
संकट के समय अस्पताल,स्वास्थ्य केंद्रों में विद्युत कटौती से हाल-बेहाल।
कोविड संक्रमण से उपजे संकट के समय में अघोषित विद्युत कटौती न सिर्फ अमानवीय है बल्कि इससे भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अस्पतालों और आम घरों में बिजली की सख्त जरूरत है। शासन-प्रशासन एवं विद्युत मंडल के उच्च अधिकारियों द्वारा कोविड महामारी के दौर बिजली काटना भयानक त्रासदी बन सकता है।
विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि सरकार से आग्रह किया कि संकट के समय बिजली कटौती को तत्काल रोके। श्री पटेल ने सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया कि बिजली कटौती को बंद नहीं किया तो जनता की ओर से अनिश्चितकालीन धरना दिया जायेगा।
श्री पटेल ने बताया कि कोरोना महामारी के दौर में एक और अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों,कोविड केंद्रों व होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के प्राण जीवन रक्षक दवाइयों, वेंटिलेटर व ऑक्सीजन के अभाव में परेशानी हो रही है। वंही दूसरी और विद्युत की कटौती से भयावह त्रासदी उत्पन्न हो सकती है। मरीजों की जान से खिलवाड ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश में 24 घंटे घरेलू बिजली एवं 10 घंटे कृषि कार्य के लिए बिजली देने की घोषणा की है। सरकार जो कहती वह करती नहीं। सरे आम झूठ बोलना आदत बन चुकी है। कभी मेंटेनेंस के नाम पर कभी किसी और कारणों से महीनों से 24 घंटे में से मात्र 5 या 6 घंटे ही घरेलू बिजली दी जा रही है वहीं कृषि कार्यों के लिए भी बिजली की आपूर्ति न्यूनतम होने से कोरोना रोगी, किसान एवं जन सामान्य परेशान और बेहाल है।पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि जले हुए विद्युत ट्रांसफार्मर को समय सीमा में नहीं बदला जा रहा है।आंधी तूफान से क्षतिग्रस्त विद्युत पोल, केबल तथा नल-जल योजना भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने ने कहा कि यह हाल सीधी, सिंगरौली,रीवा सहित पूरे प्रदेश का है। यदि शीघ्र व्यवस्था में सुधार कर विद्युत कटौती बंद नहीं की तो कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए धरना दिया जाएगा । शासन-प्रशासन अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशलील बने।


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