
सुकन्या समृद्धि योजना केंद्र सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत प्रमुख रूप से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर ध्यान केंद्रित किया गया था।बच्चियों के बेहतर भविष्य को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत आप अपनी बेटी की पढ़ाई या फिर शादी के लिए एक बड़ा फंड बना सकते हैं।
ऐसे चलाई जाती है यह योजना
सुकन्या समृद्धि योजना में माता-पिता या कोई भी अभिभावक एक बेटी के नाम पर केवल एक अकाउंट खोल सकते हैं। वहीं दो अलग-अलग बेटियों के नाम पर अधिकतम दो अकाउंट खोले जा सकते हैं।सुकन्या समृद्धि योजना किसी भी दूसरे बैंक जमा की तरह निश्चित आय योजना है, जिसमें हर साल पैसे जमा कर सरकार द्वारा घोषित ब्याज हासिल किया जा सकता है।अगर आपके भी घर में बेटी है तो इस योजना के तहत खाता खुलवा कर लाभ ले सकते हैं। इस योजना को और बेहतर बनाने के लिए लगातार इस योजना के नियमों में बदलाव हो रहे हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना में यह बदलाव हुए
सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत अब माता-पिता अभिभावक अपनी तीसरी बेटी के लिए भी खाता खोल सकेंगे यानी की तीसरी बेटी को भी योजना का लाभ मिलेगा।पहले इस योजना में दो बेटियों के लिए ही खाता खोलने का प्रावधान था। वहीं तीसरी बेटी पर ये फायदा नहीं मिलता था। लेकिन नए नियम के तहत अगर एक बेटी के बाद दो जुड़वां बेटियां पैदा होती हैं तो उन दोनों के लिए भी खाता खोला जा सकता है।
खाता बंद हो गया तब भी वही ब्याज मिलेगा
नए नियम के तहत अगर सुकन्या समृद्धि खाते को किसी वजह से डिफॉल्ट मान लिया गया है और खाते को दोबारा एक्टिव नहीं किया जाता है, तब भी मैच्योर होने तक खाते में जमा राशि पर लागू दर से ब्याज मिलता रहेगा।
योजना का लाभ कभी भी लिया जा सकेगा
सुकन्या समृद्धि योजना का अब कभी भी लाभ लिया जा सकेगा। खाता कभी भी बंद करके राशि आरिफ की जा सकेगी। पहले इस योजना के तहत खोले गए खाते को सिर्फ दो परिस्थियों में बंद किया जा सकता था। पहला बेटी की मौत हो जाने पर और दूसरा यदि बेटी के रहने का पता बदल जाए तब।लेकिन अब नए बदलाव के बाद खाताधारक की जानलेवा बीमारी को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा जो भी अभिभावक इस अकाउंट को चला रहा था उसकी मौत होने पर भी समय से पहले खाता बंद किया जा सकता है।
सुकन्या समृद्धि योजना में नियम था कि बेटी इस खाते के शुरू होने के 10 साल में ही ऑपरेट कर सकती है, लेकिन नए नियमों के मुताबिक 18 साल की उम्र से पहले बेटी को खाता ऑपरेट करने की मंजूरी नहीं दी जाएगी। उससे पहले अभिभावक ही खाते को ऑपरेट करते रहेंगे।
