
कोरोना महामारी में लोगों की जिंदगी बचाने का टीका लगातेे-लगाते वाली एक फ्रंट लाइन वर्कर ही जिंदगी की जंग हार गई। रामनगर ब्लाक के गोरसरी में पदस्थ एएनएम का कोरोना से दुखद निधन। रामनगर ब्लॉक के गोरसरी गाव मे पदस्थ एएनएम ने अपनी ड्यूटी मे लोगो की जिंदगी बचाने के लिए कोविड का टीका लगा रही थी। उसी दरमियान संक्रमित हुई, पति ने कोरोना के लक्षण को देखते हुए अस्पताल में दाखिल कराया था। एएनएम ने 10 दिनों के संर्घष के बाद सतना जिला अस्पताल मे आखिरकार दम तोड़ दिया ।
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मिली जानकारी के मुताबिक बिरसिंहपुर तहसील के होमहाई गांव की रहने वाली माया आदिवासी रामनगर ब्लॉक के उप स्वास्थ्य केन्द्र गोरसरी मे एएनएम के पद पर पदस्थ थी। जो एक पखवाड़े पहले सर्दी बुखार से पीड़ित हो गई। पति प्रकाश कुमार ने 8 मई को जिला अस्पताल में दिखाया तो चिकित्सकों ने एसपीओ टू कम होने पर कोविड 19 की जांच कराने को कहा। ऐसे में एएनएम कोरोना जांच में संक्रमित पाई गई। उसे जिला अस्पताल के ट्रामा यूनिट ग्राउंड फ्लोर में भर्ती कराया गया। 10 दिन इलाज के बाद स्वस्थ्य होने पर 18 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया।पति का आरोप है कि डिस्चार्ज करने से पहले ही माया की आंख में कुछ धुंधला दिखाई दे रहा था। छुटटी देते समय स्टाफ नर्स को बताया भी तो उन्होंने कहा कि एक दो दिन में सब सही हो जाएगा। घर पहुंचे तो फिर तकलीफ बढ़ गई। ऐसे में प्रेम नर्सिंग होम में दाखिल कराया। इसके बाद सीसी स्कैन कराया तो चिकित्सकों ने फेफड़ों और ब्रेन में संक्रमण होना बताकर इलाज शुरू किया। रेमडेसिविर लाने को कहा गया। ऐसे में करीब 68 सौ में दो बायल खरीदकर लगवाया। इसके बाद भी हालत नाजुक बनी रही। फिर अंत में प्रेम नर्सिंग होम वाले बाहर ले जाने की सलाह दी।
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माया आदिवासी को जबलपुर मेडिकल कालेज ले जाया गया जहाँ फ्रंट लाइन वर्कर को एक बेड तक नहीं मिला। स्ट्रेचर में ही ड्रिप चढ़ाया गया बाद में 21 मई को रात 1 बजे हेल्थ केयर अस्पताल ले जाया गया जहां 60 हजार रुपए एडवांस जमा कराए गए। वही हेल्थ केयर अस्पताल द्वारा कहा गया कि मरीज के दोनों फेफड़ों में संक्रमण बढ़ गया है मरीज का बचना मुश्किल है, ऐसे में वेंटिलेटर लगेगा जिसकी 1 दिन का चार्ज 50,000 रुपए लगेगा। बेहतर यह होगा कि आप अपने मरीज को घर ले जाइए।करीब 20 घंटे के भीतर 81 हजार रुपए भुगतान के बाद एंबुलेंस से पत्नी को वापस जिला अस्पताल सतना लाया। जहां रविवार की सुबह फ्रंट लाइन वर्कर माया आदिवासी की मौत हो गई। अंत में कोविड प्रोटोकाल के तहत नजीराबाद मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया।
