
आखिर शिवराज सरकार को पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर मुंह की खानी पड़ी और कांग्रेस की मांग स्वीकार करना पड़ी। ओबीसी पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री कमलनाथ जी के नेतृत्व में विधायक कमलेश्वर पटेल ने स्थगन लगाकर चर्चा की। उन्होंने सरकार की खिंचाई कर शीतकालीन सत्र में गर्माहट पैदा कर दी। कमलेश्वर पटेल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 डी में उल्लेख है की पंचायतों का चुनाव 5 वर्षों में आरक्षण,रोटेशन एवं परिसीमन करके ही करवाना चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने 73 व 74 वां संविधान संशोधन विधेयक लाकर त्रिस्तरीय पंचायत राज और नगरीय निकाय के हमारे जनप्रतिनिधियों को शक्ति प्रदान की थी,उन्हेंअधिकार संपन्न बनाया था। उन्होंने आगे कहा इस सदन के बहुत सारे साथी त्रिस्तरीय पंचायत राज जिला,जनपद, ग्राम पंचायतों ,पार्षद महापौर व नगर निगम अध्यक्ष बनने के बाद यहां आए हैं ।यदि रोटेशन में यह प्रक्रिया नहीं होती तो आज यहां सदन में विधायक के रुप में उपस्थित नहीं होते, मंत्री के रूप में नहीं होते।
विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा एक तरफ विधानसभा का सत्र 23 नवंबर 2021 को आहूत किया गया,वहीं दूसरी ओर 4 दिसंबर 2021 को पंचायत चुनावों की आचार संहिता लागू कर दी गई वह भी दोहरे मापदंड के साथ। एक तरफ जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया में वहीं दूसरी तरफ जिनका परिसीमन वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार में किया गया था उस प्रक्रिया को अमान्य किया गया।
कांग्रेस सरकार में परिसीमन,आरक्षण एवं रोटेशन विधि सम्मत प्रक्रिया को पूर्ण किया था ।प्रदेश में पंचायतों का परिसीमन पिछले 15 वर्षों से नहीं हुआ था, कमलनाथ सरकार द्वारा परिसीमन करके पंचायत राज व्यवस्था को सही रूप में लागू करने का कार्य किया गया। 15 किलोमीटर के दायरे में जो पंचायत के गांव,डूब प्रभावित क्षेत्र के ग्राम थे उनके सहित अनेक विसंगतियों को दूर कर सरलीकरण के साथ परिसीमन किया गया।विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा मप्र सरकार पंचायत चुनाव में विसंगति पूर्ण एवं असंवैधानिक कार्य किया है एवं प्रदेश की 50% से अधिक आबादी जो कि पिछड़ा वर्ग की है उनको नजरअंदाज कर उनके अधिकारों को छीनने का कार्य किया है।
कमलेश्वर पटेल ने कहा की पंचायत राज व्यवस्था को सशक्तिकरण करने का कार्य कांग्रेस सरकार के द्वारा किया गया है नई मतदाता सूची तैयार हो रही है माह जनवरी में युवा साथी 18 वर्ष पूर्ण करेंगे जिन्हें मतदान करने का अधिकार है वे भी मत नहीं दे सकेंगे यह सरकार की गलत नीति है।नए वोटरों से वोट देने का अधिकार छीनने का काम शिवराज सरकार कर रही है।
विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा भाजपा सरकार पिछड़ा वर्ग के अधिकारों को दबाने का कार्य कर रही है। कांग्रेस सरकार ने महाजन आयोग गठित कर उसकी सिफारिशों को लागू करके पिछड़ा वर्ग में 14% आरक्षण नौकरियों एवं केंद्र की यूपीए सरकार में उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्रों के लिए 27% आरक्षण किया किंतु अधिकारों को कम करने का प्रयास भाजपा सरकार कर रही है।
कमलेश्वर पटेल ने कहा मंडल आयोग के समय को दो बार बढ़ाने का कार्य पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने किया था। कांग्रेस समतामूलक समाज की पक्षधर है । मध्यप्रदेश में दुर्भाग्य की बात है कि जितने भी संवैधानिक आयोग हैं वहां ताला जड़ा हुआ है, पिछड़ा वर्ग आयोग संवैधानिक पद है उसके अधिकार को निरंतर छीनने का प्रयास किया जा रहा है।
विधायक कमलेश्वर पटेल ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा प्रदेश में पंचायत चुनाव संवैधानिक प्रावधान एवं नियमों के अनुरूप होते तो पीड़ित पक्षों को न्यायालय में शरण नहीं लेनी पड़ती आज पंच से लेकर सरपंच जनपद से लेकर जिला पंचायत के चुनाव में सभी लोगों ने अपने सपने संजो कर रखे थे किंतु असंवैधानिक कार्य कर प्रदेश सरकार ने नागरिकों के अधिकारों को छीनने का कार्य किया है।
कमलेश्वर पटेल ने भाजपा सरकार को इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया है कि पंचायत चुनाव में नियमानुसार प्रक्रिया को पूर्ण नहीं करते पिछड़े वर्गों के सदस्यों को पंचायत चुनाव से वंचित करने का कार्य कर उनके अधिकारों को छीनने का कार्य किया है, क्या पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए फिर से अलग से चुनाव होंगे,उनके लिए अलग वोटिंग होगी ईवीएम मशीन लगेगी क्या प्रदेश की जनता दो बार मतदान करने जाएगी इससे समय एवं धनराशि का अपव्यय होगा।अभी भी अस्थिरता का माहौल है सारी प्रक्रिया सरकार ने बगैर सोचे समझे जल्दबाजी में की है।सदन में चर्चा कराकर विधिवत नियम प्रक्रिया में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया की जाना थी जिसे नहीं किया गया इसमें प्रदेश की महिलाओं,अनुसूचित जाति,जनजाति,पिछड़ा वर्ग,सामान्य वर्ग एवं युवाओं के हितों की रक्षा की जाना चाहिए थी ।
कमलेश्वर पटेल ने जोरदार तरीके से भारतीय अनुच्छेद 243 डी की कंडिका 6 को रेखांकित करते हुए कहा की सभी को अवसर देने का प्रावधान है।कमलेश्वर पटेल ने कहा की कमलनाथ सरकार के द्वारा पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण को लागू कर नोटिफिकेशन किया गया। इसका लाभ पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को मिलना भी शुरू हो गया, लेकिन कुछ प्रायोजित लोग जिस तरह आरोप लगाते हैं।वह सुनियोजित तरीके से कोर्ट में जाकर रोक लगाई,जबकि रोक सिर्फ 3 विभागों में थी किंतु दुर्भाग्य है कि प्रदेश की सरकार को समझने में साल भर से ज्यादा का समय लग गया। महाधिवक्ता को भी सरकार को समझाने में साल भर का समय लगा।
कमलेश्वर पटेल ने विधानसभा में आग्रह किया कि आज एक प्रस्ताव यहां सदन में पारित होना चाहिए जिससे की भविष्य में आपस में हितों का टकराव न हो। न सरकार संकट में आए ओर नही पिछड़ा वर्ग के लोग संकट में आए। जिस तरह से आज माननीय न्यायालय में आरक्षण नहीं है वहां भी आरक्षण लागू होना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय में भी तथा जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं जिनमें संघ लोक सेवा आयोग,राज्य लोक सेवा आयोग और हमारे जितने भी इंटरव्यू बोर्ड बनते हैं सभी जगह आरक्षित वर्ग के लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।यह प्रस्ताव भारत सरकार को लोक लोकसभा में भेजें और दूसरा यह जो चुनाव विसंगति पूर्ण तरीके से हो रहा है इस पर लोग रोक लगाई जाए। मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाए और विसंगतियां दूर करके नए सिरे से परिसीमन कराएं रोटेशन में आरक्षण कराएं और उसके अनुरूप ही नियम संगत चुनाव हो।
विधानसभा में कांग्रेस ने सरकार को अपनी गलती सुधारने के लिये विवश किया और अंततः मुख्यमंत्री को झुकना पड़ा व ओबीसी आरक्षण के साथ ही पंचायत चुनाव कराने की कांग्रेस की माँग स्वीकार करनी पड़ी।
