
गुरुवार की रात्रि शासकीय निवास पर दिए गए भोज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रियों को विभागीय तबादले सोच समझकर करने की हिदायत दी। उन्होंने तबादलों को लेकर छवि खराब करने वाले लोगों से दूर रहने की बात भी मंत्रियो से कही।कैबिनेट मीटिंग के बाद ऊर्जा विभाग के प्रेजेंटेशन के दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और यशोधरा राजे सिंधिया के बीच हुई बहस के लीक हो जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल सभी मंत्रियों को डिनर के बहाने अपने घर बुलाया। सूत्रों का कहना है कि डिनर की टेबल पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रियों को स्पष्ट रूप से समझाया कि ट्रांसफर के दौरान किसी भी प्रकार की टंटे मत करना।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि अधिकारी, कर्मचारियों के ट्रांसफर में पारदर्शिता बरतें और इसकी प्रक्रिया गाइडलाइन के मुताबिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा- तबादलों में गड़बड़ी करने वालों पर भी पैनी नजर बनाए रखें। मुख्यमंत्री का इशारा मंत्रियों के स्टाफ की तरफ था। सीएम इससे पहले भी कह चुके हैं कि मंत्रियों को अपने स्टाफ से सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सभी मंत्री महीने में कम से कम दो बार अपने क्षेत्र का दौरा करें।
जिलों का प्रभार देने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने साथी मंत्रियों को रात्रि भोज दिया। इस रात्रिभोज में सरकार के अधिकांश मंत्री शामिल थे। लेकिन बृजेंद्र प्रताप सिंह, मीना सिंह, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओमप्रकाश सकलेचा, प्रेम सिंह पटेल, रामखेलावन पटेल, रामकिशोर कावरे और ओ पी एस भदौरिया अपने अपने क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों के चलते इन बैठकों में शामिल नहीं हो पाए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने साथी मंत्रियों को तबादलों को लेकर समझाइश दी कि वे बेहद सोच समझकर तबादले करें और ऐसे व्यक्तियों से सतर्क रहें जो तबादलों के नाम पर लेनदेन का काम करते हैं। उन्होंने सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर बैठक कर समन्वय बनाने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने अपने सभी साथियों से कहा कि वे जिलों में जाकर विकास कार्यों की समीक्षा करें और साथ ही साथ लोक कल्याणकारी योजनाओं को भी किस तरह से लागू किया जा रहा है इसकी व्यापक समीक्षा करें। साथ ही साथ विभिन्न विकास कार्यक्रमों का शिलान्यास भी मंत्रियों को करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। मंत्रियों से यह भी कहा कि प्रभार के जिलों के दौरे पर जाएं तो कम से कम दो दिन और एक रात्रि उस जिले में बिताये। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि विधायक, सांसद और प्रबंध समिति के सदस्यों के परामर्श के बाद ही मंत्री तबादले करें।
कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने तबादला उद्योग के आरोप लगाए थे। यदि कोई चूक हो गई तो यही आरोप शिवराज सिंह सरकार पर भी लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी समझाया कि ट्रांसफर के मामले में अपने दायरे के बाहर ना निकले। किसी भी ऐसी नोटशीट पर सिग्नेचर ना करें जो विवादित हो सकती है।
