
प्रदेश में स्क्रब टायफस और डेंगू बुखार के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भोपाल में मंगलवार को डेंगू बुखार के 16 और कोरोना के दो नए मरीज मिले हैं। इससे राजधानी में डेंगू संक्रमितों का आंकड़ा 142 हो गया है। इसके अलावा इंदौर में 95 और ग्वालियर में 33 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं।
राजधानी में स्क्रब टाइफस बीमारी ने दस्तक दे दी है। इस बीमारी से पीड़ित दो मरीजों का चिरायु में इलाज चल रहा है। दोनों मरीज सिंगरौली और पवई (पन्ना) से यहां इलाज के लिए आए हैं। दोनों को पोस्ट कोविड कांप्लीकेशन की शिकायत थी। प्रदेश में अब तक 20 मरीज स्क्रब टाइफस से संक्रमित मिल चुके है।
क्या है स्क्रब टायफस
सक्रब टाइफस माइट यानि कीड़े के काटने से होने वाला बुखार है, जिसने आजकल यूपी के लोगों को तेज़ी से अपना शिकार बनाया हुआ है। यह बुखार खतरनाक जीवाणु ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्ट्रीरिया की वजह से फैलता है। इससे लिवर, दिमाग और फेफड़ों में कई तरह का संक्रमण होने का खतरा रहता है। इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं है लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।
स्क्रब टायफस के लक्षण
- कीड़े के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार (102-103 डिग्री फारेनहाइट), होता है।
- सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है।
- आमतौर पर इस बीमारी से पीड़ित 40-50 फीसदी लोगों में कीड़े के काटने का निशान दिखता है।
- यह निशान गोल और ब्लैक मार्क होता है।
- आधे से अधिक लोगों में इसके निशान दिखते भी नहीं है। इस बीमारी का इलाज संभव है लेकिन अगर देरी से इसका इलाज किया जाए तो इसका असर बॉडी के कई अंगों पर हो सकता है।
- इस बीमारी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, अगर इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो लंग्स, किडनी और लीवर पर भी इसका असर हो सकता है।
- इसका समय रहते इलाज नहीं हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है।
- कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती जिससे मरीज़ बेहोशी की हालत में चला जाता है।
- रोग गंभीर होने पर मरीज़ में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।
