
जबलपुर. मध्य प्रदेश (MP) की 3 विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव (By Election) का रंग अब जमने लगा है. हालांकि राजनीतिक दलों के पैंतरे और चुनाव की रोज नयी नयी तस्वीरें सामने आ रही हैं. इस बार उपचुनाव के रण में हाई कोर्ट के वकील भी देखने मिलेंगे.
एमपी की चार सीटों का उपचुनाव बीजेपी कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बना हुआ है. चुनाव जीतकर भी सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस और हार कर भी सत्ता में लौटी बीजेपी दोनों ये चार सीट अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहतीं. जोबट और पृथ्वीपुर कांग्रेस विधायकों के निधन से खाली हुई है. खंडवा और रैगांव पर बीजेपी का कब्जा था. लेकिन दमोह सीट पर अपने दलबदल करने वाले नेता को हराकर जीतने वाली कांग्रेस का मनोबल इस वक्त काफी ऊंचा है. वो अब इन निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी पर नजर रखने के लिए वकीलों की फौज उतार रही है. पार्टी का आरोप है कि प्रशासन बीजेपी और सरकार के दबाव में काम कर रहा है.
वकीलों की दो टीम
कांग्रेस ने पृथ्वीपुर समेत रैगांव विधानसभा सीट के लिए अधिवक्ताओं की दो अलग-अलग टीम बना दी हैं. ये टीम कांग्रेस प्रत्याशी और उनके समर्थकों के लिए की मदद करेंगी. वो प्रशासन पर नजर रखेंगी कि वो बीजेपी के दवाब में काम न करे. अगर ऐसा करेगा तो तत्काल उसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी जाएगी.
पृथ्वीपुर और रैगांव पर नजर
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग ने पृथ्वीपुर और रैगांव विधानसभा उपचुनाव के लिए अलग अलग टीमों का गठन किया है. इनमें अधिवक्ता अशोक गुप्ता, राजेश दुबे, जितेंद्र सिंह, गोविंद अहिरवार और विनोद सिसोदिया को शामिल है. ये अधिवक्ता पृथ्वीपुर विधानसभा में कांग्रेस के लिए काम करेंगे. वहीं रैगांव विधानसभा क्षेत्र के लिए अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी, विशाल यादव और अन्य अधिवक्ता इस विधानसभा क्षेत्र में काम करेंगे. इस सिलसिले में राज्यसभा सांसद और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग के पूर्व अध्यक्ष विवेक तंखा ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी है. उन्हीं के निर्देशन में वकीलों की यह दो टीमें उपचुनाव वाले 2 विधानसभा क्षेत्रों में जाएंगी.
सत्ता पक्ष के दबाव में काम
कांग्रेस की शिकायत है कि दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों पर कांग्रेस प्रत्याशी और उनके समर्थकों को परेशान किया जा रहा है. प्रशासन जिस तरह से उन्हें काम करने से रोक रहा है उससे सत्ता पक्ष का दबाव साफ दिख रहा है. हर काम में विध्न पैदा करने की कोशिश की जा रही है. इस सिलसिले में राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायत की जाएगी.
