हटा के बहुचर्चित कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश पुलिस को फटकार लगाई। इस दौरान दमोह SP और मध्यप्रदेश DGP के हलफनामा को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। वहीं कोर्ट ने कहां- गोविंद सिंह को सशस्त्र सुरक्षा (गन मैन) क्यों दी गई थी। सूचना के अनुसार सोमेश चौरसिया ने उच्चतम न्यायालय में पथरिया विधायक के पति गोविंद सिंह की जमानत रद्द करने के लिए याचिका लगाई थी इसमें 12 मार्च को सुनवाई हुई थी। DGP व दमोह SP को उच्चतम न्यायालय ने शपथपत्र दाखिल करने को कहा था। इसी मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई में DGP व SP ने कोर्ट में शपथपत्र दायर किया, जिसे उच्चतम न्यायालय द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा आदेश का पालन नहीं करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि 31 जुलाई 2020 को राज्य सरकार द्वारा अपराधी गोविंद सिंह को जो सशस्त्र सुरक्षा प्रदान की थी। उसके बारे में शपथ पत्र दाखिल करें कि उसको सुरक्षा क्यों दी गई थी। वहीं अब तक क्यों वापस नहीं ली गई। सोमेश चौरसिया के वकील वरूण ठाकुर ने न्यायालय में कहा कि मप्र में कानून का राज नहीं बचा है। DGP व SP अपराधी को गिरफ्तार करने में असमर्थ है। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सभी बिन्दुओं पर DGP व SP को शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। प्रकरण की अगली सुनवाई 5 अप्रैल को नियत की गई है।

आरोपी को आश्रय देने को लेकर 13 पर केस दर्ज-
हटा के बहुचर्चित कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में फरार बसपा विधायक के पति गोविंद सिंह को पकडने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है। 12 दिनों तक प्रदेश समेत सीमावर्ती राज्यों के जिलों की खाक छानी। लेकिन आरोपी को गिरफ्तार करने में पुलिस नाकाम रही है। यहां बता दें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 17 पुलिस टीमों के साथ अन्य पुलिस स्टाफ लगा हुआ था। कई स्थानों पर दबिश दी लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी। इधर, बसपा विधायक रामबाई ने भी फरार पति गोविंद सिंह से सरेंडर करने की अपील की थी। मगर अब तक आरोपी का कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।फरार आरोपी गोविंद सिंह की तलाश में पुलिस टीमें रिश्तेदार, परिचित समेत अन्य संदिग्ध
स्थानों पर दबिश देकर सचिंग कर रही है। इसी बीच पुलिस को फरार आरोपी की मदद व आश्रय देने वालों की जानकारी लगी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब तक 13 लोगों के खिलाफ पांच प्रकरण दर्ज कर चुकी हैं। वहीं अन्य लोगों की भूमिका संदिग्ध मिलने पर जांच की जा रही है।
