
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सीधी की ब्रांच गांधीग्राम द्वारा ट्रैक्टर वितरण के नाम पर आदिवासी किसानों के साथ करीब दो करोड़ की जालसाजी की गई है वर्ष 2011-12 व 13 में 143 ऐसे किसान हैं जिनके नाम पर गांधीग्राम ब्रांच की चार सेवा सहकारी समितियों द्वारा फर्जी ट्रैक्टर ऋण तैयार कर भोलेभाले गरीबों के नाम पर करीब दो करोड़ का चूना लगाया गया है। गांधीग्राम ब्रांच द्वारा चार सेवा सहकारी समितियों माटा और चौफाल सहित दो अन्य समितियों के समितिसेवकों एवं 2 तथाकथित ब्रांच मैनेजरों एवं आधा दर्जन सप्लायरों द्वारा एक करोड़ 97 लाख 20000 रुपए का पलीता लगाया गया था।इस पूरे घटनाक्रम में कलेक्टर सीधी ने पिछले दिनों ADM सीधी हर्षल पंचोली की अध्यक्षता में जांच हेतु 4 सदस्यी टीम का गठन किया है। जांच समिति के सदस्य नायब तहसीलदार दीपेंद्र सिंह तिवारी के साथ आज सहकारिता टीम सहकारी समिति चौफाल पहुच कर फर्जीवाड़े के दस्तावेज खंगालने में लगी हुई है।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
किसानों को कृषि उपकरण ट्रैक्टर लेने की जानकारी तब हुई जब बैंक वसूली की टीम उनके घर पहुंचकर नोटिस थमा दिया। नोटिस देखकर किसानों के होश उड़ गए किसान बैंक और प्रशासन के उत्पीड़न से बचने के लिए विधायक केदारनाथ शुक्ल से गुहार लगाई तब उन्होंने अपने स्तर से असलियत का परीक्षण कराया तो ऐसे लोगों के नाम पर ट्रैक्टर निकलने का खेल खेला गया है जिनके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है किसानों के साथ हुए धोखे की जानकारी कलेक्टर को देने के साथ-साथ सहकारी बैंक के अधिकारियों को दी लेकिन वह कार्यवाही करने से आनाकानी करने लगे तब जाकर विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर असलियत से अवगत करा कर कार्यवाही की अपेक्षा की है मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सहकारिता के प्रमुख सचिव को निर्देशित कर जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने का निर्देश जारी किया है। प्रमुख सचिव ने कलेक्टर को जांच कराने हेतु निर्देशित किया तो कलेक्टर ने अपर कलेक्टर हर्षल पंचोली के नेतृत्व में 4 सदस्य टीम गठित किया है जांच टीम घोटालेबाज गांधीग्राम की सहकारी समितियों के दस्तावेजों का परीक्षण करना शुरू कर दिया है सूत्रों की मानें तो वर्ष 2011 से 2013 के बीच 133 किसानों को ट्रैक्टर बेचने का दस्तावेज विधायक ने सौंपा था किंतु जांच में 146 ट्रैक्टर बेचने का उल्लेख मिला है जिसका परीक्षण किया जा रहा है जल्द ही घोटालेबाज बैंकों के अधिकारियों के चेहरे में पड़े इमानदारी का नकाब हटेगा।
ट्रैक्टर एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध
किसानों को कृषि उपकरण सहित ट्रैक्टर बिक्री करने के घोटाले में सहकारी बैंक की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही संदिग्ध भूमिका किसानों के नाम पर ट्रैक्टर देने वाली एजेंसी भी सामने आ रही हैं जिन किसानों के पास 20 डिसमिल जमीन नहीं है उनको बैंक में लोन पास किया है और ट्रैक्टर एजेंसीयों ने ट्रैक्टर का फोटो खिंचा कर मुहैया कराया है ऐसे में यह लगता है कि जिले में संचालित विभिन्न कंपनियों एजेंसी संचालकों ने ट्रैक्टर घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
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जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के गांधीग्राम शाखा की समितियों ने ऐसे किसानों के नाम पर ट्रैक्टर ऋण दिया है जिनके पास सिर छुपाने के अलावा जमीन नहीं है उन्हें जानकारी दिए बगैर ऋण निकाला गया है उनके पास अब नोटिस गई तो जानकारी हुई जिसकी शिकायत मुझसे की गई तो मैंने जांच और कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था जांच शुरू हो गई है शीघ्र ही कार्यवाही होगी।
केदारनाथ शुक्ल सीधी विधायक
