
रीवा जिले के मऊगंज थाना अंतर्गत महिला की हत्या पर गलत विवेचना करने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक हरीश दुबे और सहायक उपनिरीक्षक दान सिंह परस्ते को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।सहायक उपनिरीक्षक प्रमोद पाण्डेय को दोष मुक्त कर दिया है।
बता दें कि संगीता कोल की चार वर्ष पहले गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। लेकिन परिजनों ने साक्ष्य छुपाने के लिए मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था। जबकि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने ‘केस ऑफ डेथ ड्यू टू स्ट्रगुलेशन’ लिखा था। मतलब स्पष्ट था कि मृतका की हत्या गला दबाने से हुई है। फिर भी तत्कालीन मऊगंज थाना प्रभारी निरीक्षक हरीश दुबे ने गलत विवेचना की।
मऊगंज थाना के मर्ग क्रमांक 31/17 धारा 174 जौ.फौ. में 3 वर्ष विलंब से अपराध कामय किया था। देर से मुकदमा दर्ज होने पर तत्कालीन रीवा एसपी ने एएसपी मऊगंज से जांच कराई तो तत्कालीन मऊगंज थाना प्रभारी निरीक्षक हरीश दुबे, ASI दान सिंह परस्ते और ASI प्रमोद पाण्डेय को दोषी पाया गया।
तत्कालीन आईजी चंचल शेखर ने 22 जुलाई 2020 को एएसपी मऊगंज 02/2020 का अवलोकन किया था। तब तीनों दोषी पाए गए थे। ऐस में 27 जुलाई 2020 को तत्कालीन सतना जिले के जैतवारा थाना प्रभारी निरीक्षक हरीश दुबे को निलंबित कर दिया था। वर्तमान समय में हरीश दुबे सतना जिले के अमदरा थाना प्रभारी थे।
सिंगरौली एसपी ने पूरी की जांच
महिला की हत्या पर गलत विवेचना करने के बाद पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा मामले की जांच सिंगरौली एसपी वीरेंद्र सिंह को सौंपी गई थी। उन्होंने हर पहलुओं की बारीकी से जांच करने के बाद बीते दिन अपनी रिपोर्ट रीवा जोन के आईजी एवं एडीजीपी केपी वेंकटेश्वर राव को सौंपी थी। तब आईजी ने जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद निरीक्षक हरीश दुबे और ASI दान सिंह परस्ते को पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। जबकि ASI प्रमोद पाण्डेय को दोष मुक्त पाया है।
उक्त कार्रवाई सिंगरौली एसपी वीरेंद्र सिंह की जांच रिपोर्ट पर आईजी रीवा जोन केपी वेंकटेश्वर राव ने की है।
