
जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए वह चौंकाने वाले । बिजली विभाग के 80 से अधिक अधिकारी कर्मचारियों द्वारा मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण के सिंगरौली, सीधी, डिंडोरी, मंडला, सागर और सतना व अन्य जिलों में में यह जांच किए गए । सौभाग्य योजना के तहत पूर्व क्षेत्र में करीबन 7 लाख 26000 घरों को रोशन बताया गया था। जबकि हकीकत में महज 40 फीसद घर ही बिजली चमक रहे । जबकि 60 फीसद आज भी बिजली के इंतजार में।
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सौभाग्य योजना में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है। यह घोटाला कब से हो रहा था इसका नही पता चला है। लेकिन इस महाघोटाले ने उप चुनावों को देखते हुए सत्ता और विपक्ष दोनों को भरपूर मौका दे दिया है। कमलनाथ सरकार के दौरान इस मामले की जांच बैठाई गई थी। 6 जिलों की जांच लंबे पूरी हो गई है। दोषी पाए गए 80 अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट लगभग तैयार है। इन अधिकारी कर्मचारियों से अब पैसा रिकवर किया जाएगा। साथ बिजली महकमा इन पर FIR दर्ज कराने की कवायद में भी जुटा है।
बता दें कि सौभाग्य योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला सामने आया है। इतने बड़े घोटाले के उपचुनाव के समय सामने आने के बाद से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।मध्य प्रदेश के सरकारी अफसरों और बाबुओं ने प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को भी पलीता लगा दिया। सौभाग्य योजना को भी उन्होंने लूट का जरिया बना लिया और कागजों पर बिजली के खंभे खड़े करके गांवों को रौशन बता दिया।अब दो साल बाद जांच पूरी हुई और ऊपर से लेकर नीचे तक के कुल 80 बिजली अधिकारी जांच के घेरे में आ गए।प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानि सौभाग्य योजना बिजली महकमे के अधिकारी कर्मचारियों के लिए लूट का एक बड़ा जरिया बन गई। लगभग 2 साल से जारी इस योजना के घोटाले की जांच पूरी हो चुकी है और जो तथ्य सामने आए हैं वह हैरान करने वाले हैं।लाखों घरों को कागजों में रौशन कर दिया गया जबकि हकीकत में आज भी सैकड़ों गरीब गांव में रोशनी के इंतजार में हैं।
पूर्व जनसंपर्क मंत्री के आरोप
कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा ने कहा 2 लाख तक की योग्यता वाले ठेकेदारों को सौभाग्य योजना में करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सौभाग्य योजना के जरिये बीजेपी समर्थित लोगों की जेब भरी गयी थी। घोटाले से हासिल करोड़ों की राशि का 2018 विस चुनाव में इस्तेमाल हुआ था।मोदी की सौभाग्य योजना एमपी के लिए दुर्भाग्य बनी।
80 अधिकारी कर्मचारियों ने की गड़बड़ी
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई सौभाग्य योजना के तहत देशभर में चार करोड़ घरों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर रौशन करने का लक्ष्य था। लेकिन मध्यप्रदेश में जो हुआ वह किसी काली करतूत से कम नहीं कहा जा सकता। योजना की शुरुआत के साथ ही इसमें घोटाले की खबरों के बीच बैठी जांच ने कई अहम खुलासे कर दिए हैं। लगभग डेढ़ साल से चल रही जांच पूरी हो गई है और बिजली महकमे के 80 अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट लगभग तैयार है। आंकड़ों के तहत करीब 42 करोड़ की आर्थिक अनियमितता बिजली महकमे के अधिकारी कर्मचारियों ने मिलकर की और इस योजना में जमकर पलीता लगाया।
चार जिलों में हुए घोटाले
मंडला, डिंडौरी, सीधी, सिंगरौली में सौभाग्य योजना की जांच हुई है। घोटाले में मोदी की सौभाग्य योजना पर एमपी के अफसरों ने लगाया पलीता। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना’ के तहत हर घर को रोशन करने की योजना में प्रदेश के चार जिलों में बडे़ पैमाने पर भ्रष्टाचार पकड़ में आया है। शिकायत के बाद बिजली कंपनी ने चार जिलों की जांच कराई थी।जहां 29 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाला का पर्दाफाश हुआ है। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार मंडला, डिंडौरी जिले में हुआ है। मंडला में जहां 9 करोड़ 53 लाख का चूना लगाया तो डिंडौरी जिले में 8.48 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान का भ्रष्टाचार मिला है।इसके अलावा सीधी और सिंगरौली में इस योजना पर करोड़ों रुपये का खेल हुआ है। कंपनी ने फिलहाल अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है।
