
आम हो या खास इंसान की मौत पर परिजनों को अंतिम संस्कार और क्रियाकर्म करते देखना आम बात है, लेकिन रतलाम में एक ऐसा मामला सामने आया है जो सुनने वालों को भावुक कर दे। दरअसल रतलाम में एक बंदर की मौत के बाद लोगों ने उसका अंतिम संस्कार और क्रिया कर्म कुछ इस तरह से किया कि देंखने सुनने वाले हैरान रह गए। बंदर की मौत से लोगो को इतना दुख पहुंचा कि उन्होंने उसके जाने के बाद वे सारे क्रियाकर्म किए, जो एक इंसान के जाने पर होते हैं। लगातार 12 दिन तक पूजा के बाद शनिवार को तेरहवीं का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें करीब 1 हजार लोग शामिल हुए।
घटना रतलाम के कोठड़ी गांव की है। बताया जा रहा है कि इलाके में बने हनुमान मंदिर के आस पास में एक बंदर बरसो से रह रहा था वह बंदर किसी को नुकसान नही पहुंचाता था, लोग बंदर को प्रसाद और खाना देते थे, लगातार कई बरसों से बंदर और मंदिर आने वाले बहकतों के बीच एक लगाव स हो गया था, बंदर रोज श्रद्धालुओं का इंतजार करता और उसने नजर न आने पर मंदिर आने वाले भक्तों की नजरे दर्शन के बाद बंदर को तलाशती, अचानक एक दिन बंदर बीमार पड़ गया लोग उसे लेकर जानवरों के अस्पताल भी गये लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका, जिसके बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने उसकी अंतिम क्रिया कर्म करने का फैसला लिया, लगातार 12 दिन तक गांव के ही हनुमान मंदिर के चबूतरे पर शोक बैठकें हुईं। 11वें दिन उज्जैन जाकर बंदर के दशाकर्म की क्रिया भी पूरी की गई। गांववालों ने मिलकर 13वीं पर भोज भी कराया। इस भोज में आसपास के गांव के लोग भी आए।
बताते है कि गांव के पंडित गोपाल दास ने 12 दिन तक शोक का पालन कर 11वें दिन उज्जैन जाकर बंदर के दशाकर्म की क्रिया पूरी की। शनिवार सुबह हनुमान मंदिर पर पगड़ी का दस्तूर किया गया। पूजा-अर्चना के बाद सहभोज किया गया। गांव वालों ने मिलकर चंदा एकत्रित किया और फिर उसी राशि से बंदर का क्रियाकर्म किया। जिसने भी यह सुना हैरान रह गया।
