
देश के नाम संबोधन से पहले इमरान खान ने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी मौजूद थे. कुरैशी आज ही चीन से लौटे हैं.
पाकिस्तान (Pakistan) में संकट से घिरे इमरान खान (Imran Khan) ने साफ कर दिया कि वह इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव का मुकाबला करने का फैसला लिया है. राष्ट्र के नाम संबोधन में इमरान खान ने कहा कि मैं आखिरी गेंद तक खेलूंगा. रविवार को मुल्क का फैसला होगा कि मुल्क किस तरफ जाएगा.
उन्होंने बागी नेताओं और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रविवार को जो गद्दारी होने जा रही है. उसे याद रखना. कौम जो है, आपको माफ नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि जो साढ़े तीन साल में हमने किया वो किसी ने नहीं किया है. विपक्षी पार्टियों का दावा है कि इमरान खान बहुमत खो चुके हैं और उन्हें पीएम पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
बता दें कि नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने 28 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव पर आज चर्चा होने वाली थी. हालांकि सदन की कार्यवाही तीन अप्रैल यानि रविवार तक के लिए टाल दी गई. अब इमरान खान ने कहा है कि रविवार को मुल्क का फैसला होगा.
इमरान खान ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि भगवान ने मुझे सब कुछ दिया- प्रसिद्धि, धन, सब कुछ. मुझे आज किसी चीज की ज़रूरत नहीं है, उसने मुझे सब कुछ दिया जिसके लिए मैं बहुत आभारी हूं. पाकिस्तान मुझसे सिर्फ 5 साल बड़ा है, मैं आजादी के बाद पैदा होने वाले देश की पहली पीढ़ी से हूं. मैं जब स्कूल में था तो पाकिस्तान की मिसाल दी जाती थी. मैं किसी को गुलामी नहीं करने दूंगा.
पाकिस्तान में नेशनल असेंबली में विपक्ष दलों की ओर से संयुक्त रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो गई है. इमरान खान को सरकार बचाने के लिए 342 सदस्यीय संसद (नेशनल असेंबली) में 172 मत की जरूरत पड़ेगी. जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की सरकार में शामिल रही एमक्यूएम-पी ने विपक्ष का सहयोग करने का फैसला किया है और इसके दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है.
एमक्यूएम-पी के सांसद फारोग नसीम और अमीनउल हक ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. एमक्यूएम-पी के नेता फैजल सब्जवाडी ने बुधवार को कहा कि संयुक्त विपक्ष के साथ उसका समझौता हो चुका है. इमरान खान की पार्टी पीटीआई के सदन में 155 सांसद हैं. इमरान को करीब दो दर्जन सांसदों की बगावत और सहयोगी दलों की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.
