
पंच, सरपंच, जनपद पंचायत तथा जिला पंचायत सदस्य के अभ्यर्थियों को अपने नाम-निर्देशन पत्र के साथ पंचायत को देय समस्त शोध्यों का अदेय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों की तैयारियां जोरों पर चल रही है। जिले स्तर पर वर्ष 2014 की स्थिति में मतदाताओं की प्रारंभिक सूची का प्रकाशन 30 नवंबर तक हो गया है और 3 दिसंबर के दोपहर 3 बजे तक प्रत्येक मतदान केन्द्र स्तर पर BLO द्वारा दावे आपत्ति प्राप्त किये जायेंगे और 4 दिसंबर तक इनका निराकण किया जायेगा।फिर 6 दिसंबर 2021 को फोटोयुक्त मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।।माना जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 6 दिसंबर के बाद कभी भी आचार संहिता और तारीखों का ऐलान किया जा सकता है।
दरअसल, इस बार मध्य प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव तीन चरणों में आयोजित कराए जाएंगे। सरपंच और पंचों को ऑनलाइन नामांकन नहीं बल्कि निर्वाचन कार्यालय में जाकर ही फॉर्म भरकर जमा कराने होंगे, लेकिन जिला पंचायत के लिए ऑनलाइन नामांकन किया जाएगा। वहीं जिला और जनपद में EVM से वोटिंग होगी और ग्राम स्तर पर मतपत्र के जरिए वोटिंग कराई जाएगी।इसके अलावा पंच, सरपंच, जनपद पंचायत तथा जिला पंचायत सदस्य के अभ्यर्थियों को अपने नाम-निर्देशन पत्र के साथ पंचायत को देय समस्त शोध्यों का अदेय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
नाम निर्देशन पत्र के साथ अदेय प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करने वाले नाम-निर्देशन पत्र निरस्त कर दिया जाएगा। अदेय प्रमाण पत्र, नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा के लिए निर्धारित तिथि एवं समय तक संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को प्रस्तुत किए जा सकते हैं। अदेय प्रमाण पत्र निर्वाचन घोषणा के पूर्व के वित्तीय वर्ष तक का प्रस्तुत करना होगा। अर्थात यदि माह दिसंबर 2014 में निर्वाचन की घोषणा होती है तो 31 मार्च 2014 की स्थिति में अदेय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।निर्धारित प्रारूप में अदेय प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत के लिए सचिव द्वारा, जनपद पंचायत के लिए CEO जनपद पंचायत द्वारा और जिला पंचायत के लिए CEO जिला पंचायत द्वारा जारी किया जाएगा।अभ्यर्थी द्वारा जिस पंचायत के लिए नाम-निर्देशन पत्र भरा जा रहा है, उस पंचायत का अदेय प्रमाण पत्र, नाम-निर्देशन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन ने प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पत्र लिख कहा है कि वर्षों से पदस्थ ग्राम पंचायतों के अधिकारी और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन के लिए ग्राम पंचायत के सचिव को भी स्थानांतरण की परिधि में लाया जाए।इसके तहत ऐसे ग्राम पंचायत सचिव जो 4 साल में एक ही ग्राम पंचायत में 3 वर्ष से अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें किसी अन्य ग्राम पंचायत में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।इन निर्देशों के बाद करीब 14 हजार पंचायत सचिवों के तबादले होंगे।इससे पहले आयोग तीन साल से एक ही स्थान पर पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक, नगर निरीक्षण और उप नगर निरीक्षकों को हटाने के निर्देश गृह विभाग और डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को हटाने के निर्देश राजस्व विभाग दिए जा चुके है।
आयोग के निर्देशानुसार-
- 5 दिसंबर तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निराकृत दावा आपत्ति आवेदन पत्रों की ERMS, में प्रविष्टि, दावे आपत्ति की चैकलिस्ट तैयार करना और चैकलिस्ट की जांच कर त्रुटि सुधार उपरांत वेण्डर को वापस करने की कार्यवाही की जायेगी।
- 5 दिसंबर को ही रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं वेण्डर द्वारा फोटोयुक्त और फोटोरहित अंतिम मतदाता सूची जनरेट कर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा फोटोरहित अंतिम मतदाता सूची को वेबसाईट पर अपलोड करने की कार्यवाही की जायेगी तथा वेण्डर फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची को मुद्रित कर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध करायेगा।
- रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा 6 दिसंबर 2021 को फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची का ग्राम पंचायत तथा अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन किया जायेगा, अंतिम मतदाता सूची की फोटोरहित CD विक्रय के लिए उपलब्ध कराई जायेगी और फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची के सार्वजनिक प्रकाशन का प्रमाणपत्र स्कैन कर अपलोड करने की कार्यवाही की जायेगी।
बता दे कि मध्यप्रदेश में 23,835 ग्राम पंचायतें हैं। 904 जिला पंचायत सदस्य और 6035 जनपद सदस्य त्रि-स्तरीय पंचायत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष- 52, जिला पंचायत उपाध्यक्ष- 52, जनपद पंचायत अध्यक्ष- 313, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष- 313, जिला पंचायत के सदस्य- 904, जनपद पंचायत के सदस्य- 6833, सरपंच- 23912, पंच- 3,77,551 शामिल है। इससे पहले 2014-15 में पंचायत चुनाव हुए थे। इससे 2020 तक उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। बता दें कि परिसीमन से पहले प्रदेश में प्रदेश में 22 हजार 812 पंचायतें थीं।
