
भोपाल।प्रदेश में कोरोना संक्रमण भले ही नियंत्रण में हो, लेकिन डेंगू के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डेंगू के अधिकांश मामले जबलपुर एवं भोपाल में सामने आ रहे हैं जबलपुर में तो की स्थिति बिगड़ रही है। शहर के कुछ इलाकों में डेंगू का प्रकोप ज्यादा है। जबलपुर शहर में हर दिन डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। यही हाल भोपाल का है यहां पर भी डेंगू मरीजों में आधे से ज्यादा साकेत नगर, बागसेवनिया, बरखेड़ा पठानी में मिल रहे हैं।
रविवार को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डेंगू के 40 संदिग्धों के सैंपल की जांच की गई। इसमें आठ मरीज डेंगू से संक्रमित मिले हैं। इनमें साकेत नगर के दो मरीज शामिल हैं। बाकी मरीज अयोध्या बायपास, फार्चून पर्ल, हर्षवर्धन नगर, दानिश नगर में मिले हैं। इसके साथ ही सितंबर में डेंगू मरीजों की संख्या 171 हो गई है।
गौरतलब है कि साकेत नगर 2014 से डेंगू के मामले में संवेदनशील क्षेत्र रहा है, लेकिन इस साल कम मरीज मिल रहे थे। इस वजह से यहां पर डेंगू की रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग की तरफ से सक्रियता भी नहीं दिखाई गई। पिछले पांच दिन से यहां हर दिन मरीज मिल रहे हैं। यहां एम्स के छात्रावासों में भी डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं।
जबलपुर में खतरनाक स्थिति में पहुंचा डेंगू
इधर जबलपुर में पिछले तीन महीने से कहर ढा रहा डेंगू अब खतरनाक स्थित में पहुंच चुका है। जबलपुर में शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मरीज मिले हैं। इस स्थित में मरीज के जरूरी अंग फेल होने का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू पीड़ित को समय पर इलाज नहीं मिलने पर उसकी खून की नलियों में सूजन से अंदर का द्रव रिसकर लीवर, फेफड़े, पेट के आसपास जमा होने लगता है। ये किडनी और हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ा देता है। ये काम करना बंद कर देते है। मल्टी ऑर्गन फेलियर की आशंका बढ़ जाती है। सामान्य बुखार समझकर दवा लेने वाले मरीजों में इस तरह के लक्षण अधिक मिल रहे हैं।
जबलपुर में डेंगू के 24 नए मरीज मिलें
जिले में 19 सितंबर को डेंगू के 24 नए मरीज मिलें है। इसकी पुष्टि एलायजा टेस्ट के बाद हुई है। इसमें 18 मेडिकल में भर्ती बताएं गए हैं। जिले में अब डेंगू के कुल मरीजों की सरकारी संख्या 522 हो चुकी है। इसके अलावा 10 मलेरिया और 41 चिकनगुनिया के पीड़ित सामने आ चुके हैं। अस्पतालों की ओपीडी और प्राइवेट क्लीनिक में वायरल बुखार के मरीजों की कतार भी कम नहीं हो रही है। सर्दी-खांसी, गले और बदन में दर्द के साथ बुखार की शिकायत लेकर 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे है
डेंगू से डरें नहीं, बचाव करें
- डेंगू मच्छरों से फैलता है। मच्छर का लार्वा सामान्यत: घर बर्तनों, कूलर, गमलों के पानी, खुले में रखे कबाड़, गड्ढों में जमा साफ पानी में पनपते है। इसलिए पानी जमा ना होने दें। घर में स्टोर पानी को 5-6 दिन में खाली करके अच्छे से सूखाकर दोबारा पानी भरें।
- डेंगू के मच्छर दिन में खासकर सुबह के समय काटते है। लोग रात में मच्छरदानी लगाकर बेफिक्र हो जाते है। जरुरी है कि दिन के समय मच्छर ना काटें इसका उपाय करें। शरीर को पूरी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें। छोटे बच्चों को मच्छरदानी में रखें।
- बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। ब्ल्ड प्रेशर नापें। ढेर सारी जांच की बजाय बुखार में सीबीसी (जिसमें प्लेटलेट्स काउंट पता चलें), डेंगू के लिए रक्त परीक्षण और मलेरिया की जांच की मुख्य भूमिका होती हैं।
- डेंगू मरीज को तेज बुखार आने पर पैरोसिटामॉल की गोली डॉक्टर से परामर्श करके दें। इसमें कोई भी एंटीबायोटिक असरकारी नहीं है। बुखार पीड़ित के शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए खूब पानी पीएं। तरल पदार्थ का सेवन करें।
