रीवा I भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार मध्य प्रदेश के रीवा में केंद्र सरकार के तीन कृषी कानूनों को लेकर किसानों को संबोधित किया। महापंचायत में रीवा के आसपास के जिलों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर शामिल हुए। किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि करहिया मंडी में आयोजित महापंचायत में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधि के साथ समाजसेवी मेधा पाटकर भी मौजूद रहीं।

इसके पहले राकेश टिकैत किसानों के काफिला के साथ इलाहाबाद से रीवा करहिया मंडी पहुंचे। कार्यक्रम 1 बजे से था, लेकिन वह दो घंटे देरी से सभास्थल पर पहुंचे।
विपक्ष कमजोर है- उसे बोलनें नही दिया जा रहा, लेकिन किसान पीछे नहीं हटेगा –
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सभा को संबोधित करते हुये कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नौजवान सो रहा है, इसलिए देश बिक गया। श्री टिकैत नें विपक्ष को लेकर कहा की, विपक्ष कमजोर था, उसने भी कुछ नहीं किया। विपक्ष करे भी क्या, उसे डाउन कर दिया और बोलने नहीं दिया। उन्होनें ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कहा की, एक यंग नेता था, मजबूत था। उसे अपने में शामिल कर लिया। इसलिए विपक्ष चुप बैठ गया।
सभा में विंध्य क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना आदि जिलों से 40 हजार से ज्यादा किसान पहुंचे थे-
रीवा की करहिया मंडी में रविवार को आयोजित किसान महा पंचायत में रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना आदि जिलों से किसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि दुनिया में भूख एक व्यापार है। इसके लिए सोने और भूख का उदाहरण दिया। कहा कि महिलाएं सोना एक साल में 17 बार पहनती हैं। तीज त्योहार और शादी समारोह में, जबकि भूख 700 बार लगती है। दिन में दो बार आदमी को भूख लगती है।इसलिए बीजेपी ने भूख का कारोबार शुरू किया। उन्होनें आगे कहा कि, पहले जमीन खरीद लो। गोदाम बना लो। फिर अनाज का बिक्री करो। राजस्थान और हरियाणा में पहले बड़े-बड़े गोदाम बन गए। उसके बाद कानून लाया गया। सरकार किसी पार्टी की नहीं है, बल्कि व्यापारियों की है। भाजपा के बड़े-बड़े नेता नहीं बोल पा रहे। हमें उन्हें आजादी दिलानी होगी।
जब देश बिक रहा था तो काेई नहीं बोला-
श्री टिकैत नें कहा की, जब देश बिक रहा था तो काेई नहीं बोला। पहले बीएसएनएल की बोली लगी। कर्मचारियों ने आंदोलन किया, कुछ नहीं हुआ। इसी तरह बैंक और रेलवे के साथ हुआ। ट्रांसफर करके सरकार ने सबको दबा दिया, लेकिन किसान दबने वाला नहीं है। किसान यूनियन के नेताओं का दावा है कि महापंचायत में 40 हजार से ज्यादा किसान पहुंचे।
