
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बक्सवाहा के जंगल में हीरे निकालने के लिए होने वाली पेड़ों की कटाई के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बक्सवाहा जंगल की कटाई होने वाली है। इस निर्णय के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन वसुंधरा एनवायरनमेंट एंड कल्चरल सोसाइटी ने प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल से हस्तक्षेप की मांग की है। सोसाइटी ने बक्सवाहा के जंगलों को बचाने के लिए शुक्रवार (23 जुलाई) को अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। आपको बता दें कि बक्सवाहा जंगल में हीरा खनन परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है।
राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग
सोसाइटी की अध्यक्ष पूर्णिमा वर्मा ने कहा कि उन्होंने बक्सवाहा के जंगलों को बचाने के लिए राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग की है। राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि वनों को नष्ट करने के प्रयास योजनाबद्ध तरीके से शुरू हो गए हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासियों और जीवों का जीवन बर्बाद हो जाएगा। राज्यपाल को लिखे ज्ञापन में सोसाइटी ने कहा है कि बकस्वाहा जंगल की इस जमीन के भीतर से हीरे निकालने के लिए तकरीबन 382.121 हेक्टेयर जमीन की खुदाई करनी होगी, जिसमें 46 किस्म के दो लाख पंद्रह हजार से अधिक पेड़ काटे जाएंगे। साथ ही कई किस्म की झाड़ियां व छोटे पेड़ भी नष्ट कर दिए जाएंगे। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचेगा।
पर्यावरण संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार ने छतरपुर जिले में स्थित बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन के लिए बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज को 50 साल के पट्टे पर दे दिया है। इसका क्षेत्रफल करीब 382.13 हेक्टेयर है। इतने बड़े स्तर पर जंगल की कटाई होने से पर्यावरण संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
बताते चलें कि इस जगल में सागौन, बबूल, केम, पीपल, तेंदू, जामुन, बहेड़ा और अर्जुन समेत कई दुर्लभ प्रजाति के पेड़ मौजूद हैं। ये पेड़ और इनसे मिलने वाली लकड़ियां यहां के लोगों की आजीविका हैं। इसलिए भी इस प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है। बताया जाता है कि बकस्वाहा के जंगल में 3 करोड़ 42 लाख कैरेट हीरे होने का अनुमान है जबकि राज्य के पन्ना में करीब 22 लाख कैरेट हीरे हैं।
