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August 5, 2026
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सुप्रीम कोर्ट को भी टेंशन, क्या तीसरी लहर के खतरे में हैं बच्चे?सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – तीसरी लहर को लेकर क्या तैयारी है?

1. कोरोना की तीसरी लहर पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

 2.तीसरी से लहर को लेकर सरकार से मांगा एक्शन प्लान

 3.तीसरी लहर में बच्चे भी हो सकते हैं कोरोना से संक्रमित

नई दिल्ली ; कोरोना का खतरा फिलहाल खत्‍म होता नहीं दिख रहा है। वायरस के नए-नए वैरिएंट्स की वजह से अब इसकी तीसरी लहर की बात होने लगी है। सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन के साथ तमाम एक्‍सपर्ट्स इस बारे में चेतावनी दे चुके हैं। इसके बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जैसे, यह पहली और दूसरी लहर से कैसे अलग होगी? देश में यह कब दस्‍तक देगी? ऐसे में सबसे जरूरी इन नए वैरिएंट की पहचान करना होगा। दुनियाभर के साइंटिस्ट वायरस के इन अलग-अलग वैरिएंट्स का मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुनवाई के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा, अभी देश कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। तीसरी लहर आना बाकी है। वैज्ञानिक कोरोना की तीसरी लहर की बात कह रहे हैं। उस में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। टीकाकरण अभियान में बच्चों के लिए सोचा जाना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से कहा कोरोना संकट में दिल्ली समेत देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही केन्द्र सरकार से कोरोना की तीसरी लहर से निपटने का एक्शन प्लान मांगा है। कोर्ट ने केन्द्र से जोर देते हुए कहा कि हमें तीसरी लहर से निपटने के लिए अभी से सभी तैयारियां करनी होगी।

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मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कल को हालात बिगड़ते हैं और कोरोना के मामले बढ़ते हैं, तो आप क्या करेंगे। रिपोर्ट्स कहती हैं कि तीसरी लहर में बच्चों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि तीसरी लहर में क्या करना चाहिए उसकी तैयारी अभी करनी होगी, युवाओं का वैक्सीनेशन करना होगा, अगर बच्चों पर असर बढ़ता है तो कैसे संभालेंगे क्योंकि बच्चे तो अस्पताल खुद नहीं जा सकते। 

तीसरी लहर से बच्‍चों को खतरा
वायरोलॉजिस्‍ट और कोविड एक्सपर्ट कमेटी, कर्नाटक के मेंबर डॉ. वी रवि सहित तमाम जानकारों ने आगाह किया है कि कोरोना की तीसरी लहर से बच्‍चों को ज्‍यादा खतरा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि जब तक देश में तीसरी लहर दस्‍तक दे, तब तक ज्‍यादातर वयस्‍कों को कोरोना का कम से कम एक टीका लग चुका हो। डॉ वी रवि ने कहा कि यह केंद्र और राज्‍य सरकारों के लिए मजबूत रणनीति बनाने का समय है। अक्‍टूबर और दिसंबर के बीच उन्‍हें स्थितियों को संभालने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।

तीसरी लहर के बारे में एक्सपर्ट बता रहे हैं कि वह आने वाली है। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित करेगी। अगर बच्चे अस्पताल जाएंगे तो फिर पैरेंट्स को भी साथ जाना होगा। इसी कारण वैक्सीनेशन इस ग्रुप के लोगों को जल्द दिया जाना चाहिए और वैक्सीनेशन समय पर पूरा किया जाए। इसके लिए साइंटिफिक तरीका अपनाया जाना चाहिए और इसका इंतजाम किया जाए। अगर हम अभी तैयारी करेंगे तो हम स्थिति से निपट पाएंगे।

कोरोना की तीसरी लहर पर सुप्रीम कोर्ट

बच्चों में खांसी, जुकाम के साथ पेट की समस्याएं है लक्षण
कोरोना की मौजूदा लहर में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ नवजात शिशुओं में भी संक्रमण मिला है। गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख और निदेशक डॉ. कृष्ण चुघ के अनुसार ज्यादातर बच्चे, जो कोविड-19 से प्रभावित हैं, उनमें मौजूद लक्षण हल्का बुखार, खांसी, जुकाम और पेट से संबंधित समस्याएं हैं। कुछ को शरीर में दर्द, सिरदर्द, दस्त और उल्टी की भी शिकायत है। गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन गुप्ता का कहना है कि ऐसे भी कुछ मामले हैं, जिनमें निमोनिया भी देखा गया है. कुछ बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) जैसी अधिक गंभीर जटिलताएं भी देखने को मिल रही हैं।

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को सबसे अधिक खतरा है। इसकी वजह उनको वैक्सीन नहीं लगना है। ऐसे में अगले सेशन में स्कूल खोलने को लेकर सरकार को महत्वपूर्ण नीतीगत फैसला लेना चाहिए।

डॉ. वी. रवि, वायरोलॉजिस्ट

बच्चों के लक्षणों को ना करें नजरअंदाज
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेरेंट्स बच्चों में हल्के लक्षणों को नजरअंदाज ना करें। माता-पिता को बच्चों में संभावित डायरिया, सांस लेने में समस्या और सुस्ती जैसे लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार खासकर बुखार के साथ इस तरह के लक्षणों पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बच्चों में ऐसी समस्याओं को पहचानने में माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए। बिना डॉक्टर के सलाह कोई दवा जैसे एंटी वायरल ड्रग्स, स्टेरायड्स, एंटीबायोटिक आदि न दें।

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संक्रमण के दौरान बच्चों को रखें दूर
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए बच्चों को भी मास्क पहनाएं। उन्हें खेलने के लिए घर से बाहर ना निकलने दें। जरूरी हैं कि बच्चों के साथ किसी भी सार्वजनिक स्थानों, फंक्शन या अन्य आयोजन में जानें से बचें। इन जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है। घर में यदि किसी मेंबर को कोरोना हो गया है तो बच्चों को उनसे बिल्कुल दूर रखें। नवजात या बच्चे में कोरोना से जुड़े कोई भी लक्षण हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बच्चों को घर का ही बना खाना दें
दिल्ली एम्स की डॉ झुमा शंकर के अनुसार घर पर बना हुआ खाना बच्चों को खिलाएं। इसके साथ ही फलों और सब्जियों का सेवन अधिक कराएं। अगर बच्चा बाहर के खाने के लिए जिद करता है तो उसे समझाए कि इस समय वो फूड उनके लिए कितना खतरनाक है। नानावटी हॉस्पिटल के सीनियर पीडिएट्रिक्स डॉ. रवि मलिक के अनुसार बच्चों को इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए मल्टी विटामिन दे सकते हैं। लेकिन कोई कोई विटामिन ज्यादा देने से बचे।

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टाइम पर टेस्ट नहीं होने से बच्चे हो रहे बीमार
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश अय्यर के अनुसार, कोरोना की दूसरी लहर के बाद भी लोग जल्दी टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। मेडिकल से दवा लेकर घर में रह रहे हैं। समय पर टेस्ट नहीं करवाने के कारण घर के बच्चे भी रोग का शिकार हो रहे हैं। एक बार कोरोना से ठीक होने के बाद कुछ बच्चों को पोस्ट कोविड की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – तीसरी लहर को लेकर क्या तैयारी है
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कोविड की तीसरी लहर देश में आने वाली है। ये बच्चों को भी प्रभावित करेगी। बच्चे बीमार होंगे, तो जब वह अस्पताल जाएंगे, तो पैरंट्स को भी साथ जाना होगा। ऐसे में आपकी क्या तैयारी है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर सामने दिख रही है। इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर से पहले वैक्सीनेशन के मौजूदा अभियान को तेजी से पूरा करने की जरूरत है।

तो ढाई महीने बाद दस्तक देगी तीसरी लहर
अमेरिका, कोरोनावायरस की दूसरी और तीसरी लहर में केवल ढाई महीने का अंतर था। विशेष रूप से, दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर में अधिक मौतें हुईं। यदि वायरस अमेरिका की तरह ही व्यवहार करता है तो तीसरी लहर अगले ढाई महीनों में आ सकती है। यह भी संभव है कि दूसरी और तीसरी लहर में ज्यादा अंतर न हो। अमेरिका में कोरोनावायरस की दूसरी लहर 45 दिनों तक चली, जबकि भारत में यह 60 दिन से अधिक हो गई है। अभी भी, वैज्ञानिकों के अनुसार, देश में दूसरी लहर का पीक नहीं आया है।

दूसरी लहर जितनी खतरनाक नहीं होगी अगली लहर
मशहूर वैक्सीन एक्सपर्ट गगनदीप कांग का कहना है कि इस महीने के आखिर तक कोरोना के केस कम होने शुरू हो जाएंगे। आगे मामलों में एक या दो और उछाल संभव है लेकिन वह मौजूदा दौर जैसा खतरनाक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह उन क्षेत्रों में जा रहा है जहां वह पिछले साल नहीं पहुंचा यानी मध्य वर्ग को अपना शिकार बना रहा है, ग्रामीण क्षेत्र में अपना पैर पसार रहा है लेकिन वायरस के जारी रहने के आसार कम हैं।

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