
सीधी. देशभक्ति जनसेवा…ये मध्यप्रदेश पुलिस का स्लोगन है, लेकिन इससे उलट सीधी कोतवाली पुलिस थाने की जो फोटो पूरे वायरल हो रही है,वो इस स्लोगन के बिल्कुल उलट है। दरअसल यहां पुलिस यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले पत्रकार को पकड़कर थाने ले आई। कपड़े उतरवाए और अर्धनग्न कर लॉकअप में बंद कर दिया। हैरानी की बात ये भी है कि थाने में जो हुआ वो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।घटना के बाद अब पूरे जिले में पुलिस प्रशासन की जमकर किरकिरी हो रही है
पूरा मामला
पूरा मामला शनिवार का है जहां स्थानीय कलाकार नीरज कुन्देर पर आरोप था कि यह सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर स्थानीय विधायक केदार शुक्ला व उनके बेटे के खिलाफ अभद्र वह आपत्तिजनक पोस्ट कर रहा था । जिसके बाद पुलिस ने स्थानीय कलाकार नीरज कुंदेर को गिरफ्तार कर थाने ले आई। जिसके बाद नीरज कुंदेर व उसके परिजन थाने पहुंचकर पुलिस प्रशासन की एक पक्षीय कार्यवाही के खिलाफ धरने पर बैठ गए और स्थानीय विधायक समेत सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान मौके पर मौजूद स्थानीय पत्रकार कनिष्क तिवारी ने इस पूरी घटना का कवरेज शुरू कर दिया यह बात थाना प्रभारी मनोज सोनी को नागवार गुजरी। उन्होंने बेरहमी के साथ ना केवल प्रदर्शनकारियों को घसीटते हुए थाने के भीतर ले गए बल्कि पत्रकार कनिष्क तिवारी को भी अपमानित किया।
घटना के संबंध में पीड़ित पत्रकार कनिष्क तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल को रंगकर्मी नीरज कुंदेर को फेक आईडी बनाकर कथित तौर पर बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे गुरुदत्त के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसे कुछ ही घंटे बाद ही जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद नीरज के परिजन व साथी रात करीब 8 बजे थाने के बाहर नारेबाजी कर रहे थे। जिसका कनिष्क तिवारी अपने कैमरामैन के साथ कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान टीआई मनोज सोनी व थाने के अन्य पुलिसकर्मी आए और प्रदर्शन कर रहे सभी लोगों के साथ मुझे व मेरे कैमरामैन को घसीटते हुए थाने के अंदर ले जाया गया। जहां टीआई मनोज सोनी ने कहा कि तुम ही नेतागिरी कर रहे हो, इसके बाद हमारे साथ मारपीट करते हुए हमारे कपड़े उतरवाए गए। कनिष्क का आरोप है कि उन्हें बदनाम करने के लिए उनकी अर्धनग्न कर तस्वीरें खीचीं गईं जिन्हें बाद में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। कनिष्क ने बताया कि कपड़े उतरवाने के बाद टीआई मनोज सोनी ने पीटने व गालियां देने के लिए उन्हें अपने केबिन में बुलाया जहां पहले से ही अमलिया थाना प्रभारी अभिषेक सिंह परिहार, टीआई शेषमणि मिश्रा और विधायक के करीबी व शराब कारोबारी अमर सिंह कल्लू बैठे हुए थे। इसी दौरान उनकी अर्धनग्न तस्वीरें खींची गईं और जिन्हें विधायक और उनके बेटे को भेजा गया। जिसके बाद बदनाम करने के लिए इन तस्वीरों को वायरल भी किया गया।
वहीं पत्रकार कनिष्क तिवारी ने एक वीडियो जारी कर लोगों से मदद की अपील करते हुए कहा कि की उन्हें पुलिस के किसी विश्वसनीय सूत्र के द्वारा बताया गया है कि पुलिस द्वारा उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा सकता है। लोग उनकी मदद करे ताकि कोई भी जब किसी मजबूर असहाय के साथ किसी भी तरह का जुल्म हो तो पत्रकार निर्भीकता से उनकी आवाज बन कर खड़े हो सकें। उन्होंने कहा कि हमारे और हमारे परिवार की सुरक्षा की जाए।
इनका क्या कहना है
वहीं इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में फेसबुक “SP SIDHI“के पेज से इस संबंध में जारी पोस्ट में लिखा गया कि थाना कोतवाली सीधी के अपराध क्र. 262/22 धारा 419,420 IPC एवं 66C, 66D IT Act में अनुराग मिश्रा नाम से फर्जी फेसबुक आई डी बनाकर माननीय विधायक सीधी एवं उनके पुत्र के उपर अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाकर लगातार पोस्ट की जा रही थी जिस पर फेसबुक से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रथम दृष्ट्या नीरज कुंदेर को अभिरक्षा में लिया जाकर क्षेत्र में लोक षांति कायम रखने हेतु प्रतिबंधात्मक धारा के तहत न्यायालय पेष किया गया था जिसके बाद कनिष्क तिवारी के अगुआई में लगभग 30-40 लोग थाने के सामने से निकलने वाली रोड़ पर बैठकर आवागमन अवरूद्ध किये थे एवं माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन श्री शिवराज सिंह चौहान जी, भारतीय जनता पार्टी एवं सीधी विधायक के खिलाफ मुर्दावाद के नारे लगा रहे थे। पुलिस द्वारा इनको बार बार समझाईस दी गई की आपका यह कृत्य कानून विरूद्ध है फिर भी न मानने पर कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने के कारण धारा 151 सी.आर.पी.सी. के तहत अभिरक्षा में लिया जाकर माननीय न्यायलय पेष किया गया था एवं सभी के विरूद्ध अपराधक्र.293/22धारा152,153,186,341,504,34 IPC कायम कर विवेचना की जा रही है, साथ में उक्त व्यक्तियों की वायरल हो रही तस्वीर के संबंध में वरिष्ठ स्तर पर जॉच चल रही है। कुछ असमाजिक तत्वो द्वारा घटना को लेकर भ्रामक, असत्य एवं तथ्यहीन जानकारी सोशल मीडिया में प्रसारित की जा रही है जिसका सीधी पुलिस खंडन करती है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
थाने के अंदर पत्रकार और अन्य लोगों के साथ हुए इस व्यवहार को लेकर अब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी नजर आ रही है। लोग इस घटना की निंदा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल जो उठाया जा रहा है वो ये है कि पुलिस को इनके साथ इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसने दिया। इतना ही नहीं कुछ लोग तो इसे खाकी की गुंडागर्दी कह रहे हैं।
