
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर शुरू से ही गहमागहमी का दौर बना हुआ है। निश्चित समय सीमा 5 वर्ष से तकरीबन 20 माह गुजरने के जब पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हुई, तभी से पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि सरकार ने पहले अध्यादेश लाकर परिसीमन निरस्त किया। उसके पश्चात निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। वहीं दूसरी ओर संविधान के प्रावधानों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिकाएं लगी। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया का पालन करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को देते हुए निर्देश दिए कि संविधान की प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही निर्वाचन करवाए जाए, अन्यथा निर्वाचन निरस्त भी किए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अध्यादेश लाकर कमलनाथ सरकार के दौरान हुए पंचायत चुनाव के लिए ग्राम पंचायतों के परिसीमन को समाप्त किया था। उसके बाद मामला हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में जिस प्रकार से गया उसको लेकर आम जनमानस में यह जिज्ञासा होने लगी कि आखिरकार पंचायत चुनाव को लेकर आगे क्या होगा? फिलहाल तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पश्चात राज्य निर्वाचन आयोग ने त्वरित कदम उठाते हुए OBC आरक्षित सीटों पर होने वाले चुनाव को स्थगित कर दिया है, वहीं अन्य सीटों पर चुनाव की वही प्रक्रिया चल रही है।
रोटेशन का मामला पूरी तरह गड़बड़ाया
भले ही हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण का मामला छाया रहा। किंतु इसी के साथ देखा जाए तो परिसीमन समाप्त होने के पश्चात 2014 के अनुसार पंचायत निर्वाचन की घोषणा होते ही रोटेशन का मामला पूरी तरह गड़बड़ा गया। इस मामले को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होना है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। ऐसे में यदि रोटेशन की प्रक्रिया का पालन राज्य सरकार एवं निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं किया जाता है तो चुनाव निरस्त हो सकते हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह बात कह चुका है कि संविधान की सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
OBC आरक्षित सीटों के लिए क्या प्रक्रिया होगी
सभी के मन में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि ओबीसी आरक्षित सीटों पर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पश्चात चुनाव प्रक्रिया निरस्त हुई है अब आगे इस पर क्या होगा? कानूनी विशेषज्ञ की माने तो यहां भी राज्य सरकार एवं निर्वाचन आयोग की स्थिति खराब है। क्योंकि भले ही ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य सीटों में परिवर्तित कर दिया जाए किंतु इससे भी रोटेशन पूरी तरह से प्रभावित होगी।
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव; नवीन सिरे से आरक्षण तय हो तभी बात बने
जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का जिस प्रकार से निर्देश आया है उसको देखते हुए तो यही कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव में पंच, सरपंच, जनपद प्रतिनिधि, जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत प्रतिनिधि, जिला अध्यक्ष पंचायत अध्यक्ष की तमाम सीटों पर नवीन सिरे से आरक्षण हो तभी सभी प्रकार की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन संभव हो सकता है।
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव; रोटेशन की प्रक्रिया संवैधानिक है
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि OBC आरक्षण मामले में जो महाराष्ट्र केस में फैसला दिया है, उसका पालन मध्यप्रदेश में भी होना चाहिए। महाराष्ट्र केस में सुप्रीम कोर्ट ने OBC सीटों को सामान्य सीटों में तब्दील कर चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह नजीर देते हुए MP में इसे लागू कराने के लिए SG (तुषार मेहता) को आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर्फ पंचायत चुनाव ही नहीं, निकाय चुनाव पर भी लागू होगा। रोटेशन की प्रक्रिया भी संवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख जनवरी में तय की है। तब विस्तार से बहस होगी। सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि प्रदेश सरकार का अध्यादेश संवैधानिक नहीं है, तो पंचायत चुनाव निरस्त भी कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और निर्वाचन आयोग संवैधानिक तरीके से इलेक्शन कराएंगे। यदि असंवैधानिक तरीका अपनाएंगे, तो इलेक्शन ही रद्द हो जाएगा। इस दौरान कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। बहरहाल राज्य निर्वाचन आयोग एवं राज्य सरकार कुछ ना कुछ राजस्थान की पुरजोर कोशिश में लगी हुई है।
