मध्यप्रदेश में विंध्य को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की कवायद तेज हो गई है। एक मीडिया चैनल से बात करते हुए भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश वर्षों से पिछड़ा हुआ है और जनता पूरी तरह से प्रताड़ित है। वर्षों से मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश को और उसकी उपयोगिता को नकारा जा रहा है। बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि अब विंध्य क्षेत्र के जन भावना को स्वीकार करना ही होगा। जन-मन का एकमात्र उद्देश्य विंध्य प्रदेश को अलग प्रदेश बनाना है। वही बीजेपी पार्टी गाइडलाइन के सवाल पर उन्होंने कहा कि विंध्य प्रदेश की मांग कर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के सपने को साकार किया जा रहा है और हर स्तर पर विंध्य को अलग प्रदेश बनाने के लिए कार्य जारी रहेगा।
मुहिम चलाकर अलग विंध्य प्रदेश की मांग ,किया नए झंडे का लोकार्पण-

‘मेरा विंध्य, मुझे लौटा दो’ की मुहिम चलाकर अलग विंध्य प्रदेश की मांग करने वाले मैहर के भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने नए झंडे का लोकार्पण कर दिया गया है। इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया है कि साल 2023-24 तक विंध्य, मध्य प्रदेश से अलग एक राज्य बनेगा। मध्य प्रदेश में लंबे समय से विंध्य प्रदेश की मांग की जा रही है। भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी पार्टी लाइन से हट कर लगातार विंध्य की मांग उठा रहे हैं। वहीं पिछले दिनों बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी मध्य प्रदेश की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे थे। जहां विंध्य प्रदेश की मांग को पूरा करते हुए उन्होंने मंत्रालय के सामने सम्मेलन आयोजित किया था। भाजपा विधायक त्रिपाठी लगातार सतना रीवा और सीधी में जगह जगह बैठ कर जनसमूह से विंध्य प्रदेश की मांग की बात करते नजर आ रहे हैं। बता दें कि 1956 में मध्य प्रदेश का गठन हुआ था। तभी से अलग विंध्य प्रदेश बनाए जाने की मांग उठी थी लेकिन छह दशकों में उठे मांग को किसी न किसी वजह से दबा दिया जाता है। अब ऐसे में नारायण त्रिपाठी द्वारा लगातार विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर कवायत तेज कर दी गई है।
नारायण त्रिपाठी ने लिखा था पीएम मोदी को पत्र, धार्मिक स्थल बंद न करने की, की थी अपील-
हमेशा चर्चा में रहने वाले मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर धार्मिक स्थल बंद न करने की अपील की है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि ”धार्मिक स्थल पूर्ण रुप से बंद ना किए जाएं, अगर लॉकडाउन की संभावना बनती है, तो ऐसी स्थिति में धार्मिक स्थलों पर बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाए, लेकिन स्थानीय लोगों को भावना के अनुरूप धार्मिक स्थलों में सीमित संख्या में आने जाने दिया जाए. ताकि लोगों को भगवान के दर्शन मिलते रहें.”

