
खेती किसानी से अधिक लाभ कमाने के लिए किसानों को परंपरागत खेती से हटकर औषधीय खेती की ओर मुड़ना होगा। औषधीय खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक होता है, ऐसी ही काली तुलसी की खेती है।
काली तुलसी की खेती करने के इच्छुक किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि इस खेती में न तो किसी तरह का रोग लगता है, और ना ही अधिक खाद एवं पानी की जरूरत पड़ती है। काली तुलसी की खेती करने में खर्च भी कम ही होता है। एक अनुमान के मुताबिक 1 एकड़ में 40 से 50 हजार का खर्च आता है।
काली तुलसी की खेती; यह है लाभ का गणित
कृषि के जानकारों के अनुसार काली तुलसी की खेती के दौरान लागत कम होती है और फायदा अधिक। इसका आकलन इस प्रकार से भी किया जा सकता है कि 1 एकड़ में 40 से 50 हजार तक की लागत आती है, वहीं काली तुलसी के बीज यानी की पैदावार 1 एकड़ में लगभग आठ से 10 कुंटल तक हो जाती है।
काली तुलसी का भाव भी मार्केट में अच्छा रहता है। एक कुंटल का भाव 15 हजार रुपए के तकरीबन रहता है। इस हिसाब से देखें तो 1 एकड़ में लगभग 12 से 15 लाख रुपए तक की खेती हो जाती है। काली तुलसी मध्यप्रदेश के नीमच, मंदसौर, जावरा, रतलाम की मंडियों में आसानी से बिकती है।
काली तुलसी की खेती के लिए जून से तैयारी करें
काली तुलसी की खेती के लिए खेत की तैयारी के दौरान 10 टन प्रति एकड़ गोबर की सड़ी खाद खेत में डालकर जुताई करनी चाहिए। इसके बाद वेड बनाकर इसकी रोपाई करनी होती है। लाइन से लाइन की दूरी 50 सेमी और पौधों से पौधों की दूरी 25 सेमी रखनी होती है। पौधों के लिए जून में ही इसकी नर्सरी लगानी पड़ती है। इसके एक महीने बाद पौधे रोपने होते हैं।
उर्वरक इस प्रकार दें
प्रति एकड़ 80 किलो नाइट्रोजन, डीएपी 25 किलो शुरू में देना पड़ता है। जबकि गोबर की सड़ी खाद 10 टन लगती है। फसल के शुरूआती समय में खरपतवार का नियंत्रण करना पड़ता है। तुलसी बड़ी होनी पर खरपतवार की समस्या भी समाप्त हो जाती है।
फसल तैयार कैसे होती है, जानिए
काली तुलसी 120 से 150 दिन में तैयार हो जाती है। यदि पत्तियों का अर्क बनाना है तो 60 दिन में इसकी कटाई कर ली जाती है। फिर ये 150 दिन में तैयार होती है। एक एकड़ में 8 क्विंटल के लगभग काली तुलसी के बीज तैयार होते हैं। वहीं शेष हिस्से को भूसा बना लेते हैं।बिना कटिंग वाली तुलसी 120 दिन में तैयार हो जाती है। इसमें 10 क्विंटल तक बीज की पैदावार होती है। बीज जहां बाजार में 150 रुपए प्रति किलो की दर से बिकता है। वहीं तुलसी का भूसा 5 से 8 रुपए किलो की दर से अगरबत्ती और हवन सामग्री में बिक जाता है।
राम एवं श्याम तुलसी

तुलसी दो प्रकार की होती है, एक को राम कहा जाता है तो दूसरी को श्याम। श्याम तुलसी को ही काली तुलसी कहा जाता है। इसके तेल की महक सौंफ की तरह होती है। काली तुलसी की पत्तियां हरी होती हैं, लेकिन इसके बीज काले और तिकोने आकार के होते हैं। राम तुलसी का उपयोग पूजा में होता है। उसकी पत्तियां भी हरी होती है, लेकिन बीज भूरे कलर का होता है। राम तुलसी की पत्ती, बीज और तना तक बिकता है। उसका उपयोग कफ सिरप में होता है।
