
खंडवा। मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सरपंच की तबीयत आज सुबह और अधिक बिगड़ गई है। वह किसने डेढ़ मास है मंदिर जाने भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे हैं उन्होंने पिछले 3 दिनों से पानी भी पीना बंद कर दिया था। गंभीर हालत में परिजन व रिश्तेदार उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जावर से जिला अस्पताल लेकर आए। जहां पुलिस की मौजूदगी में उन्हें भर्ती कराया गया।
अफसरों की मानसिक प्रताड़ना से तंग आ चुके रोहिणी सरपंच भगवानसिंह ने करीब डेढ़ महीनें से भोजन नहीं किया। 3 दिन पहले शुक्रवार सुबह से पानी तक छोड़ रखा था। शनिवार सुबह से वे पंचायत कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। रविवार दोपहर को हालत बिगड़ गई। सरपंच की मांग है कि फर्जी बिल व मजदूरी चढ़ाकर मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वाले रोजगार सहायक महेंद्र मंडलोई को बर्खास्त किया जाए। उसे हटाने के लिए पिछले सालों ग्रामसभा में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। लेकिन जनपद स्तर के अधिकारी भ्रष्ट रोजगार सहायक का संरक्षण करते रहे और आखिर में उसे रोहिणी से स्थानांतरित कर ढोढ़वाड़ा पंचायत में सचिव का प्रभार दे दिया। जबकि यह नियम विरुद्व है।
GRS ने किया भ्रष्टाचार
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत के अंतर्गत मनरेगा के तहत जितने भी कार्य होते हैं, उनका संचालन ग्राम रोजगार सहायक द्वारा किया जाता है। ग्राम रोजगार सहायक (GRS) द्वारा ही मस्टररोल से लेकर जाबकार्ड धारियों को रोजगार दिलाने की जिम्मेदारी होती है, किंतु अधिकांश मामलों में देखा जाता है कि ग्राम रोजगार सहायक मजदूरों से कार्य करवाने की बजाय मशीनों से काम करवा लेता है और मनरेगा के अंतर्गत भ्रष्टाचार करता है। इसी प्रकार के प्रचार को लेकर सरपंच भगवान सिंह ग्राम रोजगार सहायक के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की थी।
