
शाजापुर। किसानों के नाम पर किस प्रकार फर्जीवाड़ा किया जाता है, इसकी बानगी शाजापुर जिले में देखने को मिल रही है। यहां पर वन विभाग ने तीन साल तक किसानों के फर्जी नाम लिखकर कागज पर ही पौधारोपण करवा दिया। जिम्मेदारों द्वारा किया घोटाला तब खुला जब गुरुवार को जबलपुर के वैज्ञानिकों की टीम वरिष्ठ वैज्ञानिक गंगाचरण मिश्रा के नेतृत्व में शाजापुर के पनवाड़ी सहित अन्य गांवों में कृषक समृद्धि योजना की मॉनिटरिंग एवं भौतिक सत्यापन के लिए पहुंची। वन विभाग ने टीम को पनवाड़ी, अभयपुर और सुनेरा गांव में पौधारोपण करने वाले किसानों की सूची सौंपी।
जांचकर्ता जब सूची लेकर गांवों में मॉनिटरिंग करने पहुंचे तो यहां पता चला कि सूची में लिखे नाम के कई व्यक्ति गांव में रहते ही नहीं है। सूची में अंकित एक भी किसान पनवाड़ी में नहीं रहता है। इसके बाद टीम ने खेतों में मॉनिटरिंग की ताे यहां पौधारोपण भी नहीं हुआ। गुरुवार देर शाम को वैज्ञानिक मिश्रा ने कहा जिन किसानों ने पौधारोपण नहीं किया। वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी सूची दे दी थी। अब वे दोबारा जांच के लिए आएंगे।
योजना में प्रति पौधा 10 रुपए देने का प्रावधान
मप्र शासन की कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत वन विभाग ने किसानों को तीन साल तक लगातार पौधों का वितरण किया। योजना का उद्देश्य था कि वृहद स्तर पर पाैधारोपण हो और फलदार पौधों के माध्यम से किसानों को भी लाभ मिले। तीन साल तक वन विभाग ने किसानों को पौधे दिए जाने का उल्लेख किया है। इन पौधों के विकास के सरकार ने किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रति पौधा पहले साल 25 रुपए, अगले साल पौधों के जीवित रहने पर प्रति पौधा 15 रुपए और तीसरे साल तक पौधे के विकसित होने पर प्रति पौधा 10 रुपए देने का प्रावधान है।
इस तरह एक किसान को तीन साल में प्रति पौधा 50 रुपए दिए गए। जबलपुर के वैज्ञानिक मिश्रा की जांच में जमीनी स्तर पर पौधारोपण नहीं होने की बात सामने आई है। इससे प्रतीत हो रहा है कि शाजापुर में कृषक समृद्धि योजना के तहत पौधाराेपण में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है।
अभयपुर में मुस्लिम नहीं लेकिन सूची में नाम दिया है। अभयपुर के ग्रामीणों के अनुसार गांव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। इसके बावजूद अभयपुर में पौधारोपण करने वाले किसानों की सूची में शेख वकील नामक किसान का नाम है। पनवाड़ी के ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पनवाड़ी के जो नाम पौधारोपण करने वाले किसानों के अंकित हैं, उस नाम का एक भी किसान गांव में नहीं रहता है।
जांचकर्ताओं के बोल बदले
योजना की मॉनिटरिंग के लिए आए वैज्ञानिक जांचकर्ता मिश्रा ने मॉनिटरिंग के बाद गुरुवार दोपहर कहा कि किसानों के खेतों में पौधारोपण नहीं हुआ है वही शाम होते-होते इनके बोल बदल गए उन्होंने बताया कि जो सूची वन विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई गई थी वह सूची किसानों द्वारा पौधे मांगे जाने वाली सूची थी पौधारोपण किए जाने की सूची अलग है। एक ही दिन में घटे इस वाकये से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गड़बड़झाला किस प्रकार हुआ होगा।
