
शहर का भदभदा विश्राम घाट की यह तस्वीर गुरुवार शाम 7 बजकर 10 मिनट की है, जहां एक साथ 40 से ज्यादा चिताएं जलती नजर आई,सब की सब कोरोना संक्रमितों की…I इस समय श्मशानों में हालात ऐसे कि अब जगह कम पड़ गई है,लकडिय़ां खत्म होने को हैं, लकडिय़ां जमाते दाह संस्कार करने वालों के हाथों में छाले पड़ चुके हैं और शवों के अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।आज न अस्पतालों में जगह है, न ही श्मशानों में। वहीं मरीजों को लेकर परिजन दर-दर भटक रहे हैं शायद यही वजह है कि श्मशान आज सुलगकर अपना सच खुद चींख-चींख कर बयां कर रहा है।
पांच दिन में 356 संक्रमितों का अंतिम संस्कार-
गुरुवार को भोपाल में 112 कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार हुआ। भदभदा में 72, सुभाष नगर में 30 दाह संस्कार हुए और झदा कब्रिस्तान में 10 शवों को दफन किया गया लेकिन सरकारी आंकड़ों में भोपाल में आज भी सिर्फ 4 मौतें दर्ज की गईं। पिछले पांच दिनों में 356 संक्रमितों का अंतिम संस्कार भोपाल में हुआ लेकिन सरकारी आंकड़ों में इसकी संख्या सिर्फ 21 ही बताई गई तो श्मशानों में ये शव किसके हैं? ये तस्वीर बेहद भयावह है।

कब्र खोदने वालों के हाथ छालों से भरे, अब जेसीबी से हो रही खुदाई-

शमशान घाट से रहीं डरावनी तस्वीरों के बाद अब शहर के कब्रिस्तानों का दम भी फूलता नजर आने लगा है। कोविड से मौत की तरफ जा रहे शवों को दफनाने के लिए चिन्हित झदा कब्रिस्तान अब फुल हाउस का बोर्ड लगाए खड़ा दिखाई दे रहा है। यहां कब्र खोदने वालों के हाथ छालों से भर गए हैं, कब्र खोदने के लिए अब जेसीबी मशीनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
झदा कब्रिस्तान पर शवों की अंतिम क्रिया को पूरा करवाने में सहयोग कर रहे पूर्व पार्षद रेहान गोल्डन ने बताया कि सुबह से शाम तक लगातार पहुंच रहे जनाजों को दफन करने के लिए जगह कम पड़ती दिखाई देने लगी है। पिछले एक साल से इसी कब्रिस्तान में कोरोना से मरने वालों के शवों को दफनाया जा रहा है।
आने वाले जनाजों की बड़ी तादाद को देखते हुए यहां एडवांस में भी कब्र खोदीं जा रही हैं, लेकिन बढ़ी हुई तादाद को देखते हुए ये व्यवस्था भी कम पड़ती नजर आ रही है। रेहान ने बताया कि लगातार कब्र खोदने के चलते यहां खुदाई करने वालों के हाथों में छाले हो गए हैं। इस स्थिति के चलते अब जेसीबी मशीनों से खुदाई काम करवाना पड़ रहा है।
