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June 22, 2026
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करवा चौथ का वैज्ञानिक महत्व, शुभ मुहूर्त एवं इस वर्ष क्या है विशेष संयोग जानिए

Kकरवा चौथ का त्योहार इस बार रविवार को आ रहा है। यह विशेष संयोग का दिन माना जा रहा है। करवा चौथ इस बार सर्वार्थ सिद्धि और धाता योग में मनाई जाएगी। रविवार के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी प्रातःकाल सूर्योदय से अगली प्रातः 5: 45 बजे तक रहेगी।

24 अक्टूबर दिन रविवार को सर्वार्थ सिद्धि और धाता योग में सौभाग्यवती महिलाएं के लिए करवाचौथ का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रीय मतानुसार सौभाग्यवती महिलाएं अखंड सौभाग्य एवं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं।

इस वर्ष करवा चौथ के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी प्रातःकाल सूर्योदय से अगली प्रातः 5: 45 बजे तक रहेगी। इस बार चतुर्थी को रोहिणी नक्षत्र का भी योग बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र के दिन करवाचौथ का होना भी बहुत शुभ माना गया है। यह महिलाओं के सौभाग्य की वृद्धि करता है। इस दिन वृषभ के चंद्रमा जो उनकी अपनी उच्च राशि है उसमें पूरे दिन विराजमान रहेंगे।

करवा चौथ का वैज्ञानिक महत्व

जैसा कि हिंदू सनातन धर्म की के सभी त्योहार परंपरागत रूप से मनाए जाते हैं। इन त्योहारों में वैज्ञानिकता समाई हुई रहती है। करवा चौथ का भी अपना एक वैज्ञानिक महत्व है। शरद पूर्णिमा के चौथे दिन आने वाली कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का चांद अपना एक विशेष महत्व रखता है।

शरद पूर्णिमा का चांद 12 महीनों 12 महीनों की पूर्णिमा के दौरान नजर आने वाले चंद्रमा से बड़ा रहता है इस दिन चंद्रमा की किरणें पृथ्वी पर गिरते ही अपना विशेष प्रभाव दिखलाती है। यह चांदनी औषधीय गुणों से परिपूर्ण रहती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो चंद्रमा के उदय काल के समय इसकी किरणें मस्तिष्क पर गिरे तो इससे कोशिकाओं में एक तरह का विशेष रक्त संचार होता है। इसका लाभ उस दौरान बड़ जाता है जब दिन भर से व्रत करती हुई महिला इसकी चांदनी को निहारें और चंद्रमा को जल अर्पित करें।

विशेष संयोग युक्त है इस बार की करवा चौथ

इस वर्ष करवाचौथ का व्रत धाता एवं सर्वार्थ सिद्धि योग, वृषभ राशि (उच्च) का चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। इस पर्व पर सभी सौभाग्यवती महिलाएं एकत्र होकर किसी बुजुर्ग महिला से कहानी सुनती हैं और आपस में करवा बदलती हैं। ऐसा माना जाता है कि करवे को आपस में बदलने से पारिवारिक महिला सदस्य देवरानी-जेठानी, सास-बहू में प्रेम की वृद्धि होती है।

पूजन का शुभ मुहूर्त

24 अक्टूबर को रविवार होने से प्रातः 11:36 बजे से 12:24 बजे तक विशेष मुहूर्तराज अभिजित मुहूर्त होता है। इसमें करवाचौथ व्रत की पूजा करने का कई गुना फल मिलता है। उसके पश्चात स्थिर लग्न (कुंभ लग्न) 14:21 से 15:49 तक रहेगा। यह करवाचौथ की कहानी सुनने एवं पूजन करने के लिए श्रेष्ठ है। रात्रि 8:09 बजे चंद्रमा उदय होंगे।

इसी समय में सर्वश्रेष्ठ बात यह है कि उस समय भी वृषभ लग्न रहेगा और 18:50 से 20:46 बजे तक रहेगा। चंद्रमा भी वृषभ लग्न में रहेंगे। ऐसे शुभ संयोग में सौभाग्यवती महिलाएं चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देंगी और अपने पति के दर्शन कर व्रत खोलेंगी। सौभाग्यशाली महिलाओं इस वर्ष का यह पर्व अखंड सुहाग के लिए बहुत ही उत्तम रहेगा।

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