
जिला चिकित्सालय में पदस्थ नेत्र विशेषज्ञ डॉ० लक्ष्मण पटेल ने बताया कि वैक्सीन लगवाने के बाद ही कोरोना वायरस से जीता जा सकता है। उन्होंने कहा की इस महामारी के दौर में कोरोना वैक्सीन के दोनों टीके लगवाने के बाद भी मुझे संक्रमण जैसे लक्षण महसूस होने लगे थे। जांच कराने पर रिपोर्ट नेगेटिव होने के बाद भी मैंने कोरोना का ट्रीटमेंट लिया और सामान्य उपचार से घर पर रहकर स्वस्थ हो गया। यदि टीके नहीं लगे होते तो मैं भी बहुत सारे मरीजों की तरह जीवन रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा होता। मेरी आंखों के सामने जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में अच्छे स्वस्थ युवा से लेकर प्रौढ़ तक बेहतर उपचार के साथ ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, रेडमेसिविर इंजेक्शन आदि सभी प्रयासों के बाद भी नहीं बचाए जा सके। वहीं पर जिन लोगों को सिंगल डोज टीका लगा हुआ था वो सभी उन्हीं व्यवस्था और दवाओं के साथ स्वस्थ हो गए।
इसलिए जिन लोगों के मन में जरा सा भी टीके के प्रति भय अथवा कोई संदेह है वो अपने मन से इस बात को निकाल दें और अविलंब टीका लगवाने का कार्य करें। टीका लगने के बाद हरारत जैसे बुखार, शरीर में थोड़ा दर्द या टीका लगने के स्थान में थोड़ा दर्द हो सकता है। यह सब स्वाभाविक प्रक्रिया है और शरीर में एंटीबॉडी का विकास होना दर्शाता है।
डॉ० पटेल ने यह भी बताया कि बी.पी, शुगर, किडनी रोग, कैंसर के मरीजों जोकि 45 वर्ष से अधिक आयु के हैं उनको कोविड का टीका लगवाना अति अनिवार्य है। वर्तमान में जो मृत्यु के प्रकरण सामने आए हैं अधिकांश बी.पी, शुगर, गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे और टीका विहीन होने के कारण कोविड उपचार मैं दवाये कारगर नहीं हो सकी।
इसलिए सभी से अपील है कि यदि कोरोना से अपने आप को सुरक्षित रखना है तो अपने घर परिवार वालों को, जान पहचान वालों को सभी को टीका लगवाने के लिए बताएं और उनको टीका लगवाने में सहयोग करें।
