
जिला, विकासखंड व ग्राम स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों से वी.सी. के माध्यम से विचार साझा किया। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने पहली और दूसरी लहर का मुकाबला किया है। यह प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व का ही कमाल है कि पूरे देश में 140 करोड़ से ज्यादा टीके लग चुके हैं। हमारे मंत्रीगण, सांसदगण, जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप, सामाजिक संगठन, धर्मगुरु सहित कोरोना से मुकाबले में साथ देने वाले सभी लोग मिलकर तीसरी लहर का मुकाबला करेंगे, इसे रोकेंगे। हमारी वार्ड और ग्राम पंचायत स्तरीय समितियां ध्यान रखें कि सर्दी, खांसी, जुकाम या हल्के बुखार को गंभीरता से लें। इससे पीड़ित व्यक्ति का तुरंत आरटीपीसी सैंपल लिया जाए और जांच करें कि कहीं कोरोना तो नहीं है।
शहर में मोहल्ले वार्ड और गांव में पंचायत स्तर तक सतर्कता अधिक रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजर के उपयोग आदि के लिए जागरूक भी करना है। अब हम सभी की जिम्मेदारी है कि 3 जनवरी से शुरू हो रहे 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान को सफल बनाएं। हमें ध्यान रखना होगा कि इस आयु वर्ग के सभी किशोर-किशोरियों को टीका लग जाए, उन्हें सुरक्षित कर लिया जाये। ब्लॉक स्तर पर कोविड केयर सेंटर कहां बनाया जाए यह भी समय रहते सुनिश्चित कर लें। हमें जांच की संख्या भी बढ़ाना है। अभी आज का आंकड़ा 60 हजार के करीब है, इसे बढ़ाकर 75 हजार तक ले जाना है। सभी जिलों में तत्काल एक कोविड-19 सेंटर तो चालू करना ही है। कोरोना से पीड़ित सभी मरीजों को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं है। जिन्हें कोविड केयर सेंटर में रखा जा सकता है, उन्हें वही रखें। जो मामले गंभीर दिखे उन्हें अस्पताल पहुंचाएं।
आबादी, प्रसार की संभावना आदि के मद्देनजर सभी जिलों को जांच के लक्ष्य दिए गए हैं, इसे अवश्य पूरा करें। अंतरराज्यीय आवागमन पर भी विशेष निगरानी रखें। जिन निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध हुआ था, उसकी अवधि 1 जनवरी से 31 मार्च 2022 तक के लिए बढ़ा ली जाए, जिससे आवश्यकता पड़ने पर शासकीय अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी मरीजों का इलाज किया जा सके। होम आइसोलेशन के मामले अधिक होंगे, इसलिए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की व्यवस्था दुरुस्त रखें। मोबाइल मेडिकल यूनिट को भी सक्रिय रखें, जिससे होम आइसोलेट मरीज से तत्काल संपर्क किया जा सके। मेडिकल किट की व्यवस्था भी बनाकर रखें।
निजी अस्पतालों में इलाज के लिए शासन द्वारा निर्धारित शुल्क ही लिए जाए, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित रखें। कोई पीड़ित से मनमानी वसूली न कर सके इस पर ध्यान रखना है। निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं भी पर्याप्त हों यह भी अवश्य देखें। 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों को को-वैक्सीन टीकाकरण किया जाएगा। हमें इन बच्चों का टीकाकरण जल्द से जल्द सुनिश्चित करना है। दूसरी तरफ 60 वर्ष से ऊपर के नागरिक और फ्रंटलाइन वर्कर्स को बुस्टर डोज लगाने की शुरुआत की जाएगी। लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। हम बचाव, सतर्कता का ध्यान में रखें। लॉकडाउन से गरीबों के लिए रोजी-रोटी का संकट हो जाता है, व्यापार में नुकसान होता है। जहां तक हो सके हम अपनी आदतों में बदलाव से कोरोना को दूर रखें।
