मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण का भी हाल बेहद डरावना है, मरीज़ बाहर तड़प रहे हैं लेकिन हॉस्पिटल एडमिट नहीं कर रहे हैं. क्योंकि उनके पास ना बेड हैं ना ऑक्सीजन है I ये हालत मध्य प्रदेश के एक अस्पताल की ही नहीं है. मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी का हाल तो ये है कि कई अस्पताल अब गंभीर मरीजों को एडमिट नहीं रहे, लोग अपने ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतज़ाम खुद कर रहे हैं. जिन्हें अस्पताल एडमिट भी कर रहे हैं, उनके परिवारवालों से पहले ही बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है और लिख कर लिया जा रहा है अगर कोई अनहोनी हुई तो अस्पताल जिम्मेदार नहीं होगा.

मध्य प्रदेश सहित पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस की ऐसी लहर से जूझ रहा है, जिसका कोई अंत नज़दीक नहीं दिख रहा है. ऐसी स्थिति स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल रही है, हर जगह बदहाली है. एक तरफ ऐसी बदइंतज़ामी है, जिससे लोगों में संक्रमण का खतरा है, अगर संक्रमित हो गए तो दूसरी बदइंतज़ामी से आप बच नहीं पाएंगे. ये बदहाली ऐसी है कि जिसमें बेड नहीं मिल रहे, बेड मिल रहे हैं तो ऑक्सीजन नहीं मिल रही.

जबलपुर में लिक्विड प्लांट में आई खराबी के कारण ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से गुरुवार सुबह 5 मरीजों की मौत हो गई। सभी वेंटिलेटर पर थे। वहीं 4 की हालत गंभीर है। यहां के मेडिसिटी अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने से वेंटिलेटर पर 82 वर्षीय महिला की तड़प-तड़प कर जान चली गई। वहीं 4 की मौत सुख-सागर मेडिकल कॉलेज में हुई है।
भोपाल, सागर और इंदौर में ऑक्सीजन की कमी से कई कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी हैं। इंदौर में मरीजों के परिजनों से सिलेंडर मांगा जा रहा है। इस बीच सरकार ने 13 जिलों में नए ऑक्सीजन प्लांट खोलने की घोषणा की है।
इंदौर में अप्रैल के 13 दिन में ही एक्टिव मरीजों की संख्या दोगुना हो चुकी है। एक्टिव केस 10351 हैं। इसमें से तीन हजार मरीज आईसीयू व एचडीयू में गंभीर स्थिति में भर्ती हैं। इस वजह से ऑक्सीजन की खपत 100 टन रोज पर जा पहुंची है, जबकि सप्लाई 60-70 टन ही है। महाराष्ट्र-गुजरात से सप्लाई बहुत कम हो रही है। अस्पतालों में मरीजों के परिजन ड्यूटी दे रहे हैं। जैसे ही बताया जाता है, ऑक्सीजन कम हो रही है। परिजन सिलेंडर भरवाने दौड़ जाते हैं। कार, बाइक, ऑटो से दिन में दो से तीन बार परिजन को सिलेंडर लाना पड़ रहे हैं।
पिछले 24 घंटे में मध्यप्रदेश के 4 बड़े शहरों में ही 4635 नए केस आए हैं और 25 मौतें हुई हैं। एक दिन पहले इन चार शहरों में 4511 केस आए थे और 24 की मौत हुई थी। सबसे ज्यादा नए केस इंदौर में 1693 नए मामले आए और छह कोरोना मरीजों की मौत हो गई। भोपाल में 1637 संक्रमित मिले, 8 लोगों की मौत हो गई। जबलपुर 653 मरीज आए और छह मरीजों की जान चली गई। ग्वालियर में 652 पॉजिटिव मिले और पांच ने जान गंवाई। बुधवार को गुना, रायसेन, रीवा, टीकमगढ़ और छतरपुर में भी लॉकडाउन लगा दिया गया है। अब तक प्रदेश के 52 जिलों में से 28 जिलों में या उनके शहरी क्षेत्रों में लॉकडाउन लगाया जा चुका है।
मध्य प्रदेश सरकार का दावा-
मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि उसने ऑक्सीजन की उपलब्धता 130 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 267 मीट्रिक टन कर दी है, यानी दो गुना ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ा दी गई. लेकिन डिमांड इससे भी दो गुना ज़्यादा है, इसलिए संकट तो होगा ही I
कमी का कारण-
मध्य प्रदेश पर ये संकट इसलिए है क्योंकि गुजरात से ऑक्सीजन सप्लाई में रुकावटें आ गईं, महाराष्ट्र से ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई क्योंकि महाराष्ट्र तो खुद बड़े संकट में है I
सत्ता पक्ष के विधायक ने भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं-
शिवराज सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता और वर्तमान में विधायक अजय विश्नोई ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री से कहा है कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है । मुख्यमंत्री विशेष ध्यान देना चाहिए | उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र में 50000 मरीज थे और ऑक्सीजन 457 मीट्रिक टन खर्च हुई वहीं मध्यप्रदेश में 5000 मरीजों पर 732 मीट्रिक टन ऑक्सीजन खर्च क्यों हुई? यानी साफ तौर पर ऑक्सीजन की खपत महाराष्ट्र में 10 गुना मरीज ज्यादा होने के बावजूद मध्य प्रदेश से कम खर्च हुई। ट्वीट से साफ लग रहा है कि ऑक्सीजन की खरीदी में गड़बड़ी को लेकर अजय विश्नोई ने यह ट्वीट किया है।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब -कांग्रेस
कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बाद कांग्रेस के विधायकों ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति का आरोप लगाया है। साथ ही कांग्रेस के विधायकों ने खाली ऑक्सीजन सिलेंडरों के साथ मौन धरना दिया है। कांग्रेस के विधायक जीतू पटवारी, पीसी शर्मा, कुणाल चौधरी और अन्य विधायकों ने भोपाल के मिंटो हॉल में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर मौन धरना देकर विरोध जताया है।

सभी विधायक खाली ऑक्सीजन के सिलेंडर लेकर धरना स्थल पर पहुंचे और भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा, उपकरण और रेमडेसिविर जैसी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने में असमर्थ रही है।
