
उज्जैन। जिला सहकारी बैंक की घटिया शाखा में किसानों के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है यह गड़बड़ी पिछले 2 साल से हो रही थी। एक किसान द्वारा शिकायत किए जाने के पश्चात जिला सहकारी बैंक एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी की नजर में मामला आया। हालांकि अधिकारी इस मामले को लेकर लीपापोती करने में लगे हुए हैं। क्योंकि फरियादी ने जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों को लगभग 1 महीने पहले इस मामले को लेकर शिकायत की थी। तब से लगाकर अब तक सिर्फ जांच के नाम पर लीपापोती ही की जा रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की इस करोड़ों के घोटाले से जुड़े आरोपी अभी भी अपने अपने पदों पर बने हुए हैं। इतना ही नहीं जिस ब्रांच मैनेजर के रहते पूरा घोटाला हुआ वह अभी तक ब्रांच का मैनेजर ही बना हुआ है।
गबन, धोखाधड़ी का मामला उस दौरान पकड़ में आया जब घटिया तहसील के ग्राम माली खेड़ी के एक किसान के बचत खाते में 2 लाख की राशि ट्रांसफर हुई। बैंक की ओर से ही यह राशि किसान के बचत खाते में ट्रांसफर की गई थी ट्रांसफर करने के पश्चात ही उक्त राशि निकाल ली गई। इससे किसान चौक गया, उसने इसकी जानकारी बैंक से निकलवाई और मामले को लेकर जिला सहकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करवाया। इसके बाद जिला सहकारी बैंक की घटिया ब्रांच में हड़कंप मच गया एक से एक कड़ी मिलने पर सामने आया कि किसानों के बचत खाते में राशि ट्रांसफर करके उसे बाले बाले निकालने का यह धोखाधड़ी का खेल 2019 से चल रहा है।
वर्तमान में ब्रांच मैनेजर महेश राठौर के कार्यकाल के दौरान ही लगभग 70 लाख रुपए की राशि की हेराफेरी हुई। बताया जा रहा है कि बैंक में बीजीएल हेड होता है, जिसकी राशि बंद खातों में ट्रांसफर की जाती थी। ऐसे खातों में भी राशि ट्रांसफर करके निकाल ली गई।
संदिग्ध ब्रांच मैनेजर अभी भी अपने पद पर ही
पूरे मामले को लेकर ताज्जुब इस बात से होता है कि जिस ब्रांच मैनेजर महेश राठौर के कार्यकाल के दौरान लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया वह अपने पद पर ही बना हुआ है। सूत्रों की माने तो ब्रांच मैनेजर के द्वारा तमाम हेरा फेरी के सबूत मिटाई जा रहे हैं। चौपाल समाचार के द्वारा जब ब्रांच मैनेजर महेश राठौर से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि मैंने ही धोखाधड़ी के इस मामले को ओपन किया है। अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
फर्जी चेक बुक से निकले रुपए
करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों ने पहले तो किसानों के बचत खातों में राशि ट्रांसफर की वही इस दौरान मैसेज भी ब्लॉक कर दिए। ताकि किसानों को पता ना चले। इसके बाद फर्जी चेक बुक के द्वारा किसानों के खाते से राशि निकाल ली। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जिस चेक बुक से लाखों करोड़ों रुपए की हेराफेरी हुई वह चेक बुक रिकॉर्ड में ही नहीं है। वहीं राशि निकालने के दौरान भी आरोपियों में चेक वेरीफाई की जो प्रक्रिया है, उसका पालन नहीं किया और मात्र क्लर्क एवं केशियर की आईडी के द्वारा ही राशि आहरित कर ली।
किसानों को दो हजार से अधिक राशि के भुगतान पर लगाई रोक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जैसे ही गड़बड़ी का पता चला तुरंत बैंक अधिकारियों ने किसानों के खाते से होने वाले ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी। किसानों के खाते से मात्र दो 2000 हजार रुपए ही निकालने की शर्त बैंक ने रख दी। इसे कई किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि इसके पूर्व धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों को फर्जी चेक के माध्यम से लाखों रुपए आहरित हुए।
जांच चल रही है…
इस मामले को लेकर जब जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि खातों और राशि का मिलान किए जाने पर मामला पकड़ में आया है। अभी जांच चल रही है। कितनी राशि ट्रांसफर की गई और कितनी राशि निकाली गई, इसकी जानकारी तीन-चार दिन में सामने आ जाएगी।
