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August 4, 2026
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अब मिलेगी जिलों को विकास की गति,लंबे इंतजार के बाद मंत्रियों को सौंपें जाएंगे जिलों के प्रभार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब जल्द मंत्रियों को जिलों के प्रभार सौंप सकते हैं। मार्च 2020 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार गिर गई और 23 मार्च 2020 को शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मुख्यमंत्री पद संभालने के एक माह बाद उन्होंने कैबिनेट में 5 मंत्रियों को शामिल किया और उन्हें कुछ विभाग आवंटित किए। उसके दो महीने बाद उन्होंने एक बार फिर मंत्रिमंडल का विस्तार किया और 25 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। वर्तमान में शिवराज सरकार में कुल 30 मंत्री हैं जिनमें 23 कैबिनेट 4 स्वतंत्र प्रभार और 3 राज्य मंत्री हैं। इन सभी मंत्रियों को विभिन्न विभाग को आवंटित किए गए हैं। लेकिन किसी भी मंत्री के पास में किसी जिले का प्रभार नहीं है। पिछले एक साल से जिलो के प्रभार देने का मामला अटका पड़ा है। अब जल्द इस बात की घोषणा की जा सकती है कि किस मंत्री को किस जिले का प्रभार सौंपा जाएगा। मंत्रियो को प्रभार मिलने से इन जिलों में विकास को गति मिलेगी और प्रशासनिक कसावट भी हो सकेगी।

शिवराज सरकार ने एक मई 2021 से तबादले करने की घोषणा कर रखी है। जिलों में तबादला बोर्ड का प्रभारी मंत्री ही अध्यक्ष होता है और ऐसे में बिना प्रभारी मंत्री के तबादले कैसे होंगे, यह अपने आप में संशय की स्थिति है। इसके साथ-साथ जिला सरकार की हर तीन माह में बैठक होती है जिसमें जिले के विभिन्न कार्यों को लेकर समीक्षा की होती है और नए कार्य पर मोहर लगाई जाती है। बिना प्रभारी मंत्री के अभी यह काम अटका पड़ा है। ऐसे में अप्रैल के प्रथम सप्ताह में जिलों के प्रभार मंत्री बनाये जाने का ऐलान किया जा सकता है।

किस मंत्री को मिलेगा कौन सा जिला

सूत्रों की मानें तो नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव जैसे वरिष्ठ मंत्रियों को बड़े जिला उज्जैन, जबलपुर, इंदौर व भोपाल के प्रभार ऊपर जा सकते हैं। इसके साथ साथ ग्वालियर चंबल संभाग में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मंत्रियों को प्रभार सौंपने की तैयारी है। मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले हैं और मंत्रियों की संख्या 30 है, ऐसे में इस बात की भी पूरी उम्मीद की जा सकती है कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को एक से ज्यादा जिले भी दिए जा सकते हैं। हालांकि इन सब बातों का निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।

नगरीय निकाय व ग्राम पंचायतों के चुनाव में फोकस

आने वाले समय में नगरीय निकाय व ग्राम पंचायतों के चुनाव भी हैं और स्थानीय स्तर के नेताओं के साथ तालमेल
बैठाकर पार्टी को जीत दिलाना भी प्रभारी मंत्री की बड़ी जिम्मेदारी होगी तो ऐसे में सारे समीकरणों पर फिट बैठने वाले मंत्रियों को ही जिलों में तैनात किया जाएगा।

जिला सरकार की अवधारणा मूलतः दिग्विजय सिंह सरकार के काल में अस्तित्व में आई थी। इस सोच के पीछे अवधारणा यह कि हर काम के लिए राजधानी के चक्कर लगाने पड़े और सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए जिलों को ही अधिकार दिए जाएं। सैद्धांतिक रूप से जिला प्रभारी मंत्री अपने जिले में एक तरह से मुख्यमंत्री होता है, लेकिन वास्तविकता में इसका पालन नहीं होता है। प्रभारी मंत्री जिलों में जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता के साथ सरकार की योजनाओं के क्रियान्वन की समीक्षा भी करता है। सभी जिलों में प्रभारी मंत्री जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं के क्रियान्वन की समीक्षा भी करता है

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