
कोरोना संकट के इस दौर में अपनी जान की बाजी लगाकर मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटे डॉक्टर्स किसी देवदूत से कम नहीं हैं। हेल्थ वर्कर्स आज किन परिस्थितियों और दबाव में काम कर रहे हैं इस बात की कल्पना करना घर में बैठे लोगों के लिए मुश्किल है। कोरोना काल में अस्पताल में बेड,ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की कमी बनी हुई है। इस बीच लोग अपने मरीज को भर्ती कराने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं जो स्वाभाविक भी है। लेकिन मरीज के नाम पर किसी डॉक्टर को धमकाना कितना उचित है? इंदौर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।जिसमें एक बीजेपी नेता प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेकर अस्पताल संचालक को धमका रहा है । धमकी देने वाले साहब सिंधिया समर्थक मंत्री तुलसी सिलावट के प्रतिनिधि है।
दरअसल, वॉट्सऐप पर एक वॉइस कॉल की ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें संचालक को सीधे सीधे देख लेने की धमकी दी जा रही है । वायरल क्लिप इंदौर स्थित मेदांता अस्पताल के डॉक्टर संदीप श्रीवास्तव और मध्यप्रदेश सरकार में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट के प्रतिनिधि के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत की है। इस फोन पर पप्पू शर्मा नाम का व्यक्ति अस्पताल संचालक डॉ संदीप श्रीवास्तव को फोन पर धमका रहा है। मामला किसी मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने से जुड़ा है। पप्पू शर्मा कह रहे हैं कि ‘मैंने तीन दिन से आपको बोल रखा है, तीन दिन में क्या कोई आईसीयू बेड खाली नहीं हुआ है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है, आप मना कर दीजिए कि नहीं होगा। माननीय प्रभारी मंत्रीजी बोल रहे हैं और आप इतने दिन से हल्के में ले रहे हैं।’ इसके बाद वो धमकाने पर उतर आए।
बातचीत के दौरान सिलावट के प्रतिनिधि पप्पू शर्मा डॉक्टर श्रीवास्तव को धमकाते हुए कहते हैं कि ‘आप बोल दो नहीं कर पाऊंगा, हमें कोई दिक्कत नहीं है। आप मेरा नाम लिख लो पप्पू शर्मा। मैं छाती ठोंक कर बात करता हूं। अगर हमारा काम नहीं होगा तो कैसे होगा।कोरोना तो 20-25 दिन में चला जाएगा । हॉस्पिटल को इसी क्षेत्र में रहेगा न।लेकिन मंत्री जी को हल्के में लोगे तो पार्किंग में गाड़ियां खड़ी नहीं हो पाएगी।’ जवाब में डॉक्टर माफी मांगने के अंदाज में कहते हैं कि आपका फोन मिस हो गया। इसके बाद पप्पू शर्मा गुर्राते हुए कहते हैं, तीन-चार दिन हो गए, मुझे मना कर दो न… बेड नहीं दे पाऊंगा।शर्मा ने धमकाते हुए कहा, ‘देख लेना फिर आपकी इच्छा हो तो करना। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। हमें मालूम है फिर क्या होता है और क्या नहीं होता है सब। ठीक है न?’
अब सवाल यह है जो डॉक्टर अपना घर-बार छोड़कर, अपनों से दूर होकर, अपनी जान हथेली पर रखकर दूसरों की जान बचाने में जुटे हैं उन्हें ओहदेदारों के लोग इस तरह से धमकाएं यह कहां तक उचित है। यह वही शिवराज सिंह चौहान की सरकार है जिसने कैमरों के सामने हेल्थ वर्कर्स पर फूल बरसाया था, लेकिन शिवराज के मंत्रियों के लोगों का फूल बरसाने का तरीका अलग ही किस्म का देखने को मिल रहा है। सवाल यब भी है कि रसूखदार लोग तो मंत्री जी से धमकी दिलवाकर बेड उपलब्ध करवा भी लेंगे, लेकिन आम लोग के पास क्या विकल्प है?
