पर दर्द बयां कर रहे लोगों व डॉक्टर व नर्स का भी मुद्दा उठाया I केंद्र से कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि राष्ट्रीय स्तर पर अस्पताल में भर्ती को लेकर क्या नीति है और जिस संक्रमण मामले का RTPCR से पता नहीं लग रहा उसके लिए क्या कदम उठाए गए।  जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'केंद्र को वैक्सीन के निर्माण में तेजी लाने के लिए किए गए निवेश का ब्यौरा भी देना चाहिए। यह निजी वैक्सीन निर्माताओं को किए गए फंडिंग में केंद्र का अहम हस्तक्षेप होगा।शीर्ष अदालत में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस रवींद्र भट की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को कोरोना महामारी केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर सुनवाई की गई।सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि केवल राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों की ही जांच होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र से टेस्टिंग, ऑक्सीजन व वैक्सीनेशन को लेकर उठाए गए कदमों से जुड़े सवाल तो किए ही साथ ही सोशल मीडिया पर दर्द बयां कर रहे लोगों व डॉक्टर व नर्स का भी मुद्दा उठाया। कोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन को लेकर अफरातफरी का सवाल किया गया जिसपर केंद्र ने जवाब दिया कि वहां ऑक्सीजन की सप्लाई की गई लेकिन उनके पास इतनी क्षमता ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से भी केंद्र के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के लोगों के लिए ऑक्सीजन और दवाइयां जुटाने के लिए मिल कर काम कीजिए। राजनीति चुनाव के समय होती है विपत्ति के समय नहीं।

दिल्ली की मदद के लिए केंद्र पर कोर्ट का दबाव

केंद्र की ओर से जवाब देते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘दिल्ली को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिया गया, पर इसे मेंटेन करने की क्षमता उनके पास नहीं है। एक और निर्माता ऑक्सीजन देना चाहता है लेकिन दिल्ली के पास क्षमता नहीं है इसे बढ़ाना होगा।’ कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की क्षमता कम है ऐसा केंद्र को नहीं कहना चाहिए क्योंकि यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए मदद की जानी चाहिए। यदि कुछ नहीं किया तो मौत का आंकड़ा बढ़ जाएगा। सॉलिसीटर जनरल ने कहा, ‘ दिल्ली को सप्लाई बढ़ाने के लिए कहीं और कमी करनी पड़ेगी। दिल्ली में कोविड से हो रही हर मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं।’ सॉलिसीटर जनरल ने कहा, ‘दिल्ली को ऑक्सीजन सप्लाई पर कोर्ट के आदेश को लेकर मैंने केंद्र से निर्देश लिया। आपने जो कहा है, उसका पालन किया जाएगा। SC ने केंद्र के इस रवैये की सराहना की।’ बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों के पास खाली टैंकर हैं उनसे लेने पर की बात कही थी।

सुनी जाए बेबस लोगों की आवाज,सोशल मीडिया पर अपील करने वाले लोगों के खिलाफ कोई राज्य नहीं कर सकता कार्रवाई
कोर्ट ने आगे कहा कि उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज देने के लिए क्या किया जा रहा है जो कोविड-19 के संपर्क में है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर इस संकट के समय लोगों द्वारा अपील करने पर कोई भी राज्य उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती या कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा, ‘इन्फॉर्मेशन को आने से नहीं रोकना चाहिए, हमें लोगों की आवाज सुननी चाहिए।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले 70 सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ है जो महामारी के कारण उत्पन्न हालात में अभी बहुत काम करने की ज़रूरत है। कोर्ट ने कहा, ‘बगैर ऑक्सीजन के छटपटा रही जनता को हम सुनना चाहते हैं।’ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सोशल मीडिया पर पीड़ा का इजहार करने वाले यूजर्स का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यदि लोग सोशल मीडिया के जरिए अपने हालात बयां कर रहे हैं उसपर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि इंटरनेट पर मदद की गुहार लगा रहे नागरिकों पर रोक इस आधार पर नहीं लगाई जानी चाहिए कि वे गलत शिकायत कर रहे हैं. न्यायालय ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर राष्ट्रीय संकट है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, सूचना का निर्बाध प्रवाह होना चाहिए.

कार्रवाई की तो मानेंगे अवमानना

शीर्ष अदालत ने केंद्र, राज्यों और सभी पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति पर अफवाह फैलाने के आरोप पर कोई कार्रवाई नहीं करे जो इंटरनेट पर ऑक्सीजन, बिस्तर और डॉक्टरों की कमी संबंधी पोस्ट कर रहे हैं. पीठ ने साफ तौर पर कहा कि परेशान नागरिकों के ऐसे किसी भी पोस्ट पर कार्रवाई होने पर हम उसे अदालत की अवमानना मानेंगे. न्यायालय ने टिप्पणी की कि अग्रिम मोर्चे पर कार्य कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी इलाज के लिए अस्पताल में बिस्तर नहीं मिल रहे हैं ।

दिल्ली की मदद के लिए केंद्र पर कोर्ट का दबाव

केंद्र की ओर से जवाब देते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘दिल्ली को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिया गया, पर इसे मेंटेन करने की क्षमता उनके पास नहीं है। एक और निर्माता ऑक्सीजन देना चाहता है लेकिन दिल्ली के पास क्षमता नहीं है इसे बढ़ाना होगा।’ कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की क्षमता कम है ऐसा केंद्र को नहीं कहना चाहिए क्योंकि यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए मदद की जानी चाहिए। यदि कुछ नहीं किया तो मौत का आंकड़ा बढ़ जाएगा। सॉलिसीटर जनरल ने कहा, ‘ दिल्ली को सप्लाई बढ़ाने के लिए कहीं और कमी करनी पड़ेगी। दिल्ली में कोविड से हो रही हर मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं।’ सॉलिसीटर जनरल ने कहा, ‘दिल्ली को ऑक्सीजन सप्लाई पर कोर्ट के आदेश को लेकर मैंने केंद्र से निर्देश लिया। आपने जो कहा है, उसका पालन किया जाएगा। SC ने केंद्र के इस रवैये की सराहना की।’ बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों के पास खाली टैंकर हैं उनसे लेने पर की बात कही थी।

दिल्ली सरकार से कोर्ट, संकट की घड़ी में राजनीतिक कलह नहीं चाहते
इसके अलावा न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील राहुल मेहरा से कहा कि हम चाहते हैं कि आप सर्वोच्च अथॉरिटी को संदेश दें कि इस मानवीय संकट में केंद्र सरकार के साथ सहयोग की भावना होनी चाहिए। वहीं न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ से दिल्ली सरकार से कहा कि हम संकट के समय राजनीतिक कलह नहीं चाहते हैं। राजनीति, चुनाव के समय होती है। सहयोग की भावना होनी चाहिए। जीवन बचाना प्राथमिकता है।

वैक्सीन की कीमत में अंतर क्यों, SC का सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऑक्सीजन सप्लाई के आवंटन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के पक्ष की हम समीक्षा करेंगे। ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर ऐसी व्यवस्था बने कि लोगों को पता चल सके कि ऑक्सीजन की सप्लाई कितनी की गई और कौन से अस्पताल में यह कितना है।’ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को लेकर सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि वैक्सीन की कीमत में अंतर क्यों रखा गया और निरक्षर लोग जो कोविन ऐप इस्तेमाल नहीं कर सकते, वे वैक्सीनेशन के लिए कैसे पंजीकरण करवा सकते हैं?’वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि केंद्र सरकार 100 फीसदी टीकों की खरीद क्यों नहीं करती। इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के मॉडल पर राज्यों को वितरित क्यों करती ताकि वैक्सीन की दामों में अंतर न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरकार यह देश के नागरिकों के लिए है।

वैक्सीनेशन के वितरण पर हो केंद्र का नियंत्रण

कोर्ट ने कहा, ‘सरकार राष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान पर विचार करे। सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन की सुविधा दी जाए। यह वैक्सीन निर्माता कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता कि वह किस राज्य को कितनी वैक्सीन उपलब्ध करवाए। यह केंद्र के नियंत्रण में होना चाहिए।’ कोर्ट ने कहा वैक्सीन विकसित करने में सरकार का भी पैसा लगा है। इसलिए, यह सार्वजनिक संसाधन है। साथ ही सवाल किया, ‘केंद्र सरकार 100 फीसद वैक्सीन क्यों नहीं खरीद रही। एक हिस्सा खरीद कर बाकी बेचने के लिए वैक्सीन निर्माता कंपनियों को क्यों स्वतंत्र कर दिया गया है?’

इसके अलवा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारे सामने कुछ ऐसी भी याचिकाएं दायर की गई हैं, जो गंभीर रूप से स्थानीय मुद्दो को उठाती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मुद्दों को उच्च न्यायालय में उठाया जाना चाहिए। वही पीठ ने सवाल किया कि अनपढ़ या जिनके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, वे कैसे वैक्सीन लगवाएंगे।

कुंभ व चुनावी रैलियों के मुद्दे पर एमिकस क्यूरी

सुनवाई के दौरान पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि कोरोना के बावजूद कुंभ जैसे धार्मिक आयोजन और राजनीतिक रैलियां होती रहीं। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की ड्यूटी में लगे लोग बीमार पड़ गए। इस पर कुछ किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इन सभी पहलुओं को एमिकस क्यूरी देखेंगे।

Related posts

BJP को बड़ा झटका, डिप्‍टी CM केशव प्रसाद मौर्य सिराथू से चुनाव हारे

MP SIDHI NEWS TEAM

बढ़ते मामले ने बढ़ाई चिंता, पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा, इन चीजों पर रहेगी प्रतिबंध

MP SIDHI NEWS TEAM

रालोद ने सभी फ्रंटल संगठनों को किया भंग, 21 मार्च को होगी समीक्षा

MP SIDHI NEWS TEAM

Leave a Comment

MP Sidhi News

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
error: Content is protected !!